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समाधि से 7 दिन पहले जैन मुनि ने छोड़ा भोजन, साध्वियों ने ऐसे लगाई परिक्रमा

dainikbhaskar.com | Dec 05, 2016, 07:55 AM IST

जैन मुनि विश्वअरुचि सागर, समाधि लेने के 7 दिन पहले छोड़ा भोजन

ग्वालियर। 78 साल के इस जैन मुनि को एक हफ्ते पहले अपनी जिंदगी के बारे में अहसास होने लगा था और इसी कारण उन्होंने 22 नवंबर के भोजन छोड़कर व्रत (संलेखना) ले लिया। सोमवार को उन्होंने समाधि ले ली। समाधि के बाद उनकी अंतिम यात्रा पूरे शहर में निकली और अंतिम संस्कार के समय जैन साध्वी और मुनियों ने उनकी चिता की परिक्रमा लगाकर अंतिम विदाई दी। ऐसे हुआ अंतिम संस्कार...

-जैन मुनि विश्वअरुचि सागर का भिंड में सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया। मुनि विश्वअरुचि को एक हफ्ते अपनी मौत का अहसास होने लगा था।
-इसी कारण उन्होंने 22 नवंबर से व्रत धारण कर लिया, यानि भोजन लेना बंद कर दिया। जैन समाज में इसे संलेखना कहते हैं।
-सोमवार को मुनि विश्वअरुचि हमेशा के लिए समाधि में चले गए। इसके बाद जैन समुदाय ने उनकी अंतिम यात्रा डोल सजाकर पूरे शहर निकाली।
चिता के चारों ओर लगाई परिक्रमा
-इसके बाद अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान से किया गया। उनकी चिता को सजाया और पहले जैन मुनियों ने चिता की परिक्रमा लगाई और जैन साध्वी चिता के चारों ओर घूमीं और मुनि को अंतिम विदाई दी।

मुनि बनने से पहले थे नेमीचंद
-मुनि विश्वअरुचि सांसरिक जीवन त्यागने से पहले नेमीचंद जैन थे और भिंड के ही रौन के निवासी थे। पांचवी तक पढ़े नेमीचंद जैन ने आचार्य विवेक सागर से दीक्षा ली थी।
-इसके बाद वे विश्वअरुचि सागर के नाम से जाने गए और 78 साल की उम्र में उनका देहांत हुआ।
स्लाइड्स में देखिए जैन मुनि के अंतिम संस्कार के फोटोज...
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Web Title: jain muni given up food 7 days before, sadhvi moving around died body
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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