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कभी रेस्त्रां में पोछा लगाती थीं स्‍मृति, अब मोदी सरकार में बनी कैबिनेट मंत्री

dainikbhaskar.com | May 27, 2014, 00:15 IST

  • नई दिल्ली. तीन बेटियों के पिता एक दिन घर लौटे तो उनके साथ एक ज्योतिषी भी थे। उनसे तीनों के भविष्य के बारे में बताने को कहा गया। ज्योतिषी ने कहा, छोटी दोनों का तो ठीक है, लेकिन बड़ी वाली का कुछ नहीं हो सकता। ये तीखे शब्द बड़ी बेटी को चुभ गए। तपाक से बोली, जाइए आप भी यहीं हैं, मैं भी यहीं हूं। दोनों देखेंगे। ज्योतिषी का तो पता नहीं, लेकिन बड़ी बेटी आज मंत्री बन गई। मोदी कैबिनेट में उन्हें जगह दी गई। मोदी कैबिनेट की वो सबसे युवा मंत्री होंगी। मिलिए, स्मृति ईरानी से। टीवी के जरिए घर-घर में आदर्श बहू के रूप में पहचान बनाने वाली स्मृति भाजपा की तेजतर्रार उपाध्यक्ष के रूप में जानी जाती हैं और अब मोदी सरकार में अहम मंत्रालय संभालने जा रही हैं। मोदी के पीएम बनने के साथ ही स्मृति का कद भाजपा में बढ़ गया है। जानिए उनके जीवन से जुड़े कुछ अनछुए पहलु।
    ग्लैमर से पहले का संघर्ष
    > पंजाबी पिता और असमिया मां की बेटी स्मृति का जन्म दिल्ली में 23 मार्च 1976 को हुआ। पिता कुरियर कंपनी चलाते थे। पारिवारिक स्थिति ठीक न होने के कारण स्कूल के बाद पत्राचार से बी-कॉम की पढ़ाई शुरू की, पर पूरी नहीं कर सकीं।
    > स्मृति ने दिल्ली में घूम-घूमकर ब्यूटी प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग की। किसी ने मुंबई में किस्मत आजमाने की सलाह दी।
    > स्मृति मुंबई आ गईं। 1998 में उन्होंने मिस इंडिया के लिए ऑडिशन दिया। चुन ली गईं। लेकिन पिता ने इसमें भाग लेने से मना कर दिया। आखिर मां ने साथ दिया। स्मृति को दो लाख रुपए भी भिजवाए। वे स्पर्धा के फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन जीत नहीं पाईं।
    > पैसे लौटाने के लिए स्मृति ने नौकरी ढूंढनी शुरू की। जेट एअरवेज में फ्लाइट अटैंडेंट पद के लिए अप्लाई किया। सिलेक्शन नहीं हुआ। कई मॉडलिंग ऑडिशन में रिजेक्ट हुईं । आखिर में मैकडोनॉल्ड्स ज्वाइन किया। तीन महीने खाना परोसा, फर्श भी साफ किया।

    आगे की स्लाइड में पढ़िए स्मृति टीवी पर भी पहले खारिज हो गई थीं..
  • टीवी पर भी पहले खारिज हुईं
    > 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के ऑडिशन के लिए स्मृति पहुंचीं, तो एकता कपूर की टीम ने उन्हें नकार दिया। लेकिन एकता को स्मृति जम गईं। उन्होंने सबकी राय खारिज करते हुए कहा कि ये ही तुलसी वीरानी होगी।
    > 2000 से 2007 तक तुलसी के किरदार के स्मृति को लगातार सात साल तक इंडियन टेलिविजन अकादमी ने श्रेष्ठ अदाकारा का अवार्ड दिया। जो एक रिकॉर्ड है।
    आगे की स्लाइड में जानिए स्मृति ईरानी का परिवार
  • परिवार
    जनवरी 2001 में स्मृति ने अपने से दस साल बड़े और आईटी प्रोफेशनल जुबिन इरानी से शादी की। इसी साल उन्होंने बेटे जोहर और सितंबर 2003 में बेटी जोएस को जन्म दिया।
    जुबिन की एक बेटी शैनेल उनकी पहली पत्नी मोना ईरानी से भी है। ब्यूटी कॉन्टेस्ट कोऑर्डिनेटर मोना, स्मृति की बहुत अच्छी दोस्त हैं।
    बचपन के साथी से हुई शादी
    स्मृति और उनके पति जुबिन ईरानी एक दूसरे को बचपन से जानते थे। दोनों की शादी परिवार की सहमति से हुई। स्मृति के पिता पंजाबी थे और मां बंगाली, इसलिए एक पारसी से शादी करने पर उनके परिवार में किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई। स्मृति के पति ने उनका हर काम में साथ दिया।
    स्मृति कहती हैं कि मेरा करियर तो शादी के बाद ही बना है और ये परिवार के सहयोग के बिना असंभव था।
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  • कंट्रोवर्सी
    > एक न्यूज चैनल पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद संजय निरुपम ने स्मृति पर अपनी सहेली का घर बर्बाद करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने कई दिनों तक निरुपम के साथ किसी भी बहस में हिस्सा नहीं लिया।
    फिलहाल एक्टिंग का इरादा नहीं
    स्मृति राजनीति में तो सक्रिय हैं ही, साथ ही वे बड़े पर्दे पर निर्माता और लेखिका के रूप में काम कर रही हैं और वे भविष्य में भी इसे जारी रखेंगीं। फिलहाल एक्टिंग करने के बारे में उनका कोई प्लान नहीं है।
    आगे पढ़ें...और भाजपा का पहले विरोध किया
  • ...और भाजपा का पहले विरोध किया
    मोदी के खिलाफ आमरण अनशन की धमकी दी थी, आज हैं मोदी की सबसे भरोसेमंद...
    > 2002 में हुए गुजरात दंगों के बाद स्मृति खुलकर मोदी के विरोध में उतर आईं। वे तब राजनीति में नहीं थीं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मोदी मुख्यमंत्री की कुर्सी से नहीं हटे तो वे आमरण अनशन शुरू कर देंगी। खैर, ऐसा तो कुछ हुआ नहीं, 2003 में स्मृति ने भाजपा ज्वाइन कर ली।
    > 2013 में एक न्यूज चैनल के इंटरव्यू में स्मृति ने जोरशोर से स्पष्ट किया कि वे मीडिया की पक्षपातपूर्ण खबरों को देखकर मोदी के खिलाफ हो गई थीं, लेकिन जब गुजरात के लोगों से मिलीं तो स्थिति स्पष्ट हुई। राहुल कंवल को दिए गए इस बेबाक इंटरव्यू के यू-ट्यूब पर शेयर किए गए वीडियो 75 हजार से लोग देख चुके हैं।
    > स्मृति 2004 में चांदनी चौक सीट पर कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ी, लेकिन हार गईं। वे भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य बनाई गईं। फिलहाल गुजरात से राज्यसभा सदस्य हैं।
    आगे पढ़ें...पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता
  • पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता
    स्मृति ईरानी भारतीय जनता पार्टी की महिला नेताओं के बीच एक जाना-माना चेहरा हैं। स्मृति का मानना था कि वे जब इस क्षेत्र में क़दम रखेंगी तो सिर्फ दिखने के लिए नहीं बल्कि काम करने के लिए।
    दिल्ली से चुनाव हारने के बाद 2004 में ही उन्हें महाराष्ट्र युवा इकाई का वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया। 2010 में स्मृति ईरानी को बीजेपी महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।
    इसके बाद उन्होंने महिलाओं से जुड़े कई मुद्दों को गंभीरता से उठाया। अगस्त 2011 में उन्होंने गुजरात से राज्यसभा की सदस्यता ली।
    आगे पढ़ें... मोदी ब्रिगेड की सुषमा स्वराज
  • मोदी ब्रिगेड की सुषमा स्वराज
    स्मृति इस समय गुजरात में सरदार पटेल की स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण प्रोजेक्ट पर नजर रख रही हैं। यह नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
    पार्टी में स्मृति की पहचान मोदी प्रिय लोगों में की जाती है। न्यूज चैनल पर भी अक्सर उन्हें मोदी की तारीफ या बचाव करते सुनते हैं।
    स्मृति जब 2011 में गुजरात से राज्यसभा के लिए चुनी गईं तो उनके फॉर्म पर प्रस्तावक के तौर पर नरेंद्र मोदी के ही हस्ताक्षर थे। स्मृति का कद पार्टी में लगातार बढ़ रहा है। बीजेपी में उन्हें मोदी ब्रिगेड की सुषमा स्वराज भी कहा जाता है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Smriti irani life facts hindi news
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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