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भोपाल में है दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद, जानें यहां की 17 फेमस जगहों के बारे में

dainikbhaskar.com | Dec 15, 2016, 12:24 IST

  • सबसे छोटी मस्जिद 'ढाई सीढ़ी'
    झीलों का शहर भोपाल। खूबसूरत होने के साथ-साथ ऐतिहासिक भी। यदि आप भोपाल जा रहे हैं तो यहां घूमने के लिए बहुत कुछ है। हम आपको कुछ ऐसे स्पॉट्स की जानकारी दे रहे हैं जिससे आप अपने 2 से 3 दिन का टूर प्लान कर सकते हैं। जानिए भोपाल का इतिहास और रहस्यमयी मंदिर की कहानी...
    ऐसा है भोपाल का इतिहास...
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल। जिसे झीलों का शहर भी कहते हैं। इस शहर को राजा भोज ने साल 1000 - 1055 के बीच बसाया था। राजा भोज, परमार वंश से ताल्लुक रखते थे। बाद में शहर की आधुनिक नींव दोस्तर मुहम्मथद खान ने अठारहवीं सदी के दौरान रखी। इसके बाद इस शहर पर नवाबों का शासन था और हमीदुल्लावह खान, भोपाल के अंतिम शासक थे। यह शहर औपचारिक रूप से अप्रैल 1949 में भारत संघ में विलय कर दिया गया था।
    दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद...
    एशिया की सबसे छोटी मस्जिद 'ढाई सीढ़ी' यहीं है। किला फतेहगढ़ के बुर्ज के ऊपरी हिस्से में करीब 300 साल पहले भोपाल शहर के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने बनवाई थी, ताकि बुर्ज पर मौजूद सिपाही पहरेदारी के दौरान ही नमाज पढ़ सकें। यहां दो बुर्ज थे, दोस्त मोहम्मद खान के कहने पर पहरेदारों ने छोटे बुर्ज पर छोटी सी मस्जिद बनाई। पहरेदार कुशल कारीगर नहीं थे, तो उन्होंने दो सीढ़ी तो सही बना दी लेकिन तीसरी सीढ़ी पर एक ईंट ही लग सकी। तब से इसका नाम ढाई सीढ़ी वाली मस्जिद पड़ गया।
    ऐड्रेस- गांधी मेडिकल कॉलेज के पास, कोहेफिजा, भोपाल
    आगे की स्लाइड्स में जानिए भोपाल और उसके आसपास के टूरिस्ट स्पॉट्स के बारे में...
  • अपर लेक
    अपर लेक (बड़ी झील)
    भोपाल का सबसे मशहूर टूरिस्ट अट्रैक्शन है अपर लेक। जो देश की सबसे पुरानी मैन मेड लेक है। 11 वीं सदी में बनी इस झील को बड़ा तालाब भी कहते हैं। राजा भोज ने इसे बनाने का आदेश दिया था और माना जाता है कि इस झील के पानी से ही राजा की स्किन की बीमारी ठीक हो गई थी। ऐसी कहानी प्रचलित है कि राजा भोज को कुष्ठ रोग था। किसी साधु ने 365 पानी के स्त्रोतों का एक तालाब बनाकर उसमें नहाने को कहा। साधु की बात मानकर राजा भोज ने अपने सैनिकों को काम पर लगा दिया। इन सैनिकों ने एक ऐसी घाटी का पता लगाया, जो बेतवा नदी के मुहाने स्थित थी। लेकिन यहां केवल 356 पानी के सोर्स थे। तब 'कालिया' नाम के एक गोंड ने पास की एक नदी की जानकारी दी, जिसकी कई सहायक नदियां थीं। इन सबको मिलाकर संत के द्वारा बताई गई संख्या पूरी होती थी। इस गोंड मुखिया के नाम पर इस नदी का नाम 'कालियासोत' रखा गया, जो आज भी भोपाल में मौजूद है।
    बेतवा नदी का पानी इस विशाल घाटी को भरने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसलिए इस घाटी से लगभग 32 किलोमीटर पश्चिम में बह रही एक अन्य नदी को बेतवा घाटी की ओर मोड़ने के लिए एक बांध बनाया गया। यह बांध आज के भोपाल शहर के नजदीक भोजपुर में बना था। इसके बाद बड़ा तालाब अस्तित्व में आया, जिसका नाम 'भोजपाला' रखा गया। कहा जाता है कि किसी समय बड़े तालाब में कई सुन्दर द्वीप थे।
    होशंगशाह ने तुड़वा दिया था राजा भोज का बांध
    बाद में 14 वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा बनाए गए बांध को होशंगशाह ने तुड़वा दिया था। उस वक्त के बड़े तालाब के साइज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बांध के टूटने के बाद भी तालाब को पूरा सूखने में 30 साल लगे। तालाब की सूखी जमीन पर आज बसाहट है। तालाब का एक हिस्सा सूखने के बावजूद भोपाल में कमला पार्क के पास जो मिट्टी का बांध था, वह बच गया। उसके कारण एक छोटा तालाब शेष रह गया, जिसे आज बड़ा तालाब कहते हैं। 1694 में नवाब छोटे ख़ान ने बड़े तालाब के पास बाण गंगा पर एक बांध बनवाया, जिसके कारण छोटा तालाब अस्तित्व में आया। यह दोनों तालाब आज भी भोपाल में मौजूद हैं। यदि आप यहां घूमने जा रहे हैं तो बोटिंग का मजा जरुर लें। यहां आप क्रूज, स्पीड बोट, पैडल बोट की सैर कर सकते हैं।
    कैसे हैं यहां बोटिंग के चार्जेस...
    मोटर बोट्स -210 रुपए में तीन व्यक्तियों के लिए पांच मिनट की राइड।
    पैडल बोट्स- 60 रुपए पर बोट, तीस मिनट।
    जेट स्कीइंग- प्रति व्यक्ति 400 रुपए।
    पैरा सेलिंग- प्रति व्यक्ति 500 रुपए।
    क्रूज- प्रति व्यक्ति 250 से 300 रुपए के बीच।
    कॉन्टैक्ट - 0755- 329504, 2900881
    (नोट- बोटिंग रेट्स बदलते रहते हैं। )
  • ताज - उल - मस्जिद
    ताज - उल - मस्जिद
    भोपाल की ताज - उल - मस्जिद शहर के मुस्लिमों का एक प्रमुख लैंडमार्क है। इसकी गिनती एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में होती है। इसका निर्माण मुगल काल में हुआ था। बहादुर शाह ज़फर की हुकुमत में शाहजांह बेगम (1844-1901) ने इसका काम शुरू करवाया था, जो 1985 में मौलाना सैयद हशमत अली साहब पूरा कराया। शाहाजांहा बेगम की मृत्यु के बाद उनकी बेटी सुल्तान जहां बेगम ने इसका निर्माण कार्य जारी रखा। पैसों की कमी के कारण बाद में इसका निर्माण कुछ समय के लिए रूक गया। सन् 1971 में भोपाल के अल्लामा मोहम्मद इमरान खान नदवी अज़हरी और मौलाना सैयद हशमत अली साहब ने मस्जिद का निर्माण फिर से शुरू हुआ, जो 1985 पूरा हुआ।
  • वन विहार
    वन विहार
    अपर लेक से लगा है वन विहार, जो कि एक नेशनल पार्क है। यह 445 हेक्‍टेयर एरिया में फैला हुआ है। यहां शेर, लेपर्ड, चीतल, सांबर, घड़ियाल, मगरमच्छ आदि जानवर रखे गए हैं। आप बर्ड फोटोग्राफी के शौक़ीन हैं तो ये जगह आपके लिए बेस्ट रहेगी। हरा भरा और झील से लगा होने के कारण यहां कई प्रवासी पक्षी अपना डेरा जमाते हैं। यहां आप जंगल सफारी का भी लुत्फ़ उठा सकते हैं।
    ऐसे हैं चार्जेस:
    पैदल प्रति व्यक्ति- 20रुपए (भारतियों के लिए)
    साइकिल से प्रति व्यक्ति - 30 रूपए
    कार से जाने के- 250 रूपए
    बस और अन्य बड़ी गाड़ियों के- 400 रूपए
    विदेशियों के लिए प्रति व्यक्ति- 200 रूपए
    समय-सुबह 9 से शाम 6 बजे तक
    कब बंद रहता है- शुक्रवार
    जंगल सफारी
    वन विहार में जंगल सफारी भी कराई जाती है। 20 रूपए एंट्री फीस के अलावा पर हेड 50 रूपए टिकट लगती है। एक ट्रिप में 8 लोग सफ़र कर सकते हैं। सफारी शुक्रवार को बंद रहती है।
    (नोट- चार्जेस बदलते रहते हैं। )
  • गौहर महल
    अपर लेक के किनारे है गौहर महल। इस महल का निर्माण गौहर बेगम के द्वारा करवाया गया था, जो शहर की पहली महिला शासक थी। महल को 1820 में बनवाया गया था। महल के ऊपर के हिस्से में एक ऐसा कमरा है जिससे पूरे शहर का नज़ारा दिखता है और इसके दरवाज़ों पर कांच से नक़्क़ाशी की गई है। अब इस महल में कई तरह की प्रदर्शनी और हैंडीक्राफ्ट मार्केट्स लगते हैं।
  • बिड़ला मंदिर
    भोपाल में स्थित बिड़ला मंदिर, देवी लक्ष्‍मी और भगवान विष्‍णु को समर्पित है। यह मंदिर पहाड़ियों की चोटी पर बना हुआ है। इसे देश की मशहूर बिड़ला फैमिली ने बनवाया है। इस मंदिर के अंदर एक संग्रहालय भी है जहां 12 वीं सदी की भी मूर्तियां रखी हुई है। मंदिर में शिवलिंग, मां जगदम्बा और हनुमानजी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने बना विशाल शंख भी दर्शनीय है।
  • शौर्य स्मारक
    शौर्य स्मारक
    भोपाल में बने शौर्य स्मारक में बाकायदा जंग के मैदान को दिखाया गया है। ये देश का पहला ऐसा शौर्य स्मारक है, जिसे सेना ने नहीं बनाया है। स्मारक में जिंदगी और मौत के बाद के दृश्य भी दिखाने की कोशिश की गई है। यहां शहीदों की याद में शौर्य स्तंभ बना है, जिसकी ज्योति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रज्जवलित की है। शौर्य स्मारक की हर दीवार पर वीर रस की कविता उकेरी गई हैं। तीनों सेनाओं के काम करने के मुश्किल हालात दिखाए गए हैं। 1947 के बंटवारे के हालात, 1965-1971 के युद्ध और कारगिल युद्ध भी दिखाया गया है। इसके अलावा सियाचीन में माइनस 40 डिग्री तापमान पर तैनात रहने वाले सैनिकों के मुश्किल हालातों को भी दिखाया गया है।
  • देश का पांचवा सबसे ऊंचा तिरंगा
    दुनिया का पांचवा सबसे ऊंचा तिरंगा भोपाल में है। जिसे 27 मई 2015 को फहराया गया था। वल्लभ भवन के सामने सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में 90 फीट लंबा, 60 फीट चौड़ा तिरंगा 235 फीट ऊंचे पोल पर लगा है। इस तिरंगे को उतारने के लिए करीब 30 आदमी चाहिए होते हैं।
  • सैर सपाटा
    सैर सपाटा
    बच्चे हों या फिर यंगस्टर्स, सभी के दिलों को लुभाने वाला सैर सपाटा मप्र टूरिज्म डिपार्टमेंट ने विकसित किया गया है। टूरिस्ट के लिए झीलों के शहर में यह एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट है। हर उम्र के लोग यहां एन्जॉय करने आते हैं। खाने-पीने की शानदार व्यवस्था के साथ-साथ टूरिस्ट यहां पैडल बोटिंग का आनंद भी उठा सकते हैं। बच्चों के एंटरटेंनमेंट के लिए यहां कई तरह के झूले और टॉय ट्रेन भी है।
  • मनुआभान की टेकरी
    मनुआभान की टेकरी
    मनुआभान की टेकरी भोपाल का फेमस रिलीजियस स्पॉट है। बताया जाता है कि इस टेकरी का नाम राजा भोज के दरबारी मनुआभान के नाम पर पड़ा था। कहा जाता है कि मनुआभान स्वांग रचकर राजा भोज का मनोरंजन करता था बाद में उसने अपना यह स्वभाव त्याग दिया और भगवत सिद्धि में लीन हो गया। यह टेकरी समुद्रतल से 1300 फीट ऊंची है, जहां से भोपाल का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। इस टेकरी पर श्वेतांबर जैन का मशहूर मंदिर है। लगभग 150 वर्ष पूर्व नवाब कुदसिया बेगम ने यहां खुदाई करवाई थी, जिसमें तीर्थंकर महावीर की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। बाद में यह प्रतिमा चौक के श्वेतांबर मंदिर में प्रतिष्ठित की गई। यहां जाने के लिए रोप वे की भी सुविधा है। यहां जगह सुबह 6:30 से रात 8:00 बजे तक खुली रहती है।
    आगे की स्लाइड्स में देखें भोपाल के आसपास घूमने और क्या-क्या है...
  • भोजपुर मंदिर
    रहस्य बनी है भोजपुर के मंदिर के बनने की कहानी...
    भोपाल से 32 किमी दूर है भोजपुर। भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, अधूरा शिव मंदिर हैं। भोजपुर तथा इस शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई – 1055 ई ) द्वारा किया गया था। यहां का शिवलिंग दुनिया के विशालतम् शिवलिंगों में शुमार है। भोजपुर को प्राचीन काल में उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता था। इस शिवलिंग की ऊंचाई करीब 22 फीट है। इस मंदिर के निर्माण के बारे में दो कथाएं प्रचलित हैं। पहली जनकथा के अनुसार वनवास के समय इस शिव मंदिर को पांडवों ने बनवाया था। भीम घुटनों के बल पर बैठकर इस शिवलिंग पर फूल चढाते थे। इसके साथ ही इस मंदिर के पास ही बेतवा नदी है। जहां पर कुंती द्वारा कर्ण को छोड़ने की जनकथाएं भी प्रचलित हैं। दूसरी मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण मध्यभारत के परमार वंशीय राजा भोजदेव द्वारा करवाया 11वीं सदी में करवाया गया था।
  • भूतनाथ मंदिर समूह
    भूतनाथ मंदिर समूह,आशापुरी गांव
    भोजपुर से 5 किमी आगे है आशापुरी गांव। जहां है भूतनाथ मंदिर समूथ। परमार वंश से पहले प्रतिहार वंश के शासकों ने इन्हें बनवाया था। ये करीब 1300 साल पुराने हैं। यहां आज भी 21 मंदिरों के 400 से ज्यादा छोटे-बड़े अवशेष बिखरे पड़े हैं, जिनपर हिंदु देवी-देवताओं की आकृतियां बनी हैं। ये सभी मंदिर एक तालाब के किनारे बने हुए हैं। इन मंदिरों से एक किलोमीटर दूर ही बिलौटी देव मंदिर है, जहां एक अनूठा शिवलिंग है। इस शिवलिंग की खासियत है कि इसमें एक हजार से ज्यादा छोटे शिवलिंग समाहित हैं।
  • इस्लाम नगर
    इस्लाम नगर
    भोपाल से इस्लाम नगर तक की यात्रा टूरिज्म और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए बहुत कुछ सहेजे हुए है। चमन महल और रानी महल इसके दो मुख्य आकर्षण हैं। इस्लामनगर की स्थापना सिपाही दोस्त मोहम्मद (1708-1726) ने की थी। पहले यह जगह जगदीशपुर कहलाती थी। 1723 में जब हैदराबाद के निजाम-उल-मुल्क ने इस्लामनगर की घेराबंदी की, तो थोड़े संघर्ष के बाद ही दोस्त मोहम्मद खान शक्तिशाली निजाम को यह किला सौंपने पर मजबूर हो गए। दिलचस्प और एतिहासिक पहलू यह है कि; भोपाल सल्तनत के कई लोग, जिनमें शाहजहां बेगम भी शामिल हैं, यहीं जन्मीं। यह स्थान भोपाल-बैरसिया रोड पर स्थित है।
    भोपाल रेलवे स्टेशन से दूरी- 15 किमी
  • सांची
    भोपाल से 46 किमी दूर है सांची। ये जगह स्तूप और बौद्ध स्मारक के लिए मशहूर हैं, जो तीसरी शताब्दी ई.पू से बारहवीं शताब्दी के बीच के काल के हैं। सांची का मुख्य स्तूप, सम्राट अशोक ने तीसरी सदी में बनवाया था। इसके केन्द्र में एक अर्धगोलाकार ईंट से बना ढांचा था, जिसमें भगवान बुद्ध के कुछ अवशेष रखे हैं। इसके अलावा यहां कुछ और स्तूप भी हैं जिनमें बुद्ध के शिष्य अरिहंत सारिपुत्र और महामोदग्लायन की अस्थियां हैं। बता दें कि सांची की स्थापना बौद्ध धर्म व उसकी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में मौर्य काल के महान राजा अशोक का सबसे बडा योगदान रहा।
  • भीमबेटका
    भोपाल से 46 किलोमीटर दूर पर दक्षिण में भीमबेटका की गुफाएं मौजूद हैं, जो चारों तरफ से विंध्य पर्वतमालाओं से घिरी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि भीमबेटका गुफाओं का स्थान महाभारत के चरित्र भीम से संबंधित है। इसी कारण से इसका नाम भीमबेठका भी पड़ गया। भीमबेटका में 750 गुफाएं हैं जिनमें 500 गुफाओं में शैल चित्र बने हैं। बताया जाता है ये चित्रकारी 12,000 साल पुरानी है। जिसे रॉक शेल्टर कहते हैं। मनुष्यों के चित्रों के अलावा कई गुफाओं में विभिन्न प्राणियों जैसे कि चीता, कुत्ता, छिपकली, हाथी, भैंस इत्यादि के रंगीन चित्र भी देखने को मिलते हैं। बताया जाता है कि चित्रों में इस्तेमाल किए गए रंग गेरू, मैगनीज, एनिमल फैट, सब्जी, वुडन अंडे के मिश्रण से तैयार किए जाते थे।
  • उदयगिरी गुफाएं
    भोपाल से उदयगिरी 60 किलोमीटर दूर है। उदयगिरी की गुफाओं में प्राचीन नक्काशी मौजूद है। 5वीं शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के दौरान चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में इन गुफाओं पर फिर से काम किया गया। ये गुफाएं बेतवा और वैस नदी के बीच में हैं। एकांत स्थान पर पहाड़ी पर स्थित इन गुफाओं में कई बौद्ध अवशेष भी पाए गए हैं। उदयगिरी में 20 गुफाए हैं। ये गुफाएं उदयगिरी की पहाडिय़ों की पूर्वी ढाल को खोदकर तराशी गई हैं। इसकी एक गुफा में विष्णु को बारह अवतार के रूप में उत्कीर्ण किया गया है। गुप्त वंश की निर्माण कला का सुंदर परिचय भी इन गुफाओं में मिलता है। उदयगिरि को पहले नीचैगिरि के नाम से जाना जाता था। कालिदास ने भी इसे इसी नाम से संबोधित किया है। 10 वीं शताब्दी में जब विदिशा धार के परमारों के हाथ में आ गया, तो राजा भोज के पौत्र उदयादित्य ने अपने नाम से इस स्थान का नाम उदयगिरि रख दिया।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय
    भारत ही नहीं, एशियाभर में मौजूद मानव जीवन की विकास गाथा की सजीव प्रस्तुति देता है इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय। श्यामला हिल्स की खूबसूरत पहाड़ियों पर करीब 200 एकड़ क्षेत्र में फैला है। यहां आप एशिया की जनजातीय विविधताओं को करीब से देख सकते हैं। इसमें हिमालयी, तटीय, रेगिस्तानी व जनजातीय निवास के अनुसार बांट कर प्रदर्शित किया गया है। मध्य-भारत की जनजातियों को भी पर्याप्त स्थान मिला है, जिनके अनूठे रहन-सहन को यहां पर देखा जा सकता है। आदिवासियों के आवासों को उनके बर्तन, रसोई, कामकाज के उपकरण अन्न भंडार तथा परिवेश को हस्तशिल्प, देवी देवताओं की मूर्तियों और स्मृति चिह्नों से सजाया गया है।
    समय:सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक।
    चार्ज: 12 वर्ष के ऊपर के बच्चों के लिए 15 रुपए और एडल्ट्स के लिए 30 रुपए प्रति व्यक्ति।
  • ट्राइबल म्यूजियम
    ट्राइबल म्यूजियम
    यह देश का एकमात्र ट्राइबल म्यूजियम है। यहां आपको बैगा, सहरिया, गोंड, भील, कोरकू, कोल और भारिया जैसे ट्राइब्स के कल्चर की झलकियां मिलेगी। यहां ट्राइबल्स की लाइफ को म्यूजियम के छह हिस्सों में दिखाया गया है। यहां हर संडे ट्राइबल फोक म्यूजिक और कल्चरल एक्टिविटीज होती हैं। इसमें मध्यप्रदेश ट्राइब्स के सिंगर और आर्टिस्ट हिस्सा लेते हैं। यहां होने वाले प्रोग्राम्स को देखने का प्रवेश नि:शुल्क है।
    ऐड्रेस:ट्राइबल म्यूजियम, श्यामला हिल्स, भोपाल।
    फोन:0755 266 1948
  • भारत भवन
    भारत भवन
    भोपाल की शाम का आप लुत्फ़ उठाना चाहते हैं तो भारत भवन आपके लिए सबसे बेस्ट रहेगा। यह जगह अपर लेक के किनारे स्थित है इसे शहर का कला केंद्र भी माना जाता है। यहां देश-विदेश के थिएटर आर्टिस्ट अपना टैलेंट दिखाने आते हैं। भारत भवन का डिजाइन ख्यात आर्किटेक्ट चार्ल्स कोरिया ने बनाया था। यह किसी ऊंची बिल्डिंग के बजाए जमीन के समानांतर है। इसकी खासियत यह भी है कि किसी एक स्थान से पूरा नहीं देखा जा सकता है।
    एक्टिविटीज के बारे में यहां देखें-bharatbhawan.org
    Address: श्यामला हिल्स, बोट क्लब रोड।
    Phone: 0755-2660239
  • फाइल फोटो
    नाइट लाइफ
    यदि आप भोपाल की शाम का मजा उठाना चाहते हैं तो ऐसे कई ऑडिटोरियम हैं जहां रोजाना प्ले, कल्चरल इवेंट्स होते हैं। यहां आप अपनी फैमिली के साथ जा सकते हैं। अधिकतर शो देर शाम होते हैं।
    भारत भवन
    ऐड्रेस: जे. स्वामीनाथन मार्ग, शमला हिल्स, अपर लेक के पास, भोपाल
    फोन: 0755 266 0239
    रविन्द्र भवन
    एड्रेस: प्रोफ़ेसर कॉलोनी, भोपाल
    फोन: 0755-2661165
    शहीद भवन
    ऐड्रेस: मालवीय नगर, भोपाल
    फोन: 089892 00492
    इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्राहलय
    ऐड्रेस: 20, श्यामला हिल्स, भोपाल
    फोन: 0755-2661319, 2661096
    राजीव गांधी ऑडिटोरियम
    ऐड्रेस: साइंस सेंटर रोड, एनआईटीटीआर कैंपस, श्यामला हिल्स, भोपाल
    अभिव्यक्ति सेंटर फॉर फाइन आर्ट्स
    ऐड्रेस:B-286, शाहपुरा लेक, भोपाल
  • चौक बाज़ार
    चौक बाज़ार
    तंग गलियों में बसा पुराने भोपाल का चौक बाजार एक ऐसा प्वॉइंट है, जहां ट्रैडिशनल ज्वैलरी, जरी-जरदोजी से तैयार सामान, कपड़े और जरूरत का हर सामान रीजनेबल प्राइज में मिलता है। 300 साल पहले भोपाल की बस्ती में बसा यह छोटा-सा चौक था, जिसके चारों और दो-तीन मंजिला हवेलियां थीं। इसी चौक पर कुछ व्यापारियों ने सबसे पहले सोने-चांदी के जेवर बेचने शुरू किए थे। जेवर की इन्हीं दुकानों से इस चौक में सुनारी बाजार की शुरुआत हुई थी। 11वीं शासक नवाब शाहजहां बेगम को पान-गुटखे और एम्ब्रॉयडरी का इतना शौक था कि उन्होंने कुछ एम्ब्रॉयडरी कारीगरों और गुटखा बनाने वालों को जामा मस्जिद के पास ही एक दुकान में बैठा दिया। यहीं से भोपाली बटुए और सोने-चांदी की जरी-जरदोजी से तैयार अन्य सामान बनाने की शुरुआत हुई।
  • न्यू मार्केट
    न्यू मार्केट
    न्यू मार्केट भोपाल का एक बड़ा शॉपिंग एरिया है। यहां शॉपिंग से लेकर खानपान, पिक्चर हॉल, मंदिर आदि सबकुछ है। यदि आप ब्रांडेड प्रोडक्ट्स खरीदना चाहते हैं तो ये जगह आपके लिए बेस्ट होगी। यहां स्पायकर, टाइटन, पीटर इंग्लैंड जैसे कई बड़े ब्रांड्स के शोरूम मिलेंगे।
    ऐड्रेस:रोशनपुरा
  • मृगनयनी एम्पोरियम
    मृगनयनी एम्पोरियम
    मृगनयनी एम्पोरियम मध्य प्रदेश गवर्नमेंट का एक यूनिक मार्केटिंग आउटलेट है, जहां आपको चंदेरी, महेश्वरी, कोसा तुसर साड़ियाँ मिलेंगी। इन साड़ियों की ख़ास बात यह है कि इन्हें खासतौर पर बुनकरों ने तैयार किया है।
    एड्रेस: 23, शॉपिंग सेंटर, टी टी नगर, न्यू मार्केट
    फोन: +917552554162
  • डीबी सिटी
    डीबी सिटी
    शहर में यूथ का सबसे फेवरिट एंड हॉट स्पॉट यदि कोई है तो वह है डीबी सिटी। भोपाल के इस पहले शॉपिंग मॉल की डिजाइन बेंटल इंटरनेशनल ने की है। देश के सभी बड़े ब्रांड यहां मौजूद हैं। शॉपिंग से लेकर फूड जोन तक की सुविधाओं के कारण इस मॉल को यदि भोपाल का दिल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। शॉपिंग करते-करते यदि आप थक गए हैं तो मल्टीप्लेक्स से लेकर गेमिंग जोन में जाकर मूड फ्रेश कर सकते हैं
    एड्रेस: अरेरा हिल्स, भोपाल।
  • कैसे पहुंचे -
    BY Air: भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से दिल्ली और मुंबई के लिए डेली डायरेक्ट फ्लाइट्स हैं। कोलकाता और चेन्नई के लिए आपको ब्रेक जर्नी करनी पड़ेगी। इसके अलवा हज के लिए भोपाल से जेद्दाह (सऊदी अरब) के लिए स्पेशल फ्लाइट्स जाती हैं।
    BY Train:भारत के बीचोबीच होने के कारण भोपाल से सभी महानगरों की ट्रेन के जरिये बेहतर कनेक्टिविटी है। यहां से दिल्ली रोजाना शताब्दी एक्सप्रेस चलती है। इसके अलावा मुंबई के लिए भोपाल स्टेशन से होकर कई ट्रेन चलती है।
    By Road: सांची, इंदौर, उज्जैन, खजुराहो, पंचमढी, जबलपुर शहरों से आसानी से सड़क से भोपाल पहुंचा जा सकता है। मध्‍यप्रदेश और पडोसी राज्‍यों के अनेक शहरों से भोपाल के लिए नियमित बसें चलती हैं।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Travel advisory for bhopal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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