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शहर में आज और कल

Sushma Barange | Dec 02, 2016, 10:33 IST

भोपाल.जावेद अख्तर जितने दमदार तरीके से गाने और शायरी लिखते हैं, उतनी ही बेबाकी से मुल्क, मजहब और डेमोक्रेसी पर बात करते हैं। शनिवार शाम यहां दैनिक भास्कर समूह के प्रोग्राम ‘गुफ्तगू जावेद अख्तर के साथ’ में भी उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी। इन्टॉलरेंस, कट्टरता जैसे मसलों पर खुलकर बोल। एक वाकये का जिक्र करते हुए कहा, ''भिवंडी में एक बहस के दौरान मुसलमान मानने को तैयार नहीं थे कि ओसामा आतंकी था। वे इसे अमेरिका का दुष्प्रचार बता रहे थे। तब मैंने पूछा- उसमें एक अच्छाई ही बता दीजिए... वे चुप हो गए।'' Dainikbhaskar.com के एडिटर अनुज खरे ने उनसे सवाल पूछे। जावेद बोले- हमारा मुल्क 90% टॉलरेंट है, जिस तरह का इस्लाम यहां है, वैसा कहीं नहीं...
- पिछले एक-दो साल में देश में उठे संवेदनशील मुद्दों के जिक्र पर उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुल्क 90% टॉलरेंट है। हमारे मुल्क का 90 फीसदी आदमी निहायत ही टॉलरेंट है। जिस तरह का इस्लाम यहां है, वैसा कहीं नहीं है। जो भी मजहब यहां आया, यहीं का हो गया, यहीं जज्ब होता गया।’’
- मुंबई में बसने से पहले भोपाल में साढ़े चार साल रहे अख्तर से जब पूछा गया था कि जब मुल्क में लोगों के जुनून पर ताकत सवार हो जाए तो क्या किया जाए?
- इस पर उन्होंने कहा, ‘‘हमारे मुल्क की एक खूबी रही है। ये मुल्क हजारों साल से डेमोक्रेसी के लिए तैयार हो रहा था। अब सवाल उठता है कि ज्यादा और कम की क्या डेफिनेशन है?''
- ''डेमोक्रेसी ये मानकर चलती है कि अलग-अलग वक्त पर लोगों की अलग-अलग राय होगी। कभी ये ओपिनियन मेजोरिटी में होगा, कभी माइनॉरिटी में।''
- ''दुनिया में यह एक ऐसा मुल्क है जहां बाहर से दूसरे धर्म आए और हमारे में ही जज्ब हो गए। जिस तरह का इस्लाम भारत में है वो यहीं है। ऐसा कहीं दूसरी जगह नहीं है। सिर्फ इंडियन सब-कॉन्टिनेंट में ही मुस्लिम दुल्हन शादी में लाल जोड़ा पहनती है।''
- ''जहां तक बात जुनून पर ताकत सवार होने की है तो हर जगह, हर दौर में कुछ पागल होते हैं। इस पागलपन को तब ताकत मिलती है जब कुछ लोग कहते हैं ये तो सही कह रहा है। वहीं से दिक्कतें शुरू होती हैं।''
- ''मेरा यकीन है कि देश में बहुत कुछ नहीं बदला है। हमारे मुल्क का 90 फीसदी आदमी निहायत ही टॉलरेंट है। हम हर तरह की थोड़ी-सी सुपिरियरिटी अपने दिल में छुपाकर रखते हैं। दूसरों के घर से हमें अपने घर का बना खाना अच्छा लगता है। लेकिन ये सुपिरियरिटी आक्रामक नहीं होनी चाहिए।''
मुगल झंडे तले हुई थी 1857 की क्रांति
- अख्तर ने कहा, ''मुगलों के बारे में हिस्ट्री को लेकर कई बार गलत तरह का परसेप्शन बना दिया गया। हकीकत यह है कि अकबर जैसे मुगल यहीं जन्मे, यहीं मरे और यहीं की सरजमीं के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया। जब यूरोप सेकुलरिज्म शब्द को भी नहीं जानता था, तब अकबर उस पर काम कर रहे थे। अकबर ने दुनिया को बताया कि रामायण-महाभारत जैसे हमारे ग्रंथ कितने महान हैं। चंद्रगुप्त और अकबर हम सबके पूर्वज हैं। कोई किसी एक को नकार नहीं सकता।''
- ''झांसी की रानी, नाना फडणवीस, तात्या टोपे जैसी शख्सियतों ने 1857 की क्रांति मुगलों के झंडे तले लड़ी। और तब मुगलों का झंडा हरा नहीं था। उसके झंडे पर पीले रंग के शेर का निशान होता था।''
नोटबंदी पर भी बोले अख्तर
- नोटबंदी के मोदी सरकार के फैसले के बारे में पूछे जाने पर अख्तर ने कहा, ''इसे रोडब्लॉक तो नहीं कहूंगा, लेकिन ये बहुत बड़ा स्पीड ब्रेकर जरूर है। अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले 75-80% लोग कैश में कारोबार करते हैं। उन्हें आप चेक देेंगे तो वे कैसे काम करेंगे?''
6000 साल पुरुषों ने राज किया, अब वक्त महिलाओं का है
- आप कितने फेमिनिस्ट हैं, इस सवाल पर अख्तर ने कहा, ''दुनिया में 6000 साल तक पुरुषों ने राज किया। महिलाओं के लिए दायरा छोटा रखा गया था। लेकिन अब वक्त महिलाआें का है। वे हर क्षेत्र में राज करेंगी। अब सिविलाइजेशन ऑफ वुमन शुरू होने वाली है। मैं पूरी तरह फेमिनिस्ट हूं।''
हंगामे के बीच कॉपीराइट बिल पास होना मेरी उपलब्धि
- अख्तर से जब पूछा गया कि बतौर राज्यसभा सदस्य उनका कार्यकाल कैसा रहा, तो उन्होंने कहा कि देश में वे और शबाना आजमी ऐसे इकलौते कपल हैं जिन्हें राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया था।
- अपने कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा, ''जो इंडिपेंडेट मेंबर होते हैं, उन्हें दो-तीन मिनट से ज्यादा नहीं मिलता। मैंने तीन-चार संसद में बोला है। अहम बात ये है कि मुझे वहां जाने का मौका मिला। तो मेरे पास सभी नेताओं तक एक्सेस मिल गया।''
- ''मैं एक मकसद लेकर गया था। कॉपीराइट से जुड़े नियम बहुत कमजोर थे। हमने मिलकर एक मुहिम चलाई कि एक ऐसा कानून बनाया जाए जिससे जो गरीब राइटर हैं उनके अधिकार ना मर सके।''
- ''मुझे ये बताते हुए फख्र है कि दोनों सदनों ने उस वक्त एक सुर में उस वक्त बिल पास किया जब आज की तरह दोनों हाउस में हंगामा हो रहा था। आज मैं फख्र के साथ कह सकता हूं कि हिंदुस्तान में कॉपीराइट लॉ दुनिया के बेहतरीन लॉ में से एक है। छह साल में मेरी यह एक उपलब्धि रही।''
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Web Title: शहर में आज और कल
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