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नर्मदा के लिए पहुंचे नोबल विजेता सत्यार्थी, कहा-अगला महायुद्ध पानी के लिए होगा

नरेंद्र कुशवाह | Jan 11, 2017, 09:53 IST

कैलाश सत्यार्थी ने अवैध उत्खनन पर भी चिंता जताई।

भोपाल। नर्मदा नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण का बीड़ा सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उठाया है। इसमें लाखों लोग भाग ले रहे हैं। इसके तहत मंगलवार को नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी सहित कई दिग्गज नर्मदा यात्रा में शामिल हुए। बढ़ रहे प्रदूषण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अगला महायुद्ध पानी के लिए होगा। नर्मदा घाटों पर बनाई गई मानव शृंखला...
सत्यार्थी ने दिलाया संकल्प...
सत्यार्थी मध्य प्रदेश में निकाली जा रही नर्मदा सेवा यात्रा के होशंगाबाद जिले में प्रवेश के दौरान उमरधा के पासीघाट में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि नर्मदा अभियान में इस तरह की ऊर्जा देखकर वे अभिभूत हैं। रेत से भले ही पद चिन्ह मिट जाएं पर इतिहास से इन चरण चिन्हों को कोई नहीं मिटा सकता। प्रदेश सरकार के साथ आपका यह काम नई सभ्यता और समाज की रचना करेगा। सत्यार्थी ने बेटी बचाओ, पेड़ लगाओ और गांव तथा नगर को स्वच्छ रखने का संकल्प दिलाया। उन्होंने अवैध उत्खनन पर भी चिंता जताई।
यह अभियान अब आंदोलन बन गया है...
गौ संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष महामंडलेश्वर अखिलेशानंद ने कहा कि मप्र सरकार का नर्मदा संरक्षण की दिशा में चलाया गया अभियान अब आंदोलन बन गया है। इस आंदोलन को संत समाज का पूर्ण समर्थन है। इस मौके पर सांसद राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि 50 साल पहले यह कदम सरकार द्वारा उठाया जाता तो गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदी प्रदूषित न होती।
11 मई 2017 को पूरी होगी यात्रा...
-इससे पहले सोमवार को होशंगाबाद स्थित 62 घाटों पर 10 हजार लोगों ने मानव शृंखला बनाई। इनमें बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग, समाजसेवी, व्यापारी, जनप्रतिनिधियों सहित कई सामाजिक संगठनों के लोगों ने हाथ से हाथ मिलाकर नर्मदा संरक्षण का संदेश दिया।
- सीएम शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा का शुभारंभ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से 11 दिसंबर 2016 को शुरू किया था। लगभग 3400 किलोमीटर की यात्रा 11 मई 2017 को अमरकंटक में ही सम्पन्न होगी।

-केन्द्रीय प्रदूषण निवारण मंडल के अनुसार नर्मदा नदी देश की सबसे कम प्रदूषित नदी की श्रेणी 'क' में आती है। पिछले 10 वर्ष के कार्यकाल में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं औद्योगिक नीतियों का कड़ाई से पालन करवाने के कारण नर्मदा नदी श्रेणी 'क' में आयी है।
-यात्रा का मुख्य उद्देश्य नर्मदा के संरक्षण और उससे जुड़े संसाधनों के सतत उपयोग के संबंध में जागरूकता बढ़ाना, नदी के तटों से लगे क्षेत्रों के संरक्षण और भूमि कटाव को रोकने के लिए नर्मदा तटों पर वृक्षारोपण करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना और नदी को प्रदूषित करने वाले स्रोतों की पहचान कर जन-जागरूकता तथा जन-सहभागिता से उन्हें रोकना है।
-अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति, स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
-नर्मदा प्रदेश के 16 जिलों से गुजरकर लगभग 1100 किलोमीटर की यात्रा करती है। इसके माध्यम से चार करोड़ से अधिक आबादी को पेयजल प्राप्त होता है तथा 17 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। नर्मदा नदी से 2400 मेगावाट की बिजली भी उत्पन्न होती है।
-यात्रा के दौरान नर्मदा नदी के दोनों तरफ एक किलोमीटर दूर तक फलदार पेड़ लगाए जाएंगे। नर्मदा को प्रदूषित होने से रोकने के लिए शौचालय निर्माण, हवन कुंड सामग्री के लिए अलग से निर्माण, शवदाह गृहों का निर्माण, महिलाओं के लिए स्नानघरों का निर्माण करवाया जा रहा है।
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Web Title: cm Shivraj Singh Chouhan launched Narmada seva yatra
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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