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दामिनी के दरिंदें कैसे पहुंचे फांसी तक, पढ़िए फैसले के पीछे की पूरी कहानी

इंद्र वशिष्ठ\संतोष ठाकुर | Sep 14, 2013, 03:33 IST

  • नई दिल्ली।दिल्ली पुलिस की दक्षिण-पूर्वी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त विवेक गोगिया का कहना है कि गैंगरेप मामले में साइंटिफिक जांच को उच्चतम स्तर पर ले जाया गया। छात्रा के नाखूनों से सैंपल लिए गए। छात्रा के शरीर पर मिले दांतों के निशानों को साबित किया गया। दांतों की फॉरेंसिक एविडेंस को पहली बार इस मामले में साक्ष्य के रूप में लिया गया। विवेक गोगिया के नेतृत्व में दक्षिण जिला पुलिस द्वारा गैंगरेप मामले की तफ्तीश की गई।

    जजमेंट पुलिस के लिए एक सबक

    विवेक गोगिया का कहना है कि गैंगरेप के जजमेंट को पुलिस के लिए एक सबक के रूप में मानते है। इस मामले की तफ्तीश में जो तरीके अपनाए गए, उनको पुलिस की ट्रेनिंग में शामिल करेंगे, ताकि मामलों की तफ्तीश में इन कदमों को शामिल किया जा सके।

    साक्ष्यों को लेकर तनाव में थी पुलिस

    गोगिया ने बताया कि शुरू में इस तनाव में थे कि क्या पर्याप्त साक्ष्य जुटा पाएंगे। वारदात में इस्तेमाल बस में लगी अल्युमिनियम की पत्ती के नीचे से भी साक्ष्य जुटाए गए। वारदात के बाद अपराधियों ने बस को धो दिया था। महज 17 दिन में पूरी चार्जशीट बना कर कोर्ट में पेश कर दी थी। पुलिस की चार्जशीट की सभी धाराओं को मानते हुए कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। पुलिस द्वारा एकत्र साक्ष्यों को विशेष सरकारी वकील और उनके साथियों ने बहुत ही अच्छे तरीके से कोर्ट में पेश किया।

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  • कौन-कौन से सबूत
    टीथ बाइट
    जांच से जुड़े एक अफसर के अनुसार टीथ बाइट साबित करने के लिए अपराधियों के दांतों की फोटो ली गई। मैटेरियल पर उनके दांतों की छाप ली गई। छात्रा के शरीर पर मिले दांत से काटने के निशान मुख्य आरोपी राम सिंह और अक्षय ठाकुर के दांतों के पाए गए।
    डीएनए प्रोफाइलिंग
    इस मामले में बड़े पैमाने पर डीएनए प्रोफाइलिंग कराई गई। पुलिस ने साइंटिफिक एविडेंस के तौर पर अपराधियों की डीएनए रिपोर्ट्स, फिंगर प्रिंट, डेंटल माडयूल कोर्ट के समक्ष पेश किए। डीएनए एनालिसिस ने पीडि़ता और अपराधियों की पहचान बिना किसी संदेह के साबित कर दी कि वारदात के समय वे बस में मौजूद थे। वारदात में इस्तेमाल बस और जहां पर युवक और युवती को फेंका गया था, वहां से और अपराधियों द्वारा सबूत नष्ट करने के लिए जला दिए गए पीडि़तों के कपड़ों से भी डीएनए डेवलप कराया गया।
    इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य
    वारदात के दौरान बस जिस रास्ते से गुजरी थी, उसे रूट के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन के लोकेशन से साबित किया गया।
    6 तरीके से अपराधियों की पहचान सुनिश्चित की गई
    इस मामले में शक की कोई गुंजाइश न रह जाए, इसके लिए अपराधियों की पहचान 6 तरीके से सुनिश्चित की गई। शिनाख्त परेड द्वारा, कोर्ट में कठघरे में, डीएनए मैच करा कर, फिंगर प्रिंट, टीथ बाइट से और छात्रा द्वारा मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर अपराधियों की पहचान सुनिश्चित की गई।

  • बस एक ही जुनून था कोई अपराधी बच न पाए : राजेंद्र सिंह
    दिल्ली गैंगरेप के गुनहगारों को फांसी की सजा का एलान होते ही कोर्ट रूम में मौजूद उन सभी जांच अधिकारियों के चेहरे खिल गए, जिन्होंने नौ महीनों की कड़ी मेहनत के बाद इस मामले को अंजाम तक पहुंचाया था। इस खुशी को बयां करते हुए दक्षिण दिल्ली एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) प्रमुख राजेंद्र सिंह ने भास्कर से इस मामले को सुलझाने के दौरान के अनुभवों को साझा किया। राजेंद्र सिंह ने कहा, कि उन्हें 16 दिसंबर की रात करीब डेढ़ बजे इस वारदात के बारे में सूचना दी गई। इस केस ने मुझे अंदर से हिला दिया था। मेरे दिल में एक ही ख्वाहिश थी कि कोई भी मुजरिम बच कर न जाने पाए। रात में ही तत्कालीन डीसीपी छाया शर्मा और एडिशनल डीसीपी प्रमोद कुशवाहा के नेतृत्व में एसटीएफ, एसएचओ वसंत विहार अनिल शर्मा, एसएचओ केएमपुर नरेश सोलंकी, स्पेशल स्टाफ प्रभारी एसवीर, इंस्पेक्टर नीरज, विजय सिंह सहित अन्य अधिकारियों को शामिल कर स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम का गठन कर दिया गया। सुबह तक हमारे पास इस केस से जुड़ी सिर्फ एक ही जानकारी थी कि जिस बस में वारदात को अंजाम दिया गया, उसके पर्दे पीले और सीटें लाल रंग की थीं और पिछला गेट नहीं खुलता है।
    17 दिसंबर की सुबह सीसीटीवी फुटेज की मदद से हमने बस की शिनाख्त कर ली। इसके बाद शाम चार बजे मामले के पहले गुनहगार राम सिंह को गिरफ्तार कर लिया। राम सिंह से मिली जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से 18 दिसंबर की दोपहर दो बजे विनय और पवन को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी बीच जानकारी मिली कि इस केस में शामिल एक अन्य अपराधी अक्षय दिल्ली से भागने में सफल हो गया है। अक्षय की गिरफ्तारी में सबसे बड़ी अड़चन उसकी पहचान न होना था। लिहाजा हमने एक दर्जन ऐसे लोगों की तलाश की, जो उसे पहचानते थे। अक्षय को 21 दिसंबर की शाम बिहार में हमारी टीम ने गिरफ्तार कर लिया। इसी दिन नाबालिग को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
    वसंत विहार पुलिस स्टेशन के बाहर हो रहे प्रदर्शनों के चलते करीब 17 दिनों तक जांच से जुड़े सभी अधिकारियों को पुलिस कॉलोनी और डीटीसी डिपो की दीवार फांद कर थाने में जाना पड़ता था। इतना ही नहीं, इस केस में पुलिस की भूमिका की जांच कर रहे तीन-तीन कमीशनों से रोजाना रूबरू होना पड़ता था। जांच अधिकारी सुबह से शाम तक केस से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगे रहते और शाम होते ही आयोग के सामने पेशी के लिए चले जाते थे।
    इस केस में ऐसा कोई भी साइंटिफिक एविडेंश नहीं होगा, जिसे जांच टीम ने अदालत के समक्ष नहीं रखा हो। चार्जशीट तैयार करने के लिए जांच टीम के करीब छह अधिकारी करीब 72 घंटों तक एक कमरे में बंद रहे। चार्जशीट तैयार करने के बाद तत्कालीन पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार, स्पेशल सीपी धर्मेंद्र कुमार और दीपक मिश्रा, ज्वाइंट सीपी विवेक गोगिया ने इसे तीन-तीन बार पढ़ा। चार्जशीट को पूरी तरह से पुख्ता करने के बाद जांच टीम ने इसे अदालत में पेश किया।
  • किन-किन धाराओं के तहत सजा मिली
    धारा-302 (हत्या) : फांसी और 10-10 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) : आजीवन कारावास और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 365 (अपहरण) : सात साल की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 366 (यौन संबंध बनाने के इरादे से अपहरण) : सात साल की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 376(2)(जी) सामूहिक बलात्कार : आजीवन कारावास और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) : दस साल की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 307 (हत्या का प्रयास) : सात साल की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 201(सबूत नष्ट करना) : सात साल की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 395 (डकैती) के साथ 397 (मारने या गंभीर चोट पहुंचाने के इरादे से डकैती) : दस साल की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
    धारा 412 (गलत मंशा से डकैती की गई चीजों को रखना) : दस साल की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना
  • खुदा का शुक्र है कि दोषियों को फांसी की सजा मिली है। कोर्ट में दोषियों को सजा देने के मामले पर पिछले कुछ दिनों से नजर गड़ाए बैठा था। पर आज भी निर्भया की उस दर्दनाक हालत के बारे में सोचकर दिल दहल उठता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुरोध के बाद जब मैं पहली बार पीड़िता से मिलने गया था तो महसूस किया कि नाजुक हालत होने के बावजूद उसमें जीने की जिद अनूठी थी।
    डॉ. नरेश त्रेहन, प्रमुख, मेदांता मेडिसिटी
    इस केस ने परिवार-रिश्तेदारों में मेरी पेशे की इज्जत बढ़ा दी है। इस काम के बाद मुझे अपने सरकारी वकील होने पर फक्र है। यह मामला भी दूसरे मामलों की ही तरह था। अच्छा लगता है, जब हमारे प्रयास सफल रहते हैं और जिसकी सराहना होती है। अभियोजन पक्ष के सभी सदस्यों के सामूहिक प्रयास का यह नतीजा है कि हम आरोपियों पर दोष साबित करने में सफल रहे।
    राजीव मोहन, सरकारी वकील
  • किले में तब्दील था साकेत कोर्ट परिसर
    दिल्ली गैंगरेप मामले के गुनहगारों की सजा पर असमंजस के चलते हंगामे की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने साकेत कोर्ट परिसर के भीतर एवं बाहर करीब पांच सौ पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी। दिल्ली पुलिस ने साकेत कोर्ट की ओर जाने वाले मार्गों पर सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर वाहनों की जांच शुरू कर दी थी। कोर्ट स्टाफ, वकीलों एवं मीडियाकर्मियों के अलावा सिर्फ मामले की सुनवाई के लिए आए लोगों को ही कोर्ट परिसर में दाखिल होने की इजाजत दी जा रही थी। दिल्ली गैंगरेप के गुनहगारों को न्यायालय में लाते व ले जाते समय सड़कों को लगभग पूरी तरह से खाली कर लिया गया था। वहीं, न्यायाधीश योगेश खन्ना की कोर्ट संख्या 304 के बाहर करीब सौ पुलिसकर्मियों को तैनात कर सिर्फ मामले से जुडे लोगों को कोर्ट रूम में जाने की इजाजत दी जा रही थी। करीब दो बजे मामले की कवरेज के लिए मीडियाकर्मियों को कोर्ट परिसर के भीतर जाने की इजाजत दी गई। सजा का एलान होते ही सभी गुनहगारों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत परिसर से वैन में बैठाकर तिहाड़ जेल की तरफ रवाना कर दिया गया था।
    सुरक्षा के लिहाज से पुलिस वैन के साथ पुलिस के करीब दो दर्जन जवानों को तिहाड़ जेल भेजा गया था।
  • महिला संगठनों ने किया फैसले का स्वागत
    बहुचर्चित दिल्ली गैंगरेप मामले में आरोपियों को सजा मिलने पर महिला संगठनों ने खुशी जाहिर की है। हालांकि, फांसी की सजा पर संस्थाओं की अपनी-अपनी राय है।
    महिला आयोग ने कहा नजीर साबित होगा : राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने दैनिक भास्कर से कहा, 'निर्भया मामले में दोषी सभी आरोपियों को फांसी की सजा एक नजीर साबित होगा। मौत की सजा से समाज में महिलाओं से घिनौनी हरकत करने की मानसिकता रखने वालों को एक कड़ा संदेश जाएगा। हम उम्मीद कर सकते हैं। इससे महिलाओं का विश्वास कोर्ट के प्रति बढ़ेगा।
    यूएनवीमन फांसी की बजाए उम्र कैद चाहती थी : महिला अधिकारों पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनवीमन ने दोषियों के लिए फांसी को काफी कड़ा माना है। भारत में यूएनवीमन की प्रतिनिधि डॉ. रेबेक्का आर टेवरेस का कहना है कि महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। लेकिन संयुक्त राष्ट्र पूरी दुनिया में फांसी नहीं देने के हक मे ही रही है। इसीलिए अगर कोर्ट दोषियों को उम्र कैद देता तो कहीं ज्यादा बेहतर होता। सेंटर फॉर सोशल सर्विसेज की प्रमुख रंजना कुमारी का कहना है कि निर्भया के लिए सभी आरोपियों को मौत की सजा ही सबसे बड़ा न्याय है। हालांकि, सजा मिलने में कितना समय लगेगा, ये अभी देखने की बात है।
    देश में महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह के शारीरिक शोषण को रोकना ही सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
  • रेप : फास्ट ट्रैक सुनवाई के लिए अदालतों से मशविरा
    केंद्रीय कानून मंत्रालय ने दुष्कर्म सहित अन्य महिला अपराध की फास्ट ट्रैक सुनवाई के लिए ऐसी अदालतों के गठन को लेकर सभी राज्यों के हाईकोर्ट से चर्चा करने का निश्चय किया है। इसके लिए जल्द ही औपचारिक वार्ता शुरू की जाएगी।
    कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना के लिए राज्यों की पहल की जरूरत है। लेकिन संसाधन और अन्य कारणों का हवाला देकर राज्यों की ओर से इसमें देर हो सकती है। इसे देखते हुए मंत्रालय प्रयास कर रहा है कि राज्यों के हाईकोर्ट जजों के साथ चर्चा कर बीच का रास्ता निकाला जाए। उनकी अनुशंसा पर केंद्र सरकार अपनी ओर से किस तरह की पहल कर सकती है, इसका रास्ता खोजा जाएगा। एक अधिकारी ने कहा कि कानून मंत्री कपिल सिब्बल स्वयं इस योजना में रुचि ले रहे हैं। ऐसे में संभव है कि कम से कम महानगरों और बड़े शहरों में ऐसी फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर कोई विशेष योजना शुरू की जाए।
  • पोर्न साइट बंद करने के लिए दूरसंचार मंत्रालय चल रहा है उलटे पांव
    तकनीकी और कानूनी उलझनों से दो-चार होने की शंका और इससे सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश के कम होने से सशंकित दूरसंचार मंत्रालय ने पोर्न साइट पर पाबंदी के लिए उलटे पांव चलना शुरू कर दिया है। उसने सभी सामाजिक और अन्य संगठनों से ऐसी साइट पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अनुरोध मंगाने का कार्य शुरू करने का निश्चय किया है। मंत्रालय अधिकारियों के मुताबिक अगर शिकायत और मांग आती है तो निश्चित तौर पर उस पर कार्रवाई की जाएगी।
    असल में मंत्रालय को लगता है कि विदेशों की ऐसी कंपनियां जो पोर्न साइट चलाती हैं, वे सूचना तकनीक से जुड़े अपने अन्य कार्य में भारत में निवेश रोक सकती हैं, अगर यहां पर पोर्न साइट बंद होती है। ऐसे में उसने इसके लिए व्यापक जमीन तैयार करने का मन बनाते हुए सामाजिक व अन्य संगठनों से कहा है कि वे शिकायत भेजें। इन पोर्न साइट को बंद करने के लिए मांग पत्र दें। इसके आधार पर ऐसी साइटों को भारत में प्रतिबंधित करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। आखिर ऐसी क्या वजह है कि मंत्रालय सीधे इन साइट को बंद नहीं कर सकता है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसी लगभग सभी साइटें देश के बाहर से संचालित होती हैं। उनके उपग्रह दूसरे देशों से संचालित होते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी अध्ययन जरूरी है। जब तक लोगों की मांग नहीं आती है, किस कारण के साथ संबंधित देश से बात की जाए, यह समस्या है।
  • एनसीआर में कम नहीं हुए महिलाओं के प्रति अपराध
    कोर्ट ने निर्भया केस में 10 सितंबर को चारों आरोपियों को दोषी ठहरा दिया और शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई, लेकिन इस अवधि में एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ अपराध का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। 10 सितंबर को मॉडल टाउन के राणा प्रताप बाग में कमलेश (40) की हत्या कर शव पार्क में फेंक दिया गया। इसी दिन न्यू उस्मानपुर इलाके में नौ वर्षीय बच्ची का अपहरण कर बदमाशों ने यमुना खादर में दुष्कर्म का प्रयास किया और विफल रहने पर उसे बुरी तरह जख्मी कर दिया। साकेत कोर्ट परिसर स्थित डिस्पेंसरी के कर्मचारी पर महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
    नोएडा में डकैतों में महिला से दुष्कर्म किया तो गुड़गांव में सगे भाई ने बहन से दुष्कर्म किया। थाना कोतवाली पुलिस ने फरीदाबाद की डबुआ कॉलोनी निवासी एक युवती की शिकायत पर एक युवक को अश्लील छींटाकशी करने के आरोप में गिरफ्तार किया। 11 सितंबर को डीयू की छात्रा ने युवक पर दुष्कर्म एवं अश्लील वीडियो बनाने का आरोप लगाया। गुड़गांव के पॉश इलाके में रह रही ब्रिटिश मूल की एक 9 साल की बच्ची के साथ चालक द्वारा छेड़छाड़ व अश्लील हरकत करने का मामला सामने आया।
    सारन थाने में दर्ज कराए एक मामले में फरीदाबाद एनआईटी निवासी एक युवती ने युवक पर करीब डेढ़ साल से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। 12 सितंबर को वसंतकुंज इलाके में 20 वर्षीय युवती ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर लक्ष्मण नामक युवक पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। उधर, साउथ कैंपस इलाके में घर में घुस कर महिला के साथ दुष्कर्म का मामला भी सामने आया। गुड़गांव के खेड़कीदौला में 30 वर्षीय महिला के साथ सिक्योरिटी सुपरवाइजर समेत तीन लोगों ने गैंगरेप किया।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Damini Case Justice, saket Court, Acussed Hanging Punishment, Delhi Police, Medanta Hospital, New Delhi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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