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जिंदा होती 'दामिनी' तो हमेशा निभाता साथ, दोस्त ने बताई LOVE STORY

Dainikbhaskar.com | Jul 11, 2013, 07:46 IST

  • नई दिल्ली। दामिनी भले ही आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उसके दोस्त ने उसका मोबाइल नंबर आज भी अपने सेल फोन से डिलीट नहीं किया है। दामिनी का नंबर उसके सेलफोन में 'जेवी' नाम से सेव है। संस्कृत के इस शब्द का हिंदी में मतलब जीवन होता है। उसने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया है कि दामिनी उसे 'परफेक्ट मैन' बुलाया करती थी। दामिनी का उसे लास्ट गिफ्ट एक ग्रे कलर की टाई थी जो आज भी उसके नई दिल्ली के अपार्टमेंट में रखी है। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' के साथ बातचीत में युवक ने 16 दिसंबर की रात और अपनी दोस्त के बारे में कुछ नई बातें बताई हैं (इससे पहले एक टीवी चैनल को उसने जो आंखों देखी बताई थी, वह पढें। उसने कहा था कि तन ढंकने के लिए किसी ने कपड़े तक नहीं दिए थे 'दामिनी' को...)।
    आईटी प्रोफेशनल, 28 साल के इस युवक का कहना है कि दामिनी से उसकी पहली मुलाकात बस स्‍टैंड पर हुई थी। रेस्‍तरां में लंच की टेबल पर बात आगे बढ़ी और फिर तो गहरा ही होता गया था प्‍यार। दोनों कई जगह घूमने गए और एक ही कमरे में साथ ठहरे। हालांकि दोनों का रिश्‍ता दोस्‍ती से आगे का नहीं था। युवक के दिमाग से उस रात की तस्वीरें आज भी नहीं निकल सकी हैं।
    आगे पढ़ें, दामिनी और युवक की दोस्ती और 16 दिसंबर की रात की बात...
  • कई मायनों में थे मॉर्डन कपल
    देश की राजधानी में हुई इस घटना के बाद चारों ओर से न्याय की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए थे। इस रेप, अपहरण और हत्या के पांचों आरोपी आज जेल में हैं। उनके वकीलों का कहना है कि वे मासूम हैं और छठे आरोपी की सुनवाई जुवाइनल कोर्ट में हो रही है।
    दामिनी और उसका दोस्त जाति और परंपरा से बंधे होने के बावजूद कई मायनों में मॉडर्न कपल थे। दोनों अपने घरों से दूर देश की सबसे ज्यादा संभावना वाले प्रोफेशन क्लास में अपना रास्ता बना रहे थे। दामिनी फिजियोथेरेपिस्ट थी और पहली नौकरी तलाश रही थी। उसका दोस्त एक कंपनी में इंटरनेट वॉयस टेक्नोलॉजी की विशेषज्ञ टीम का लीडर है। युवक याद करता है कि वे दोनों एक दूसरे को अपनी परेशानियां बताते थे, छुट्टियां एक साथ लेते थे और कपड़े-जूते खरीदने में भी एक-दूसरे की पसंद का ध्यान रखते थे। दामिनी ने एक बार उसे एक कंपनी में निवेश न करने की सलाह भी दी थी। वह कंपनी फ्रॉड निकली। दामिनी ने उससे अपना फेसबुक पासवर्ड भी शेयर किया हुआ था।
    दोनों के परिवारों को उनकी नजदीकी के बारे में मालूम था और वे उन्हें रोकते नहीं थे। लेकिन वे दोनों मानते थे कि उनकी दोस्ती हमेशा दोस्ती ही रहेगी, वे शादी नहीं करेंगे। इस बारे में लड़का कहता है कि वह एक उच्च जाति के ब्राह्मण परिवार से है। उसके पिता बड़े वकील हैं और उनका परिवार तीन मंजिला मकान में रहता है। वहीं दामिनी कुर्मी परिवार से थी और उसका परिवार दिल्ली एयरपोर्ट के पास एक छोटे मकान में रहता है। दामिनी के पिता मजदूरी करते हैं। लड़के का कहना है कि वह अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी करने के खिलाफ था। और वे दोनों इस बारे में बातचीत नहीं करते थे क्योंकि इससे उनके रिश्ते पर असर पड़ता था।
    दामिनी की मम्मी ने एक इंटरव्यू में दोनों की शादी के बारे में कहा था कि भविष्य में क्या होने वाला था इस बारे में कोई क्या कह सकता है। वहीं युवक के पिता का कहना है कि शादी की बात कभी आई ही नहीं थी।
    आगे पढ़े कब हुई थी मुलाकात
  • पहली मुलाकात 2010 में हुई
    उन दोनों की जान पहचान दिसंबर 2010 में हुई थी। उनके एक कॉमन दोस्त ने दामिनी की पढ़ाई में मदद के लिए उसे युवक का नंबर दिया था। दामिनी ने उसे एसएमएस किया था, 'हाय, हाउ आर यू, वॉट्स गोइंग ऑन?' इस पर युवक को लगा था कि यह उनका कोई दोस्त है जो उसके साथ मजाक कर रहा है। उसने जवाब लिखा था, मैं जानता तुम्हें जानता हूं. मेरा नंबर किसने दिया। इस पर दामिनी ने जबाव दिया मैं लड़का नहीं, लड़की हूं। इसके बाद कॉमन दोस्त ने दोनों को मिलाया और कनफ्यूजन खत्म हुआ।
    दो महीने बाद दामिनी के देहरादून से नई दिल्ली आने पर युवक पहली बार उससे मिलने बस स्टेशन पर गया था। उसने दामिनी को पहले पहचान लिया था और उसके पास जाकर पूछा कि देहरादून के लिए बस कहां से मिलेगी? इस पर दामिनी ने उसे देखे बिना इशारा कर बताया। इसके बाद लड़के ने बताया कि वह उसका दोस्त है।
    युवक ने गोरखपुर में महिला सशक्‍तीकरण और बच्चों के विकास के लिए एक ग्रुप भी बनाया था लेकिन घरवालों ने उसे पहले खुद को साबित करने और बाद में दूसरों के लिए काम करने को कहा। इसके बाद वह 2006 में ग्रेजुएशन करने के बाद दिल्ली आ गया था। यहां 2008 से वह एचसीएल इन्फोसिस्टम में काम कर रहा है।
    आगे पढ़ें- कैसे परवान चढ़ी दोस्ती
  • मैकडी में लंच के बाद शुरु हुई जान-पहचान
    इसके बाद मैकडी में लंच के दौरान उन दोनों ने एक-दूसरे को जानना शुरू किया। उसने दामिनी को अपने परिवार और अपने बारे में बताया। उसने कहा कि उसे रिस्ट वॉच का बहुत शौक है और उसके पास इनका कलेक्शन भी है। दोस्ती बढ़ने के बाद वे दोनों अक्सर फोन पर बात किया करते थे।
    10 मई 2011 को दामिनी के जन्मदिन पर वे हरिद्वार में मिले। इसके बाद दामिनी के परिवार वालों को युवक के बारे में पता चला और वे उसे पसंद भी करने लगे। दामिनी की मां कहती है कि वह एक अच्छा लड़का था और हमारी बेटी उसके साथ सुरक्षित थी। पांच महीने बाद वे दोनों देहरादून से वैष्णो देवी गए। यहां की चढ़ाई से उनके पैरों में काफी दर्द हो गया था। इसके बाद दामिनी ने उसे फिजियोथेरेपी ट्रीटमेंट भी दिया था। इसके बाद वे मार्च में महाराष्ट्र में साईं बाबा के धाम में भी गए। इसके कुछ महीनों बाद ऋषिकेष जाने पर युवक ने दामिनी को कुछ धार्मिक किताबें भी गिफ्ट की थीं। युवक का कहना है कि सभी जगहों पर वे एक ही कमरे में रुके। वे गाते थे, खेलते थे, हाथों में हाथ डालते थे, हग करते थे लेकिन इससे आगे कभी नहीं बढ़े।
    आगे पढ़ें- क्या हुआ था उस रात को
  • लाइफ ऑफ देखी थी दोनों ने साथ
    16 दिसंबर को वे कई हफ्तों बाद मिले थे। ये पूरा दिन बोरिंग था। शाम को लाइफ ऑफ पाइ देखने के बाद उन्होंने कुछ तस्वीरें ली थीं। दामिनी को घर जाने की जल्दी थी। उन्होंने एक ऑटो रिक्शा लिया और बस स्टॉप पहुंचे। यहां एक बस खड़ी थी। बस में सवार एक लड़के ने पूछा, दीदी कहां जाना है? यह वही नाबालिग अपराधी था जिसने बाद में दामिनी के साथ सबसे ज्यादा क्रूरता की थी। बस में दो लड़के आगे और दो गैलरी में थे। ये सभी पैसेंजर लग रहे थे। पांच मिनट तक कुछ नहीं हुआ। युवक ने दामिनी से कहा कि आज तो ठीक है लेकिन आगे से ऐसी बसों में मत जाना। इसी समय तीन लड़कों ने उनसे पूछा कि वे रात में एक साथ क्या कर रहे थे, युवक का कहना है उसे तभी पता चला कि वे लोग मुसीबत में फंस गए हैं। उन दोनों ने चिल्लाना शुरू किया और दामिनी ने पुलिस को फोन करने की कोशिश की लेकिन एक लड़के ने उसका फोन छीन लिया।
    वह एक लड़के से भिड़ गया तो दूसरा लड़का बोला, रॉड ले आ। उसे रॉड से सिर के पीछे और पैंरों पर कई चोटें मारी गई। लड़कों ने दामिनी को बस के पीछे खींच लिया। गाड़ी की लाइटें बंद थीं और वह दामिनी की चीख चुन सकता था लेकिन उसे दो लड़के पीट रहे थे। लड़के का कहना है कि उसे बार-बार यही बात याद आ रही थी कि एक घंटा पहले तक सब ठीक था और उसके बाद अचानक सब कुछ भयानक तस्वीर में बदल गया। अचानक उसने सुना, लड़की मर गई है। इसके बाद उन दोनों को बस से बाहर फेंक दिया गया।
    आगे पढ़ें- दामिनी होती तो क्या होता
  • दामिनी के पिता ने किया युवक को शुक्रिया
    दामिनी से गैंगरेप के आरोपी बस ड्राइवर के वकील का कहना है कि उसका मुवक्किल बस में था लेकिन उसने रेप नहीं किया। दो लड़कों के वकील का कहना है कि वे घटना के वक्त बस में नहीं थे। एक लड़के के वकील ने कहा है कि उसे पुलिस ने झूठे बयान के लिए बुरी तरह से पीटा है। पुलिस इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रही है। दामिनी के पिता ने लड़के को धन्यवाद दिया है और कहा है कि अगर वह नहीं होता तो उनकी बेटी की लाश भी किसी को नहीं मिलती। पांच दिन बाद लड़का दामिनी से मिलने अस्पताल गया था जहां उसकी सर्जरी हुई थी। यहां लड़के ने दामिनी से माफी मांगी थी तो दामिनी ने कहा कि अगर मैं तुम्हारी बात मान लेती और हम मॉल में ही रुके रहते तो शायद हमें ये बस नहीं मिलती। दामिनी ने ही उसे याद दिलाया कि आज से ठीक दो साल पहले उन्होंने पहली बार एक-दूसरे को एसएमएस किया था। दामिनी ने उसे हग करने की कोशिश भी की लेकिन उसके शरीर में लगे चिकित्सा उपकरणों की वजह से वह उठ नहीं पाई। बाद में उसे सिंगापुर के अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया जहां से टीवी के जरिए उसकी मौत की खबर आई।
    लड़के का कहना है कि अगर वह आज जिंदा होती तो वह अपने घरवालों की इच्छा के खिलाफ जाकर भी जिंदगी भर उसके साथ रहता।
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Web Title: Damini Rape Case, Rape, Murder, Delhi Protest, New Delhi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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