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केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे का निधन, मोदी की टीम का 'पावरफुल' चेहरा थे

dainikbhaskar.com | May 19, 2017, 10:28 IST

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मोदी कैबिनेट के मंत्री अनिल माधव दवे का दिल का दौरा पड़ने से 61 साल की उम्र में निधन हो गया।

भोपाल/दिल्ली। केंद्र सरकार में पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे का दिल का दौरा पड़ने से 61 साल की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार सुबह दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार बुधवार रात तक वे पीएम नरेंद्र मोदी के साथ एक बैठक में मौजूद थे। वह काफी समय से बीमार थे और एम्स में उनका इलाज चल रहा था। दवे 5 जुलाई 2016 में केंद्रीय मंत्री बनाए गए थे, वह मध्यप्रदेश बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं।पढ़ें पूरी खबर...
-सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अनिल माधव दवे के घर से मिली वसीयत में लिखी बातों का खुलासा किया है। सीएम ने बताया कि, वसीयत के अनुसार दवे चाहते थे कि उनका अंतिम संस्कार होशंगाबाद स्थित बांद्राभान पर बने शिवनेरी आश्रम से किया जाए। उनकी अंतिम इच्छा पूरी करते हुए शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार नर्मदा के किनारे ही किया गया।
-गुरुवार शाम को दवे का पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से दिल्ली से भोपाल लाया गया। यहां भाजपा कार्यालय में उनके अंतिम दर्शन करने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शुक्रवार सुबह नर्मदा किनारे परिजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पीएम मोदी ने ट्वीट कर जताया दु:ख
नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अनिल दवे के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि, मैं स्तब्ध हूं। दोस्त और एक आदर्श साथी के तौर पर अनिल माधव दवे जी की मौत से दुखी हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। उनका जाना मेरे लिए निजी क्षति है।
राज्यपाल ने जताया दु:ख
दवे के निधन को राजनीति जगत की बड़ी क्षति बताते हुए राज्यपाल ओपी कोहली ने दो दिन (18 व 19 मई) का राजकीय शोक घोषित किया है। इसके साथ ही 19 मई को लाल परेड ग्राउंड पर होने वाला निगम का कार्यक्रम 'धन्यवाद भोपाल' निरस्त कर दिया गया है।
दवे के बारे में...
-बड़नगर (मप्र) में 6 जुलाई 1956 को जन्मे दवे ट्रेंड पायलट रहे हैं। साल वर्ष 2004 में दवे ने हवाई जहाज से नर्मदा की परिक्रमा की थी। नर्मदा की हवाई परिक्रमा करने के बाद दवे ने इस पर एक पुस्तक लिखी थी, जिसका शीर्षक 'अमरकण्टक से अमरकण्टक तक' था। 2006 में प्रकाशित हुई यह पुस्तक काफी लोकप्रिय हुई थी।
-दवे की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे में कार्यरत पिता के साथ गुजरात के विभिन्न अंचलों में हुई थी। 1964 से रा.स्व. संघ के स्वयंसेवक बने। इंदौर के गुजराती कॉलेज से एम कॉम किया। इस बीच वे छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। ग्राम्य अर्थव्यवस्था व प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले दवे जन अभियान परिषद् (स्वयंसेवी संगठनों के दर्शन और व्यवहार को क्रियारूप देने का प्रयास करने वाली मप्र की संस्था) के रचनाकार रहे हैं।

-संघ से ताल्लुक रखने वाले अनिल दवे को एक प्रखर प्रवक्ता के तौर पर जाना जाता था। उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा पर अच्छी पकड़ थी।
-अनिल माधव दवे एक समर्पित जनसेवक के रूप में जाने जाते रहे हैं। वह पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील थे।
-अनिल दवे ने नर्मदा नदी के लेकर एक बड़ी मुहिम चलाई थी। उन्होंने भोपाल स्थित अपने घर का नाम भी 'नदी का घर' रखा। वो अब एक संग्राहलय का रूप ले चुका है।
-अनिल दवे ने शादी नहीं की थी। वे चुनाव प्रबंधन में महारथी थे।
-नरेन्द्र मोदी की टीम के एक सशक्त साथी माने जाते रहे अनिल माधव दवे दोहरी प्रतिभा के धनी थे। वे साहित्यकार के साथ ही साथ प्रोफेशनल पायलट भी थे। इतना ही नहीं उन्हें बंदूक चलाने का बड़ा शौक था। इनके पास 50 हजार रुपए कीमत की पुरानी पिस्टल और 20 हजार रुपए मूल्य की राइफल थी।
दवे की चर्चित किताबें..
-सृजन से विसर्जन तक
-नर्मदा समग्र
-शताब्दी के पांच काले पन्ने (सन् 1900 से सन् 2000)
-संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से
-महानायक चंद्रशेखर आजाद
-रोटी और कमल की कहानी
-समग्र ग्रामविकास
-अमरकंटक से अमरकंटक तक
-Beyond Copenhagen
-Yes I Can, So Can We
आगे की स्लाइड्स पर पढ़ें पीएम मोदी और सीएम शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य नेताओं के ट्वीट और दवे की वसीयत...
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Web Title: Anil Madhav Dave Passes Away Cremated at Narmada River Bandrabhan, Hoshangabad
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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