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पांचवीं फेल महिला को 4 बार मिल चुकी है डीलिट, आज हैं इंटरनेशनल हस्ती

dainikbhaskar.com | Mar 07, 2017, 15:40 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

कई सम्मान मिल चुके हैं तीजनबाई को।

रायपुर.पंडवानी गायन को छत्तीसगढ़ से बाहर देश और दुनिया में पहचान दिलाने वाली आर्टिस्ट तीजनबाई की अनोखी पर्सनैलिटी भी उन्हें अलग पहचान देती है। पांचवीं फेल तीजन बाई को अब तक चार डीलिट उपाधियां मिल चुकी हैं और और वह बीएसपी (भिलाई स्टील प्लांट) की एजीएम पोस्ट से हाल ही में रिटायर हुई हैं।जानिए एक पांचवीं पास महिला कैसे बनी इंटरनेशनल हस्ती, मां के विरोध के चलते छोड़ना पड़ा था घर...

- भिलाई के पास गनियारी गांव में 24 अप्रैल 1956 को पैदा हुईं तीजनबाई की मां का नाम हुनुकलाल परधा और मां का नाम सुखवती था।
- नन्ही तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते-सुनाते देखतीं और धीरे-धीरे उन्हें ये कहानियां याद होने लगीं।
- उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख नाम के कलाकार ने उन्हें इन्फॉर्मल ट्रेनिंग देकर उसे निखारा।
- उसी दौरान 13 वर्ष की उम्र में तीजन ने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया।
- उस समय में महिला पंडवानी सिंगर्स केवल बैठकर गा सकती थीं जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं जो जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी का प्रदर्शन किया।
और बदल गई लाइफ...
- एक दिन ऐसा भी आया जब फेमस ड्रामा आर्टिस्ट हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तबसे तीजनबाई की लाइफ चेंज हो गई।
- उसके बाद तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से लेकर देश के कई अन्य बड़ी शख्सियतों के सामने उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन किया।
- इस कला ने उन्हें इंटरनेशनल फेम दिया। अब तक फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, लंदन, मालटा, साइप्रस, ट्यूनीशिया, टर्की, यूरोप, इटली, यमन, बंगलादेश, मॉरिशस आदि देशों में पंडवानी गा चुकी हैं।
- वह 1988 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और 2003 में कला के क्षेत्र में पद्मभूषण से अलंकृत की गईं।
- 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2007 में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया गया।
अचीवमेंट्स का कोई गुरूर नहीं
- तीजनबाई को अपनी उपलब्धियों का जरा सा भी गुरूर नहीं है। वह कहती हैं- “मैं आज भी गांव की औरत हूं। दिल में कुछ नहीं है …ऊंच-नीच, गरीब-अमीर कुछ नहीं, मैं सभी से एक जैसे ही मिलती हूं। बात करती हूं। बच्चों-बूढ़ों के बीच बैठ जाती हूं। इससे दुनियादारी की कुछ बातें सीखने तो मिलती है। ऐसे में कोई कुछ-कह बोल भी दे तब भी बुरा नहीं लगता। मैं आज भी एक टेम बोरे बासी (रात में पका चावल पानी में डालकर) और टमाटर की चटनी खाती हूं।”
इंदिरा ने कहा- महाभारत करवाती हो?
- तीजनबाई को तत्कालीन राष्ट्रपति वेंकटरमन ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।
- उस दिन उनकी भेंट तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से भी हुई थी।
- उस दिन को याद कर तीजन बताती हैं - “वह (इंदिरा) मुझे बुलाकर बोलीं- छत्तीसगढ़ की हो न? मैंने ‘हां’ कहा तो बोलीं- महाभारत करवाती हो? मैंने जवाब दिया- पंडवानी सुनाती हूं, महाभारत नहीं करवाती। यह सुनकर इंदिरा जी खुश हुईं और मेरी पीठ थपथपाई।”
जब छोड़ना पड़ा घर
- तीजनबाई अपने नाना से डरती थीं इसलिए झोपड़ी के बाहर बैठकर उनका महाभारत सुनती थीं।
- तीजन को बार-बार कहा जाता कि पंडवानी उनके बस की बात नहीं है लेकिन उन्होंने सुनना जारी रखा।
- एक दिन उन्हें नाना ने छिपकर सुनते हुए देख लिया और कहा-बताओ, अब तक तुमने क्या-क्या सुना?
- तीजन ने 15 दिन का दोहा पांच मिनट में कह सुनाया। इस पर नाना ने कहा- मेरे घर में नवरत्न है और मुझे पता नहीं।
- लेकिन, तीजन की मां अब भी विरोध में थीं। मजबूरन तीजन ने घर छोड़ दिया और रायपुर के पास चंद्रखुरी में जाकर रहने लगीं।
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Web Title: this fifth fail lady honored with four D Lit, becomes international personality
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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