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पहले ही हो गया था मौत का अहसास, वसीयत में लिखीं थी सिर्फ 4 बातें

dainikbhaskar.com | May 18, 2017, 20:26 IST

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अनिल माधव दवे की वसीयत।

इंदौर।केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे का गुरुवार को दिल्ली मे निधन हो गया। दवे ने पांच साल पहल ही अपनी वसीयत लिख दी थी। अपने लेटर पैड पर लिखी इस वसीयत में उन्होंने अंतिम संस्कार को लेकर चार बातें लिखी थीं, जिसमें उन्होंने अंतिम संस्कार की जगह बता दी थी।

23 जुलाई 2012 को लिख दी थी वसीयत, अंतिम संस्कार की बात
- अनिल माधव दवे ने 23 जुलाई 2012 को सांसद के अपने लेटर पैड पर अपनी वसीयत लिखी थी। यह वसीयत इंदौर में रहने वाले उनके छाेटे भाई अभय दवे के घर पर रखी थी। वसीयत में उन्होंने मुख्य रूप से अंतिम संस्कार को लेकर चार बिंदु लिखे थे।
- सबसे पहले उन्होंने लिखा था - संभव हो तो मेरा दाह संस्कार बाद्राभान में नदी महोत्सव वाले स्थान पर किया जाए।
- उत्तर क्रिया के रूप में केवल वैदिक कर्म ही हों। किसी भी प्रकार का दिखावा, आडंबर ना हो।
- मेरी स्मृति में कोई भी स्मारक, प्रतियोगिता, पुरुस्कार, प्रतिमा इत्यादि विषय कोई भी ना चलाए।

- जो मेरी स्मृति मे कुछ करना चाहते हैं। वे कृपया वृक्षों को लगाने अथवा संरक्षित कर बड़ा करने का कार्य करेंगे तो मुझे आनंद होगा। वैसे ही नदी, जलाशयाें के संरक्षण में अपनी सामर्थ्य अनुसार अधिकतम प्रयत्न भी किए जा सकते हैं। ऐसा करते हुए भी मेरे नाम के प्रयोग से बचेंगे।
- इसके नीचे तारीख लिखकर उन्होंने अपने साइन कर तारीख लिखी थी। इसके नीचे उन्होंने भाषा दोष के लिए क्षमा भी मांगी थी।

इंदौर में हुई थी बायपास सर्जरी
- अनिल दवे के पुराने साथी रमेश मेंदोला ने बताया कि अनिल जी स्वास्थ्य के प्रति काफी सजग थे। 1990 के दशक में इंदौर में उनकी बायपास सर्जरी हुई थी। उसके बाद वे और खुद का और ज्यादा ख्याल रखने लगे थे। कुछ समय पहले उन्हें निमोनिया हो गया था, लेकिन वे उससे उबर गए थे।

- उनके साथी हरिनारायण यादव ने बताया कि दवे आध्यात्मिक व्यक्ति थे। वे ध्यान और साधना भी करते थे। संभवत: उन्हें अहसास हो गया था, इसलिए उन्होंने पांच साल पहले ही वसीयत लिख दी थी।

कैसा रहा राजनीतिक करियर?
- उज्जैन के बड़नगर में जन्मे अनिल दवे के राजनीतिक जीवन की शुरुआत गुजराती काॅमर्स कॉलेज से हुई। 1980 में स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में उन्होंने उस समय के लोकप्रिय छात्र नेता पंकज संघवी को 86 वोट से हराया था।

- पंकज बताते हैं कि वे इतना अच्छा भाषण देते थे कि उनका भाषण सुनकर लोगों का मन बदल जाता है। कॉलेज के बाद उन्होंने भाजपा नेता आलोक डाबर के साथ मिलकर एक साॅफ्ट ड्रिंक्स कंपनी खोली थी। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक बने। बीजेपी को मध्य प्रदेश की सत्ता में वापस लाने में अनिल दवे का भी अहम योगदान रहा।
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Web Title: wil of anil madav dave minister indore mp
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