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रंभा-मेनका में छिड़ी जंग, इन्होंने किया विवाद का अंत, इंद्र ने भेंट किया सिंहासन

Parag Natu | Dec 11, 2012, 11:35 AM IST

रंभा-मेनका में छिड़ी जंग, इन्होंने किया विवाद का अंत, इंद्र ने भेंट किया सिंहासन

इंदौर। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में देश के सबसे प्राचीन शहर पर इस राजा का राज था। इन्हें ज्ञान, न्यायप्रियता और बहादुरी के लिए आज भी जाना जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार विक्रमादित्य उज्जैन पर शासन करने वाले परमार राजवंश के राजा गंधर्वसेन के दूसरे पुत्र थे। गंधर्वसेन के बड़े पुत्र राजा भर्तृहरि का जब अन्यान्य कारणों से राजपाट से मोहभंग हो गया, तो वे अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को सिंहासन सौंपकर वन में तपस्या के लिए चले गए थे।

(सम्राट विक्रमादित्य के जीवन से जुड़ी और भी बातें जानने के लिए आगे की तस्वीरों पर क्लिक करें)

PIX : सिंहासन में मौजूद थीं 32 पुतलियां, जो देती थीं हर सवाल का जवाब!

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Web Title: रंभा-मेनका में छिड़ी जंग, इन्होंने किया विवाद का अंत, इंद्र ने भेंट किया सिंहासन
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