Chhatisgarh » Raipur» बीस मिनट से ज्यादा सुनना किसी को पसंद नहीं

बीस मिनट से ज्यादा सुनना किसी को पसंद नहीं

rakesh malviya | Dec 08, 2012, 17:35 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

सिटी रिपोर्टर. रायपुर

20 मिनट से ज्यादा कोई सुनना पसंद नहीं करता। अगर श्रोताओं को बांधे रखना हे तो अपने भाषण के दौरान बीच-बीच में छोटी-छोटी कहानी, जोक, कहावत का प्रयोग करें। कुछ ऐसी जानकारी सीए स्टूडेंट्स को पब्लिक स्पीकिंग विषय पर शुक्रवार को दी गई। मौदहापारा स्थित महावीर गौशाला परिसर स्थित आईसीएआई में प्रशिक्षिक चेतन तारवारी ने स्टूडेंट्स को बताया कि लोगों के बीच जब भी बोलने का मौका मिले तो कुछ चीजों का ध्यान रखें।

जो भी बोलना है उसकी अच्छी तरह प्रैक्टिस कर लेनी चाहिए। रटने की बजाय याद रखने का अभ्यास करे।

बोलने के पहले लंबी सांस ले और माइक को ठीक तरह से हैंडल करते हुए बोलने की शुरूआत करें।

छू माइक में बोलने के दौरान हर कोई डरता है। उदाहरण देते हुए बताया गया कि स्वामी विवेकानंद ने भी शिकागो में भाषण देते वक्त घबराए थे। क्योंकि हर व्यक्ति के मन में स्टेज फीयर होता है। अच्छा वक्ता भी जब माइक पर बोलने लगता है तो कम से कम 20 सेकेंड डरता है और फिर वो नार्मल होता है।

अच्छे वक्ता बनने के पहले अच्छा श्रोता बनना बहुत जरूरी है। जब तब अच्छा श्रेाता नहीं बनेंगे, तब तक अच्छा वक्ता नहीं बन सकते।

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Web Title: बीस मिनट से ज्यादा सुनना किसी को पसंद नहीं
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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