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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल: एक चक्कर खाकर गिरा, दूसरे की हार्ट अटैक से मौत

अनूप दुबोलिया/एचसी वर्मा | Apr 21, 2017, 10:58 IST

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भोपाल। नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर संविदा बिजली कर्मियों की चौथे दिन जारी हड़ताल के बीच एक नेता की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इससे पहले एक हड़ताली कर्मचारी चक्कर खाकर गिर पड़ा था। शहर के अंबेडकर मैदान में चल रहे प्रदर्शन के दौरान गुरुवार को एक पदाधिकारी को हार्ट अटैक आ गया, जिसकी इलाज के दौरान जेपी अस्पताल में मौत हो गई।बिगड़ रही हैं प्रदर्शनकारियों की तबीयत...
भाषण के बाद आया अटैक
-मध्य प्रदेश विद्युत मंडल कर्मचारी फेडरेशन के सीनियर लीडर रामनारायण दीक्षित की गुरुवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। उन्हें अटैक तब आया, जब वे सेकंड स्टॉप स्थित अंबेडकर मैदान में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान भाषण देकर बैठे थे। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वे 67 साल के थे।
-उधर बिजली कर्मचारिेयों की हड़ताल बुधवार को चौथे दिन भी जारी रही। यूनाइटेड फोरम के घटक संगठनों ने भी मंच पर आकर आंदोलन का ऐलान किया। इस बीच ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने बिजली कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।
-उन्होंने बुधवार को जारी बयान में कहा कि कार्य पर उपस्थित होने के बाद कर्मचारियों की शेष मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा। बयान के मुताबिक तीन सूत्रीय मांग के समर्थन में की जा रही हड़ताल को लेकर 18 अप्रैल को विद्युत वितरण कंपनी के अफसरों के साथ कर्मचारी नेताओं से चर्चा हुई। चर्चा के दौरान हड़ताल कर रहे संविदा व आउटसोर्स कर्मियों की दो मुख्य मांगों पर सहमति अनुसार लिए गए निर्णयों की लिखित रूप से जानकारी फोरम को दी गई। इस संबंध में विद्युत वितरण कंपनियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं
आप ने मांगा शिवराज सिंह से इस्तीफा
बिजली कर्मचारी की मौत को आम आदमी पार्टी ने खेदजनक बताते हुए शिवराज सिंह चौहान से इस्तीफा मांगा है। पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने कहा की यह मौत शिवराज सरकार द्वारा की गई 'हत्या' है। इसलिए उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
आप नेता ने कहा कि मप्र में बिजली के क्षेत्र में 2 लाख करोड़ से अधिक के घोटाले हुए हैं। अगर भ्रष्टाचार न होता, तो इतने पैसों से शिवराज सरकार सभी संविदा कर्मचारियों को आसानी से नियमित कर सकती थी। अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में उनकी सरकार ने सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित कर दिया है। 2018 में अगर मप्र में सरकार बनती है, तो यहां भी उनकी पार्टी ऐसा ही करेगी।
गर्मी के कारण बीमार हो रहे हैं आंदोलनकारी
प्रदेश में पड़ रही गर्मी और लू के असर से आंदोलनकारी लगातार बीमार हो रहे हैं। दिन-भर कड़ी धूप में कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार का ध्यान उनकी ओर नहीं जा रहा है।

सीएम ने कहा ये
उधर, एक कार्यक्रम के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने हड़ताली कर्मचारियों के लिए कहा है कि, प्यार से मांगोगे तो सबकुछ मिलेगा, दादागिरी नहीं चलेगी। वहीं, मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा कि, पिछले तीन सालों से हम प्यार से ही पेश आ रहे हैं। अपनी मांगों के निराकरण को लेकर कई बार सरकार और बिजली कंपनियों को ज्ञापन सौंपे और आंदोलन किया, लेकिन मांगों का निराकरण नहीं हुआ।

सरकार बनने के बाद निकाले गए कई कर्मचारी
-मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर और यूनाइटेड फोरम के संयोजक वीकेएस परिहार ने बताया कि भाजपा ने घोषणा पत्र में दावा किया था कि सरकार बनी तो संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।
-सरकार बनने के बाद से कई कर्मचारियों को निकाला जा चुका है।
-इतना ही नहीं स्थाई भर्ती की जगह आउट सोर्स के जरिए भर्ती की जा रही है। बाद में इन कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है।
-इसी तरह सरकार ने अटल ज्योति योजना का काम संविदा कर्मचारियों से कराया और वाहवाही लूटी।

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Web Title: CM shivraj singh chouhan statement about strikers
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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