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जायसी का फिक्शन कैरेक्टर नहीं, असल में थी रानी पद्मिनी, ये रहे 14 सबूत

dainikbhaskar.com | Mar 13, 2017, 11:23 IST

  • चित्तौड़गढ़/भोपाल. संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ पर विवाद हुआ, तो असल रानी पद्मिनी के होने-न-होने पर सवाल उठाए गए। इतिहासकारों ने बयान दिए, सूफी कवि जायसी का गढ़ा किरदार तक बताया गया, ट्वीट भी किए गए, लेकिन रानी पद्मिनी के शहर चित्तौड़गढ़ में आज भी कई सबूत उनके होने की गवाही देते हैं। रानी पद्मिनी के होने के 14 सबूत...
    dainikbhaskar.com ने असली रानी पद्मिनी के ‘होने’ के सबूत उन्हीं के शहर चित्तौड़गढ़ से जुटाएं। इतिहासकारों की मदद से उन ऐतिहासिक ग्रंथों और किताबों को भी खंगाला, जिनमें पद्मिनी का जिक्र है। हम उस मू्र्ति तक भी पहुंचे, जो रानी की एकमात्र मूर्ति मानी जाती है। इसके अलावा, अपनी पड़ताल में हमें उदयपुर के पास मिले उस शिला के बारे में भी पता चला, जिस पर तारीखों के साथ राजा रतन सिंह के शासन काल का जिक्र किया गया है। दूसरी ओर, पद्मिनी के होने पर सवाल उठाने वालों पर चित्तौड़ के लोगों मे गुस्सा है। वे कहते हैं-विरोध करने वाले यहां आएं, हम उन्हें अपनी रानी के होने के सबूत देंगे। अविनाश श्रीवास्तव और अमृत पाल सिंह की स्पेशल रिपोर्ट-

    क्या और क्योंहै विवाद-
    27 जनवरी को जयपुर में फिल्म ‘पद्मावती’ की शूटिंग के दौरान करणी सेना के प्रदर्शनकारियों ने संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट की और सेट पर तोड़फोड़ मचाई। इनका आरोप था कि भंसाली इस फिल्म में रानी पद्मिनी का गलत चित्रण कर रहे हैं। फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी के साथ पद्मिनी के रोमांटिक सीन फिल्माए जाने को लेकर विरोध चल रहा है।
    बता दें कि राजस्थान में रानी पद्मिनी को शौर्य का प्रतीक माना जाता है। विवाद की एक वजह ये भी है कि कई इतिहासकार पद्मिनी के होने की ही झुठला रहे हैं। उनकी नजर में ये सिर्फ एक फिक्शन कैरेक्टर था।
    इन्होंने पद्मिनी के होने पर उठाए सवाल
    - पिछले दिनों एक अंग्रेजी अखबार ने इतिहासकारों के हवाले से लिखा था कि पद्मिनी असल में नहीं थी, बल्कि मशहूर सूफी कवि मलिक मोहम्मद जायसी के 1540 में रचे काव्य ‘पद्मावत’ का काल्पनिक कैरेक्टर था। जायसी के इस महाकाव्य पर हिंदी साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने टीका और समीक्षा भी की है।
    - सीनियर हिस्टोरियन इरफान हबीब ने भी उदयपुर में दावा किया है कि जिस पद्मावती के अपमान को मुद्दा बनाकर करणी सेना और दूसरे संगठन हंगामा मचा रहे हैं, वैसा कोई कैरेक्टर असलियत में था ही नहीं, क्योंकि पद्मावती पूरी तरह से एक काल्पनिक चरित्र है।
    - इरफान के मुताबिक, इतिहास में 1540 से पहले पद्मावती का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है।
    - गीतकार जावेद अख्तर ने भी पिछले दिनों ट्वीट किया- ‘पद्मावत इतिहास नहीं, बल्कि एक काल्पनिक कहानी है। पद्मावत पहला हिंदी नॉवल है, जिसे मलिक मोहम्मद जायसी ने अकबर के दौर में लिखा था। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे कि अनारकली और सलीम।'
    - एक अन्य ट्वीट में जावेद ने लिखा, ‘खिलजी मुगल नहीं थे, वे तो मुगलकाल से 200 साल पहले हुआ करते थे।'
    इतिहास में जिक्र कम इसलिए गफलत ज्यादा
    चित्तौड़गढ़ के इतिहास संकलनकर्ता और मेवाड़ के इतिहास पर किताबें लिख चुके डॉ. एएल जैन ने रानी पद्मिनी और राजा रतन सिंह के कम जिक्र के दो कारण बताए-
    - राजस्थान और खासकर चित्तौड़ के इतिहास में उन राजाओं का कम जिक्र किया गया है जिनका शासन काल कम समय का रहा है। (इतिहास के मुताबिक, राजा रतन सिंह ने सिर्फ 1 साल, 3 महीने और 5 दिन (1158 ईसवी) ही चित्तौड़ पर शासन किया)
    - राजपूतों के इतिहास में रानियों और राजपरिवार की महिलाओं का भी कम उल्लेख मिलता है, ऐसा इसलिए क्योंकि परंपराओं के अनुसार इन्हें परदे में रहना होता था और ये खुलकर सबके सामने नहीं आती थीं। राधावल्लभ सोमानी ने अपनी बुक में लिखा है कि 13वीं शताब्दी से पहले शिलालेखों में रानियों के नाम का जिक्र कम होता था, जिसके चलते हाड़ी करमेती, पन्नाधाय और मीरा का नाम भी नहीं है और इसी तरह पद्मिनी का भी। डॉ जैन के मुताबिक, यही वो कारण हैं जिनके चलते राजा रतन सिंह, रानी पद्मिनी और अलाउद्दीन खिलजी से जुड़े तथ्य एकसमान नहीं होते और विवाद हो रहा है।
    कौन थी रानी पद्मिनी
    -पद्मिनी, मेवाड़ के राजा रावल रतनसिंह की पत्नी थीं। बताया जाता है कि उस समय के एक जैन तांत्रिक राघव चेतन, जो दिल्ली दरबार से सम्मानित था, ने पद्मिनी की सुंदरता से दिल्ली के तत्कालीन शासक अलाउद्दीन खिलजी को बताया था। इसके बाद खिलजी इतना मोहित हो गया कि उसने चित्तौड़गढ़ पर हमला कर दिया। पद्मिनी को पाने की चाहत मे उसने करीब 6 महीने तक चित्तौड़गढ़ के किले के चारों ओर डेरा डाले रहा। उसने धोखे से रतन सिंह को बंदी बनाया और पद्मिनी को मांगा लेकिन पद्मिनी ने इसकी जगह जौहर कर लिया। उनके साथ 16000 अन्य महिलाओं ने भी जौहर कर लिया।
    पद्मिनी कहां पैदा हुईं,इसे लेकर इतिहासकारों में कई अलग-अलग मत हैं। इस बारे में कुछ तथ्य हम आपको यहां बता रहे हैं...
    - पद्मिनी सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन की बेटी थी, जिनकी शादी मेवाड़ के रावल रतन सिंह से हुई। सिंहल द्वीप को आज श्रीलंका के रूप में पहचाना जाता है।
    - कुछ इतिहासकारों का मानना है कि पद्मिनी मध्यप्रदेश के सिंगोली गांव की थी, जो राजस्थान में कोटा के नजदीक है। उस दौरान यहां चौहानों का शासन था और एक किला भी बना हुआ था, जिसके अवशेष आज भी मिलते हैं।
    - राजस्थान के एक इतिहासकार का मानना है कि पद्मिनी जैसलमेर के रावल पूरणपाल की बेटी थीं, जिन्हें 1276 में जैसलमेर से निर्वासित कर दिया गया था। उन्होंने पूंगल प्रदेश में अपना ठिकाना बनाया। ये जगह बीकानेर के चमलावती और रमनेली नदियों के संगम पर बसा पड़केश्वर था। यह बीकानेर से खाजूवाल मार्ग पर 50 किमी पश्चिम में है।
    आगे की स्लाइड मेंदेखें वो तमाम सबूत,जो रानी पद्मिनी के जौहर की गवाही आज भी देते हैं-
  • रानी पद्मिनी महल

    चित्तौड़गढ़ किले में कालका माता मंदिर और नागचंदेश्वर महादेव मंदिर के बीच रानी पद्मिनी महल बना हुआ है। यहां रानी गर्मियों के दिनों में अपनी दासियों के साथ रहा करती थीं। रानी की ख्वाहिश पर यहां बगीचा बनाया गया था, जो आज भी गुलशन है।
  • कांच कमरा

    इसी महल में एक कमरा हैं, जिसमें कुछ कांच लगे हैं और सामने झील के बीच एक छोटा-सा महल भी है। बताया जाता है कि जब खिलजी ने पद्मिनी को देखने की शर्त रखी, तो उसे इसी कमरे में लाया गया और सामने महल में पद्मिनी को। कांच से उसे पद्मिनी का अक्स दिखाया गया था। आपको फिल्म गाइड का वो गाना ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’...याद होगा। गाने में इसी कांच कमरे से देवानंद को वहीदा रहमान को देखते फिल्माया गया है, जैसे खिलजी ने पद्मिनी को देखा था।
  • कुंभा महल और जौहर स्थल
    यहां रतन सिंह और पद्मिनी के रहने के प्रमाण मिलते हैं। इस महल को राणा कुम्भा (1433-68 ईस्वी) ने डेवलप कराया था। यहीं मंदिर के सामने वो जगह है, जहां पद्मिनी ने अलाउद्दीन खिलजी से बचने के लिए 16,000 अन्य महिलाओं के साथ जौहर किया था।

    कुंभा महल से कुछ दूरी पर विजय स्तम्भ है, जहां पर कुछ सौ साल बाद रानी कर्णावती ने भी जौहर किया था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को इस जगह की खुदाई में 30 फीट गहरे गड्ढे में महिलाओं की हड्डियां, राख और अधजले गहने मिले थे, जो जौहर की पुष्टि करते हैं।
  • कुंभा महल की गुप्त सुरंग
    रानी पद्मिनी महल में बने इस गुप्त रास्ते से होकर गोमुख तक पहुंचती थीं और मंदिर में पूजा के बाद इसी रास्ते वापस महल चली जाती थीं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अब इस सुरंग को बंद कर दिया है।
  • पद्मिनी की इकलौती मूर्ति

    रानी पद्मिनी, जिसे पद्मावती भी कहा जाता है उसकी एक मूर्ति चित्तौड़गढ़ में मौजूद है। किले स्थित गोमुख कुंड के पास सीढ़ियों से उतरते समय सामने एक मंदिर बना है, जिसमें दीवार पर एक महिला की आकृति (फोटो में) है, इसे ही रानी पद्मिनी माना जाता है।
    मूर्ति को देखने पर पता चलता है कि काले रंग के पत्थर पर एक सुंदर महिला के मुंह की पूरी आकृति स्पष्ट है, जिसके बड़ा माथा और बड़ी-बड़ी आंखें हैं। एक हाथ ऊपर उठाते हुए इसने हाथ में आइना है, जिसे वह देख रही है।
  • शिला पर रतन सिंह

    कुछ समय पहले उदयपुर के पास दरीबा में एक शिला मिली थी जिसमें राजा रतन सिंह के शासन काल का जिक्र साफ-साफ किया गया है। इसकी तारीख वि सं. 1359 माघवदि 5 बुधवार है। यह तारीख अलाउद्दीन के चित्तौड़ आक्रमण के लिए निकलने से चार दिन पहले की है।
  • मेवाड़ के इतिहास सहित जैन ग्रंथों में पद्मिनी

    डॉ. जैन ने Dainikbhaskar.com को कुछ जैन ग्रंथों के बारे में बताया जिसमें पद्मिनी का उल्लेख है। उन्होंने कई और किताबों के बारे में बताया जिनमें मेवाड़, राजा रतन सिंह, रानी पद्मिनी औऱ चित्तौड़ का इतिहास लिखा गया है।
    1- करकयडू चरिऊ में जिक्र है कि रतन सिंह सिलोन (श्रीलंका) गए थे, जहां उन्होंने पद्मिनी से शादी की थी।
    2-3- जिनदत्तचरित्र और भविसयत कहा- इन दो ग्रंथों में भी रतन सिंह और पद्मिनी की शादी का जिक्र है।
    4- रयणसहरी- इसमें भी रानी पद्मिनी औऱ चित्तौड़ का जिक्र किया गया है।
    5- छिताई-चरित्र- इस ग्रंथ में पद्मिनी और पहली बार खिलजी के असफल दिल्ली लौटने का जिक्र है।
    इसके अलावा
    - राजस्थान के नामी इतिहासकार रामवल्लभ सोमानी ने भी अपनी बुक ‘वीर भूमि चित्तौड़’ (6) में रतन सिंह का जिक्र करते हुए लिखा है- वह समर सिंह के बाद मेवाड़ की गद्दी पर बैठा था। अमरकाव्य वंशावली (7) में भी रतन सिंह को सिसौदिया का वंशज माना गया है।
    – मध्यकाल में भी पद्मिनी और रतन सिंह की कथा प्रचलित थी।
    - फरिश्ता ने जो इतिहास लिखा उसमें भी पद्मिनी का नाम से जिक्र किया गया है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
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