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Army से ट्रेनिंग के बाद यहां आते हैं लड़के-लड़किया, देखें इनकी लाइफ स्टाइल

dainikbhaskar.com | Apr 15, 2017, 15:37 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

कसोल कुल्लू से करीब 42 किलोमीटर दूर स्थित है जो करीब 1640 मीटर की ऊंचाई पर है।

चंडीगढ़। हिमाचल के कसोल गांव को इजरायल से आने वाले टूरिस्ट की पहली पसंद कहा जाता है। आर्मी की ट्रेनिंग लेने के बाद इजरायली नागरिक इस गांव में इतनी बढ़ी संख्या में आते हैं कि ऐसा लगता है मानों यह कोई इजरायल का ही गांव हो। आज 15 अप्रैल को हिमाचल स्थापना दिवस है इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा है इस गांव से जुड़ी खास बातों के बारे में। जानिए क्यों बैन हैं यहां भारतीय पुरुष...
- इस क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग खासतौर से भरतीय लड़कों को इस इलाके में नहीं आने देते।
- उनका कहना है कि यहां आने वाले भारतीय लड़के इजरायली महिलाओं के साथ छेडख़ानी करते हैं तथा उनकी लाइफ स्टाइल में में खलल डालते हैं। यदि कोई भारतीय पुरुष यदि पर्यटक बनकर इलाके में आता है तो उसे किराए पर कमरा ही नहीं दिया जाता है।
इजरायलियों को इसलिए पसंद है ये गांव
- इजरायल के नागरिकों का दावा है कि उन्होंने करीब दो दशक पहले कसोल गांव को खोजा था।
- घरेलू पर्यटकों की मनाली में संख्या बढऩे के बाद जब मनाली अपना प्राकृतिक रूप खोने लगा तो इजरायली टूरिस्ट एकांत स्थल ढूंढने के लिए पार्वती घाटी के किनारे बसे गांव कसोल की ओर रुख करने लगे।
स्थानीय लोगों का रोजगार...
- इस गांव में आसानी से ड्रग्स, और अपनी तरह से जिंदगी जीने का पूरा वक्त मिलने की वजह से यहां सैलानियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। इस क्षेत्र के आसपास के गांवों में भी इजरायली झंडे नजर आते हैं।
- शुरुआत में इजरायली कसोल आए तो उन्होंने जगह किराए पर लीं। उन्होंने अपने गेस्ट हाउस, कैफे चलाए। स्थानीय लोगों ने उन्हें अपनी जगहें दी, क्योंकि उन्हें यकीन था कि इससे वहां रोजगार के साधन पैदा होंगे।
गांव में बोली जाती है हिब्रू भाषा...
- यहां के इंटरनेट कैफे में बातचीत की भाषा हिब्रू है। इजरायली ज्यादा अंग्रेजी नहीं समझते हैं।
- स्थानीय लोग इजरायलियों के लिए बने कैफे में नहीं जाते। उनका कहना है कि इजरायलियों का खाना अलग तरह का है।
- अब लोग अपने खुद के कैफे, गेस्ट हाउस चलाने लगे हैं। तीन सौ रुपए रोजाना किराया पर यहां कमरे मिल जाते हैं।
- गांव के लोगों ने खुद को इजरायलियों के मुताबिक ही ढाल लिया है। हम्मस, पिटा ब्रेड लोगों के मुख्य भोजन बन गए हैं।
- खबद हाउस यानी यहूदियों का सांस्कृतिक स्थल भी यहां है। इसकी खूबसूरत इमारत में लकड़ी के फर्श और बेंच हैं।
- एक युवा रब्बी (यहूदी पुजारी) को यहां इजरायल से भेजा गया गया है, जो यहूदियों की पूजा करने में मदद करता है।
आगे की स्लाइड्स में देखें कैसी है इस गांव की लाइफ स्टाइल...
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Web Title: there are so many Israelis living in Kasol Himachal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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