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बंदूक चलाने के शौकीन और ट्रेंड पायलट थे दवे, कुछ ऐसी थी उनकी लाइफ

dainikbhaskar.com | May 19, 2017, 09:46 IST

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अनिल दवे को आध्यात्म में गहरी रुचि थी।

भोपाल। केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल माधव दवे का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 61 साल के थे। गुरुवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के एम्स में एडमिट कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। दवे मध्य प्रदेश से राज्यसभा के मेंबर थे। दवे साहित्यकार और राजनीतिज्ञ के साथ ही एक ट्रेंड पायलट भी थे। पढ़ें पूरी खबर...

मोदी के करीबी माने जाते थे दवे
6 जुलाई 1959 को एमपी के बडनगर में जन्मे अनिल माधव दवे जुलाई 2016 में मोदी कैबिनेट में शामिल हुए थे। वे मध्यप्रदेश बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाते थे। मोदी के करीबी माने जाने वाले दवे पिछले कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान एमपी में इलेक्शन मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाल चुके थे। उमा भारती जब दिग्विजय सिंह को हराकर एमपी में सीएम बनी थीं, उस वक्त मैनेजमेंट का सारा काम दवे ने ही संभाल रखा था।
हवाई जहाज से की नर्मदा की परिक्रमा
साल वर्ष 2004 में दवे ने हवाई जहाज से नर्मदा की परिक्रमा की थी। नर्मदा की हवाई परिक्रमा करने के बाद दवे ने इस पर एक पुस्तक भी लिखी थी, जिसका शीर्षक 'अमरकंटक से अमरकंटक तक' था। 2006 में प्रकाशित हुई यह पुस्तक काफी लोकप्रिय हुई थी।
बंदूक चलाने के शौकीन थे दवे
नरेन्द्र मोदी की टीम के एक सशक्त साथी माने जाते रहे अनिल माधव दवे प्रतिभा के धनी थे। वे साहित्यकार और प्रोफेशनल पायलट तो थे ही साथ ही साथ उन्हें बंदूक चलाने का भी काफी शौक था। उनके पास 50 हजार रुपए कीमत की पुरानी पिस्टल और 20 हजार रुपए मूल्य की राइफल थी।
दवे के पिता रेलवे में थे
दवे की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे में कार्यरत पिता के साथ गुजरात के विभिन्न अंचलों में हुई थी। 1964 से रा.स्व. संघ के स्वयंसेवक बने इसके बाद इंदौर के गुजराती कॉलेज से एम कॉम किया। इस बीच वे छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। ग्राम्य अर्थव्यवस्था व प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले दवे जन अभियान परिषद् (स्वयंसेवी संगठनों के दर्शन और व्यवहार को क्रियारूप देने का प्रयास करने वाली मप्र की संस्था) के रचनाकार रहे हैं।
अपने घर का नाम रखा 'नदी का घर'
अनिल दवे ने नर्मदा नदी के लेकर एक बड़ी मुहिम चलाई थी। नदी और पर्यावरण से उनका लगाव ऐसा था कि उन्होंने भोपाल स्थित अपने घर का नाम भी 'नदी का घर' रख दिया। उनका घर अब एक संग्राहलय का रूप ले चुका है। दवे ने शादी नहीं की थी। वे चुनाव प्रबंधन में महारथी थे।

दवे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा पर अच्छी पकड़ थी, इन भाषाओं में उन्होंने कुछ किताबें भी लिखी...
-सृजन से विसर्जन तक
-नर्मदा समग्र
-शताब्दी के पांच काले पन्ने (सन् 1900 से सन् 2000)
-संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से
-महानायक चंद्रशेखर आजाद
-रोटी और कमल की कहानी
-समग्र ग्रामविकास
-अमरकंटक से अमरकंटक तक
-Beyond Copenhagen
-Yes I Can, So Can We
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Web Title: Union Minister Anil Madhav Dave passes away
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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