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नाॅर्थ इंडिया के इस हॉस्पिटल में रोबोट ने किया ऑपरेशन, 60 साल के बुजुर्ग को मिला नया जीवन

bhaskar news | Apr 21, 2017, 04:01 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
नाॅर्थ इंडिया के इस हॉस्पिटल में रोबोट ने किया ऑपरेशन, 60 साल के बुजुर्ग को मिला नया जीवन
चंडीगढ़. तंबाकू का सेवन करने वाले मनीमाजरा के सज्जन सिंह (बदला नाम) ने कभी नहीं सोचा था कि बुढ़ापे की दहलीज पर कदम रखते ही कैंसर का दानव जकड़ लेगा। सज्जन की हालत एक दिन बिगड़ गई। डाॅक्टर्स को दिखाया तो पता चला कि जीभ में कैंसर है। कुछ भी खाना आसान नहीं था। पीजीआई से इलाज करवाना शुरू किया। डाॅक्टर्स ने जीभ के कैंसर सैल्स को खत्म करने के लिए रेडियोथैरेपी दी। पेशेंट्स को जीवन में सिर्फ एक बार ही जीभ की रेडियोथैरेपी दी जा सकती है। दोबारा यह थैरेपी घातक साबित हो सकती है। रेडियोथैरेपी लेने के दो महीनों के बाद सज्जन सिंह को दोबारा जीभ पर कैंसर हो गया। अब कैंसर को हटाने के लिए रेडियोथैरेपी नहीं दी जा सकती थी। 7 महीने में 71 पेशेंट्स के मुंह के कैंसर को किया दूर...
सज्जन भी अन्य कैंसर पेशेंट्स की तरह दम तोड़ देता, अगर पीजीआई के ईएनटी डिपार्टमेंट के पास रोबोट होता। रोबोट की चार बाजुओं की मदद से ईएनटी सर्जन डॉ. अशोक गुप्ता ने सज्जन की जीभ के कैंसर को उखाड़ दिया। जीभ के निचले हिस्से में 2 से 3 सेंटीमीटर का कैंसर था, रोबोट ने कैंसर सैल्स को बाहर खींच लिया, जिससे कैंसर दूर हो गया। सज्जन की सर्जरी को 6 महीने बीत चुके हैं और वे बिल्कुल ठीक हैं। पीजीआई के ईएनटी सर्जन डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि पीजीआई नाॅर्थ इंडिया का पहला ऐसा हॉस्पिटल है, जहां मुंह के कैंसर का रोबोटिक सर्जरी से इलाज किया जा रहा है।
नींद की बीमारी को भी करेगा दूर...
ऐसे लोग जिन्हें रात को खर्राटों की वजह से नींद नहीं आती। स्लिप एपनिया की इस बीमारी का तोड़ भी रोबोट के पास मौजूद है। डॉ.गुप्ता ने बताया कि फिलहाल रोबोट ने उन पेशेंट्स की स्लिप एपनिया की बीमारी दूर की है जिन्हें मुंह का कैंसर था और जिनकी जीभ का पिछला हिस्सा बढ़ जाने की वजह से सांस लेना मुश्किल हो जाता था। ऐसे लोगों की जीभ के बढ़े हुए हिस्से को काटकर श्वास नली की रुकावट को दूर कर दिया और अब रोबोट से स्लिप एपनिया के दूसरे पेशेंट्स का इलाज भी हो सकेगा।
ईएनटी डाॅक्टर्स की ट्रेनिंग के लिए पीजीआई को दिया दूसरा रोबोट...
पीजीआई में वीरवार को वाटी-कुट्टी का दूसरा रोबोट भी पहुंच गया। तीन दिवसीय वर्कशॉप के दौरान रोबोट विंसी की मदद से हेड नेक कैंसर से जुड़ी सर्जरी की जाएंगी। रोबोट के हाथ कितनी गहराई में जाकर कैंसर सैल्स का सफाया कर सकते हैं और किस टेक्निक से रोबोट के हाथ चलाने हैं, यह सब देशभर से आने वाले 300 डाॅक्टर्स को सिखाया जाएगा। तीन साल पहले पीजीआई के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में रोबोटिक सर्जरी शुरू की गई थी। वाटी-कुट्टी का दूसरा रोबोट देश में पहली बाद हेड नेक सर्जरी के लिए तीन हिस्सों में इस्तेमाल किया जाएगा। सिम्युलेटर, कैडावर के अलावा लाइव सर्जरी में इस्तेमाल किया जाएगा।
सज्जन सिंह पहले ऐसे पेशेंट थे, जिनकी जीभ का कैंसर दूर करने में सफलता मिली। इसके बाद बहुत से पेशेंट्स के मुंह के कैंसर को दूर किया जा चुका है। 7 महीनों में 71 पेशेंट्स के मुंह के कैंसर को दूर किया जा सका है। मुंह के कैंसर का पारंपरिक तरीकों से इलाज संभव नहीं है, बहुत से ऐसे कैंसर होते हैं, जिसमें इलाज की पुराने तरीके इंसान का आवाज छीन लेते हैं। वोकल कोर्ड के कैंसर को दूर करने के लिए किए जाने वाले ऑपरेशन से बहुत से पेशेंट्स की आवाज चली जाती है, क्योंकि उसमें पूरे के पूरे कोर्ड को निकालना पड़ जाता है। थायरॉयड कैंसर के पेशेंट्स के गले को चीर कर कैंसर को दूर करना पड़ता था जबकि अब ऐसा करने की जरूरत नहीं रही।
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Web Title: Robot did the operation in hospital
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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