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1984 सिख-दंगे के गुनाहगारों से एक वकील की जंग, पढ़िए पूरी कहानी उनकी जुबानी

Bhaskar news | Sep 15, 2013, 02:07 IST

  • ये हरिवंदर सिंह फूलका का ही संघर्ष और दबाव है जो सरकार को मजबूर करता है कि सिख दंगों के आरोपी जगदीश टाइटलर को मंत्रिमंडल से हटा दे। प्रधानमंत्री को संसद में दंगों के लिए माफी मांगनी पड़े। और सोनिया गांधी को अमेरिका के अस्पताल में समन तामील करा दे। जानिए फूलका क्यों लड़ रहे हैं ये लड़ाई...

    नई दिल्ली।1984 के सिख-दंगों के लिए न्याय की लड़ाई जारी रखने का श्रेय यदि किसी एक व्यक्ति को जाता है, तो वे हैं हरविंदरसिंह फूलका। 'सिख फॉर जस्टिस' संस्था को वे पिछले 30 साल से कानूनी मदद दे रहे हैं। विनाशकारी दंगों के दोषियों को कठघरे में खड़ा करने के लिए। पिछले दिनों इस संस्था की कोशिशों का ही नतीजा था, कि इलाज कराने अमेरिका गई सोनिया गांधी को अस्पताल के भीतर कोर्ट का समन दिया गया। फूलका उन पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाते हैं।

    फूलका के पूर्वज पंजाब के शासक रहे हैं। वे दंगाइयों से इसलिए भी ज्यादा नफरत करते हैं, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ इसे नजदीक से देखा है, बल्कि भोगा भी है। थोड़ा-सा कुरेदने पर उनके दिल का गुबार फट पड़ता है। मानो कल की ही बात हो। कोई 29 की उम्र रही होगी उनकी। दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे। वहीं उन्हें इंदिरा गांधी की हत्या की खबर लगी। अगले दिन गर्भवती पत्नी के साथ मोटरसाइकिल पर बाजार से दक्षिण दिल्ली स्थित घर लौट रहे थे कि रास्ते दोस्त मिले। बताया कि सिक्खों को मारा जा रहा है।

    आगे की स्लाइड में पढ़िए सिख दंगों का पूरा हाल, एडवोकेट हरविंदर सिंह की जुबानी..

  • फूलका कहते हैं कि मैंने मेनरोड से न जाते हुए कोटला मुबारकपुर झुग्गी वाला रास्ता पकड़ा। तभी पीछे से शोर सुनाई दिया। गाड़ी रोकी। मुड़कर देखा तो कोटला गुरुद्वारा जल रहा था। कुछ ही देर में लाशें बिछने लगीं। बदहवास मैं जैसे-तैसे घर पहुंचा। लेकिन यहां भी चैन नहीं मिला। कुछ लोग ढूंढते हुए घर आ गए। मकान मालिक एसएस बाहरी ने फूलका और उनकी पत्नी को अपने स्टोर रूम में छुपाया और दो दिन तक वहीं रखा। मौका देख वे पत्नी को लेकर एयरपोर्ट पहुंचे। खचाखच भरे जहाज के कॉकपिट में बैठकर चंडीगढ़ पहुंचे।

    फोटोः लॉ लाइब्रेरी में एडवोकेट हरविंदर सिंह

  • दंगे ने हजारों जानें लीं। विचलित फूलका ने प्रैक्टिस बंद करने का फैसला किया। कुछ दिन बाद वे अपना सामान समेटने दिल्ली पहुंचे तो पता चला कि पीडि़तों के बुरे हाल हैं। कोर्ट में उनका शपथ-पत्र देने में परेशानी आ रही है। वे दंगा पीडि़तों के लिए बनाए गए फर्श-बाजार शरणार्थी शिविर गए। वहां उन्हें एक बुजुर्ग मिले। बताने लगे पत्नी, बेटा और बहू मारे गए हैं। चार पोतियां बचीं हैं, जिन्हें नारी निकेतन भेज दिया गया है। वे उनकी कस्टडी चाहता थे, लेकिन कोर्ट फीस चुकाने के लिए पास पैसे नहीं थे। फूलका कहते हैं दंगा पीडि़तों के लिए ये मेरा पहला केस था, जो मैंने हाईकोर्ट में फाइल किया। वे दंगों से जुड़े हर केस की सुनवाई में मौजूद रहते थे। भले ही वह उनका केस हो या न हो।

    फोटोः जगदीश टाइटलर का फाइल फोटो

  • फूलका के इस संघर्ष में उनकी पत्नी मनिंदर कौर ने भी बराबर का साथ दिया। वे अमेरिका इंस्टीट्यूट ऑफ बेकिंग, कंसास की असाधारण छात्रा रही हैं। फूड टेक्नोलॉजिस्ट के बतौर उनका शानदार कॅरियर था। लेकिन पति की लड़ाई में शामिल होने के लिए उन्होंने विदेश की नौकरी ठुकरा दी। फूलका कहते हैं हमारा घर दंगाइयों के खिलाफ मुहिम का सेंटर बनता जा रहा था। दंगों के प्रमुख आरोपियों में शामिल सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर का खौफ दिखाया जाता था फूलका को।

    फोटोः आरोपी सज्जन कुमार का फाइल फोटो

  • लेकिन वे झुके नहीं। 2001 में इन दंगों की सच्चाई से दुनिया को अवगत कराने के लिए उन्होंने वेबसाइट शुरू की 'कार्नेज84 डॉट कॉम'। वेबसाइट लांच होने के दस दिन के भीतर 30 देशों के डेढ़ लाख लोगों ने इसके कंटेंट को देखा। फूलका ने इसी विषय पर एक किताब भी लिखी है 'व्हेन ए ट्री शुक डेल्ही'। ये फूलका का ही दबाव था कि मनमोहन सिंह सरकार ने जगदीश टाइटलर को मंत्रीपद से हटाया था और सिख दंगों के लिए संसद में माफी मांगी थी। वे कहते हैं यह लड़ाई तब जारी रहेगी, जब तक कि सरकार दंगे के दोषियों को बचाना बंद नहीं कर देती और सभी आरोपियों को सजा नहीं मिल जाती।

    फोटोः हरविंदर सिंह(एडवोकेट)

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Web Title: 1984 Sikh Roits, Harvinder singh Phoolka, Accused Jagdish Tytler, Court, New Delhi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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