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MPPSC टॉपर से पैनल ने पूछा, क्या तुम भी पुराने ढर्रे पर चलोगी, दिया ये जवाब

प्रीति शर्मा/अनिल दीक्षित | Apr 21, 2017, 18:52 IST

  • मां कल्पना त्रिपाठी के साथ अंकिता।
    भोपाल। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) 2015 का फाइनल रिजल्ट बुधवार रात को घोषित किया गया। इस एग्जाम में भोपाल की अंकिता त्रिपाठी ने 1066 नंबर के साथ टॉप किया हैं। अंकिता अभी सलेक्शन एक्साइज ऑफिसर हैं और यूपीएससी की प्रिपरेशन कर रही हैं। जानें करीब 20-25 मिनट के इंटरव्यू में अंकिता से कैसे-कैसे सवाल पूछे गए?

    सवालः सिविल सर्विस में क्यों आना चाहती हैं?
    जवाबः पर्सनल काम से मेरा एक-दो बार कलेक्टोरेट जाना हुआ था, वहां मैंने कई लोगों को परेशान होकर इधर-उधर घूमते देखा था। उसी वक्त सोच लिए था कि लोगों की बेहतरी के लिए काम करूंगी।
    सवालः इस फील्ड में आने के बाद सभी एक तरह से काम करने लगते हैं आपका क्या मानना है?
    जवाबः हां ऐसा अक्सर होता है कि नौकरी लग जाने के बाद लोग वहां के माहौल में ढल जाते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि लोगों को मोटिवेशन नहीं मिलता, वे लगातार बस काम ही करते रहते हैं।
    सवालः इंजीनियरिंग कर चुकी हो, तुम्हे कोई भी जॉब मिल सकती है?
    जवाबः हां मिल सकती है, लेकिन मैं खुद के लिए नहीं लोगों के लिए काम करना चाहती हूं। सोचती हूं कि मेरे साथ-साथ दूसरे भी आगे बढ़ें।
    अब पढ़ें अंकिता ने आगे क्या बताया
    -मैं पिछले चार सालों से एमपीपीएससी का एग्जाम दे रही हूं।
    -साल 2012 में मेरा सलेक्शन एक्साइज ऑफिसर के लिए हुआ, अभी भोपाल में पदस्थ हूं और उसी की ट्रेनिंग चल रही है।
    -साल 2013 में ट्रेजरी ऑफिसर से सलेक्शन हुआ, इसके बाद 2014 में सिलेक्ट नहीं हुई।
    -साल 2015 में मैं स्टेट लेवल टॉपर बन गई हूं, मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा।
    -मैं कई सालों से यूपीएससी की भी तैयारी कर रही हूं, और एक बार इंटरव्यू तक भी पहुंच चुकी हूं, लेकिन सिलेक्ट नहीं हो पाई। इन सबके बाद भी मैंने हार नहीं मानी और धैर्य बनाए रखा।
    -पेशेंस रखना बहुत जरूरी है इसके लिए आपको टाइम देना होगा और घरवालों का आप पर भरोसा होना भी बहुत जरूरी है।
    सोशल मीडिया से बना रखी थी दूरी
    -मैं हरिवंश राय साहब की लाइंस 'कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती' में काफी विश्वास करती हूं।
    -मैंने घड़ी देखकर कभी पढ़ाई नहीं की, अक्सर सिलेबस और मूड के हिसाब से पढ़ने बैठती हूं।
    -कभी सिर्फ 3 घंटों तक पढ़ाई करती थी, तो कभी 10-10 घंटों तक।
    -मुझे खुद पर भरोसा है कि जो गोल मैंने सोच रखा है उसे पूरा जरूर करूंगी।
    -इस दौरान मैंने सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी।
    फ्रैंड ने दी रिजल्ट की जानकारी
    -शाम को मैं घूमने के लिए बाहर निकली थी कि एक फ्रैंड का फोन आया।
    -उसने कहा रिजल्ट आया है और तू टॉपर है। पहले तो मुझे विश्वास नहीं हुआ लेकिन जब खुद आंखों से देखा तब यकीन आया।
    -जवाहर चौक स्थित सरस्वती नगर सरकारी क्वाटर्स में रहने वाली 27 वर्षीय अंकिता के पिता भारत भूषण त्रिपाठी, स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन में डीजीएम हैं। वहीं, मां कल्पना त्रिपाठी हाउसवाइफ हैं।
    -अंकिता की स्कूलिंग टीकगमढ़ से हुई और कम्प्यूटर साइंस में इंदौर से ग्रेजुएशन किया है।
    किसान का बेटा रहा दूसरे स्थान पर-
    शिवपुरी स्थित कोलारस गांव के एक किसान के बेटे ने एमपीपीएससी में 1060 अंक लाकर दूसरा स्थान हासिल किया है। गांव के गौड़ मोहल्ले में रहने वाले त्रिलोचन गौड़ ने दूसरे स्थान पर आकर डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल किया है। त्रिलोचन के सलेक्शन पर पिता सूर्यप्रकाश गौड़ ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि, मेरा बेटा पिछले तीन सालों से परीक्षा दे रहा था मुझे खुशी है कि उसकी मेहनत सफल हुई। पहले प्रयास में ही त्रिलोचन का चयन महिला सशक्तिकरण के पद पर हुआ था, दूसरे प्रयास में वह नायब तहसीलदार और तीसरे प्रयास में डीएसपी के पद पर चयनित हुआ है।
    सेकंड स्लाइड में पढ़ें डीएसपी के पद पर चयनित नेहा गौर का इंटरव्यू और आगे देखें अंकिता के फोटोज
  • अपने बड़े भाई अर्जुन और बहन के साथ नेहा गौर।
    सलेक्शन न होने पर रोती रहती थी, भाई ने बढ़ाया हौसला...
    नेहा गौर मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती है, पिता गुना में खेती-किसानी करते हैं। नेहा कहती हैं, 2013 अौर 2104 में भी एमपीपीएससी दी थी, लेकिन सलेक्शन अब जाकर हुअा। जब रिजल्ट में अपना नाम नहीं देखती थी, तो बहुत रोती थी। एेसे में बड़े भाई अर्जुन सिंह गौर मेरा हौसला बढ़ाते अौर कहते हैं, तुम तैयारी बिल्कुल मत छोड़ना क्योंकि सलेक्शन होगा जरूर। उनका मेरे ऊपर भरोसा सच साबित हुअा। रिजल्ट अाने के बाद मेरे परिवार में पूरी रात किसी को नींद नहीं अाई क्योंकि हमारे परिवार में इस पद तक कोई नहीं पहुंचा है। बीई (कंप्यूटर साइंस) में पढ़ाई करने के बाद एमटेक किया अौर फिर महिला एवं बाल विकास विभाग में बतौर सुपरवाइजर जॉब लगी। हायर एजुकेशन भी पूरी करना थी, इसलिए एमटेक के साथ-साथ तैयारी करती रही। एमपीपीएससी का बदला पैटर्न ही मेरी सफलता का मुख्य कारण रहा क्योंकि पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन अौर सोशियोलॉजी सब्जेक्ट्स के साथ काफी ज्यादा पढ़ना होता था। दूसरा, ग्रुप स्टडी काम अाई, जिसमें तीन-चार साथी मिलकर एक ही टॉपिक पर चर्चा करते, इसका फायदा यह होता कि सुनने, बोलने अौर लिखने की प्रैक्टिस होती है।
    आगे की स्लाइ्ड्स पर देखें अंकिता की तस्वीरें...
  • बेटी को मिठाई खिलाते हुए मां कल्पना।
  • अंकिता 4 सालों से एमपीपीएससी का एग्जाम दे रही है।
  • अंकिता ने कहा कि पेशेंस रखना बहुत जरूरी है।
  • इस एग्जाम में भोपाल की अंकिता त्रिपाठी ने 1066 नंबर के साथ टॉप किया हैं।
  • मां के साथ खुशी शेयर करती अंकिता।
  • एमपीपीएससी 2015 की टॉपर अंकिता त्रिपाठी।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: final result of MP PSC 2015 was announced on Wednesday night.
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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