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गरीब की मदद के लिए आगे आया NRI, खुद जुतकर 12 Km खींची थी बैलगाड़ी

वीरेंद्र जोशी/बद्रीलाल धाकड़ | Jan 09, 2017, 15:13 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

गरीब के मदद के लिए आगे आया एनआरआई समूह।

भोपाल/गुना। मध्य प्रदेश में गुना जिले के जामनेर में गुरुवार को बैल की मौत के बाद एक गरीब के गाड़ी खुद खींचने का मामला सामने आया था।dainikbhaskar.comपर खबर पढ़ने के बाद कनाडा में रहने वाले एनआरआई पेंशनरों का एक समूह उसकी मदद के लिए आगे आया है। वहीं, इंदौर के एक प्रसिद्ध कार्डियोलाजिस्ट ने भी उसकी मदद का प्रस्ताव भेजा है। ऐसे मिली मदद...
कनाडा में बना रखा है एक समूह
कनाडा में बसे मुख्तियार सिंह गिल ने शनिवार को भास्कर से संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि, dainikbhaskar.com पर मोहन की कहानी पढ़ी, तो उनके मन में उसकी मदद करने की बात आई। उनका कहना था कि कनाडा में रहने वाले कई भारतीय पेंशनरों ने एक समूह बना रखा है, जो इसी तरह के सामाजिक कार्य करते हैं। उन्होंने जामनेर में भी हमारे संवाददाता से चर्चा की और यह जानने की कोशिश की कि मोहन को किस तरह मदद भेजी जा सकती है। हालांकि रविवार को मोहन से संपर्क नहीं हो पाया, क्योंकि वह हाट बाजारों में छुई बेचने के लिए चला गया था।

मरीज के हाथों जामनेर पहुंचाएंगे मदद
इंदौर से प्रसिद्ध कार्डियोलाजिस्ट डॉ. विष्णु मंत्री ने मोहन और उसके परिवार की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। उन्होंने इंदौर के ही सामाजिक कार्यकर्ता महेश वाहेती के माध्यम से भास्कर से संपर्क किया। डॉ. मंत्री ने गुना में रहने वाले अपने एक मरीज के जरिए उक्त मदद जामनेर पहुंचाने का इंतजाम किया है। श्री वाहेती ने बताया कि डॉ. मंत्री इंदौर के लाल बाग के सामने 12 भाई पर एक क्लीनिक चलाते हैं, जिसमें वे गरीबों का लगभग निशुल्क उपचार करते हैं। प्रदेशभर से कई गरीब उनके क्लीनिक पर पहुंचते हैं।


यह था मामला...
- राघौगढ़ जिले के खिलचीपुर में मोहन बंजारा रहता है। वह कच्चे घरों में इस्तेमाल होने वाला छोटा-मोटा सामान बेचकर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करता है।
-इसके लिए उसे बैलगाड़ी से कई-कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। गुरुवार को जामनेर जाते वक्त उसका एक बैल रास्ते में ही मर गया था।
-शुक्रवार को कलेक्टर राजेश जैन ने dainikbhaskar.com पर यह खबर पढ़ी,तो उन्होंने मधुसूदनगढ़ के तहसीलदार सुनील वर्मा को तत्काल भेजा आैर मामला दिखवाया।
-शनिवार को जामनेर मंडी पहुंचकर नायब तहसीलदार अशोक प्रधान ने मोहन को बैल खरीदकर दिया।

बैल के इलाज में खर्च हो गए पूरे पैसे
-मोहन का एक बैल कुछ दिन से बीमार था। मोहन ऐसी दुविधा में था कि वह बैल का इलाज कराए या फिर उसे गाड़ी में जोतकर सामान बेचने जाए।
-इस गरीब के पास जितनी जमा पूंजी थी वह बैल के इलाज में लगा चुका था,फिर भी वह ठीक नहीं हुआ।
-मोहन गुरुवार को अपनी बैलगाड़ी से सामान बेचने गुना जिले के जामनेर जा रहा था,तभी रास्ते में उसके बैल ने दम तोड़ दिया।

बेटे को पल्लू से बांधकर पत्नी ने लगाया गाड़ी में धक्का
-मोहन के बैल की मौत हुई तब रात काफी हाे चुकी थी। मोहन के साथ उसकी पत्नी राधोबाई और डेढ़ साल का बेटा पप्पू भी था।
-मोहन को समझ नहीं आया कि वह सड़क पर रात कैसे गुजारे। न जाए तो सुबह खाने का इंतजाम होना मुश्किल था।
-ऐसे में मोहन ने नम आंखों से अपने मरे बैल को वहीं छोड़ा और बैलगाड़ी में दूसरे बैल के साथ खुद ही जुतने का फैसला किया।
-इस दौरान मोहन की पत्नी ने अपने बेटे को साड़ी के पल्लू की झोली बनाकर उसमें कंधे से लटकाया और खुद भी गाड़ी में धक्का लगाने लगी।
-दोनों ने मिलकर 12 किलोमीटर तक गाड़ी खींची और सुबह जामनेर पहुंच गए।

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Web Title: NRI group came forward to help the poor man
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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