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डॉक्टर ने कहा- 'बच्ची के पेट में तो बच्चा है', फिर दो साल बाद हुआ ये

अजय देवांगन | Dec 02, 2016, 14:12 PM IST

अपनी नानी की गोद में एक साल का बच्चा।

धमतरी।14 साल की उम्र में बिनब्याही मां बनी नाबालिग लड़की की शादी उसके प्रेमी से तो करवा दी गई लेकिन उसकी जिंदगी में सुकून नहीं आया। आखिरकार लड़की ने अपने मायके में खुद को आग लगाकर जान दे दी। डॉक्टर ने कहा था- लड़की के पेट में बच्चा है...
- मामला धमतरी जिले के सिहावा ब्लॉक स्थित एक गांव का है। लड़की की कहानी बड़ी ही मार्मिक है।
- गांव की सुनीता देवांगन (बदला हुआ नाम) और उसके पड़ोसी हेमंत देवांगन में प्रेम-प्रसंग था।
- नाबालिग उम्र में दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बने। 2014 में मामला तब सामने आया जब लड़की की तबियत बिगड़ी।
- परिजन उसे हॉस्पिटल ले गए। डॉक्टर ने जांच पड़ताल के बाद बताया कि बच्ची के पेट में बच्चा है।
- पूछताछ करने पर लड़की ने घरवालों को पूरी कहानी बता दी। उस वक्त लड़की 14 साल की थी जबकि लड़का 15 साल का।
- लड़की के परिजन यौन शोषण का मामला दर्ज कराने थाने जाने की तैयारी करने लगे तो इसकी भनक लड़के के परिजनों को लगी।
- उन्होंने लड़की के परिजनों को लड़की को अपनाने का आश्वासन देकर रोक लिया। वे बिना शादी के गर्भवती लड़की को अपने घर ले गए।
बच्चा हुआ उसके बाद शुरू हुई ट्रेजडी
- लड़की बिना शादी के लड़के के घर साल भर रही। इस बीच उसने लड़के को जन्म दिया।
- लड़के के जन्म के बाद उसके साथ वहां ज्यादती शुरू हो गई। अविवाहित पति समेत सभी लोग मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने लगे।
- लड़की से बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह बच्चे को लेकर अपने माता-पिता के घर लौट गई।
- मामले को लेकर गांव में सामाजिक बैठक हुई। समाज के मुखिया ने नाबालिगों का मामला देख हस्तक्षेप से मना कर दिया और पुलिस के पास जाने की सलाह दी।
थानेदार ने किया 'खेल'
- समाज के कहने पर पूरा परिवार थाने पहुंच गया। उस वक्त सिहावा थाने के टीआई हर्षवर्धन वैश्य ने एफआईआर दर्ज नहीं किया।
- उन्होंने उल्टे लड़की के परिवार को ही जिम्मेदार ठहराया और यह कहते हुए डांटा कि "आपलोग लड़की को संभाल नहीं सके।"
- इतना ही नहीं, थाना प्रभारी वैश्य ने लड़का-लड़की को रायपुर भिजवाकर आर्य समाज मंदिर में जबरदस्ती शादी भी करवा दी।
निराश लड़की ने लगाया मौत को गले
- ससुराल, मायके, पुलिस, हर जगह से निराश लड़की ने गुरुवार शाम चार बजे मायके के पीछे शौचालय में खुद को आग लगा ली।
- घायल अवस्था में उसके चचेरे भाई उसे जिला अस्पताल ले गए। वहां उसने दम तोड़ दिया।
- नाबालिग का एक साल का बेटा अब अपनी नानी की गोद में है और उसे पता नहीं कि यह सब हो क्या रहा है।
अस्पताल में लापरवाही
- लड़की के पिता बोल नहीं सकते। उसका कोई भाई भी नहीं है। चचेरे भाई उसे लेकर हॉस्पिटल गए थे।
- चचेरे भाइयों का आरोप है कि हॉस्पिटल में इलाज में लापरवाही बरती गई।
- शाम को वे हॉस्पिटल पहुंचे तो लड़की जिंदा थी। उस वक्त उसे देखने कोई डॉक्टर नहीं आया।
- जब उसने दम तोड़ दिया तो जबरदस्ती ऑक्सीजन लगाकर जिंदा करने की कोशिश की जा रही थी।
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Web Title: minor mother burns self in in-laws house
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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