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जहां होती है सीटियों में बातचीत

BBC Hindi | Feb 17, 2013, 00:45 AM IST

फाइल फोटो

घाटी वालो इलाकों में सीटियों की ये भाषा वाकई लाभदायक रही है

जरा सोचिए कि आप किसी पहाड़ी पर खड़े हैं और आपको घाटी के दूसरी तरफ किसी व्यक्ति से बात करनी है. कोई सड़क नहीं है, कोई मोबाइल फोन नहीं है. तो आप क्या करेंगे.

ऐसे में सीटी वाली भाषा काम आ सकती है जिसका चलन स्पेन के ला गोमेरा द्वीप पर किसी जमाने में खूब होता था. अब इस भाषा को फिर से बढ़ावा दिया जा रहा है.

ला गोमेरा अफ्रीकी तट के करीब पड़ने वाले स्पेनिश द्वीपों में से एक है. यहां भी अब बाकी दुनिया की तरह दौड़ती कारों की आवाजें सुनाई पड़ती हैं. लेकिन अगर आप यहां 50 या 60 साल पहले आते, तो हो सकता है कि सीटियां ही सीटियां सुनाई पड़तीं.

दरअसल यहां तब सिल्बो गोमेरो या कहिए गोमेरो की सीटी वाली भाषा का चलन आम था. सीटी की ये भाषा इस द्वीप पर रहने वाले लोगों के बीच बातचीत का एक तरीका रही है, और ये आवाजें दी मील की दूरी तक पहुंच सकती हैं.

अनूठी भाषा

इस द्वीप पर गहरी घाटियों में एक दूसरे तक अपनी बात या संदेश पहुंचाने का ये बिल्कुल बढ़िया तरीका था. लेकिन जब सड़कें बन गईं और लोगों के हाथों में मोबाइल फोन आ गए तो सिल्बो तेजी से सिमटने लगी.

अब इसमें फिर से जान फूंकी जा रही हैं. 1999 में इसे स्कूलों में एक अनिवार्य विषय बना दिया गया और तब से ये फिर चलन में आ गई है.

बीबीसी संवाददाता लौरा प्लिट को यहां के स्कूल में पहुंचने पर एक मधुर सीटी सुनाई पड़ी जिसका बाद में ये अर्थ पता चला, “सुबह के नौ बजे हैं और बच्चे कह रहे हैं सुप्रभात.”

स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाले लीनो रोद्रिगेज कहते हैं कि ये इतनी आसान भी नहीं है कि होठों को मिलाएं और बस फूंक दें. शुरू में, आपको अपने मुंह में ऊंगली डाल कर सीटी बजानी आनी चाहिए.

उनका कहना है, “शुरू में बच्चे चकरा जाते हैं क्योंकि वो सही से नहीं कर पाते हैं. लेकिन धीरे धीरे वो सीख जाते हैं और इसमें बात करने लग जाते हैं, फिर चकराते नहीं हैं.”

सिल्बो गोमेरो में स्पैनिश भाषा के वाक्यांशों के लिए खास ध्वनियां है. इसमें दो स्वर और चार व्यंजन होते हैं.

कोई नहीं जानता कि इस भाषा का जन्म कैसे हुआ लेकिन ज्यादातर संभावना इसी बात की है कि ये अफ्रीका से आई होगी.

सिल्बो को प्रोत्साहन

सिल्बो में विभिन्न ध्वनियों के सहारे अपनी बात पहुंचाई जाती है

इस द्वीप पर रहने वाले ज्यादातर लोग मानते हैं कि बच्चों को ये भाषा आनी चाहिए, भले ही अब मोबाइल फोन का जमाना हो.

लेकिन भाषा का बुनियादी मकसद खत्म हो गया है तो फिर इसे क्यों बनाए रखा जाए. पुरातत्वविद् खुआन कार्लोस हर्नांदेज मारेरो इसके कई कारण गिनाते हैं.

वो कहते हैं, “अगर सिल्बो काम करती रहेगी तो इससे हमें अलग पहचान मिलेगी. सिल्बो मेरे बच्चों को उनके दादा और पड़दादा से जोड़ती है. वो अपने अतीत से जुड़ते हैं. ये उन्हें उस पहले व्यक्ति से जोड़ती है जो इस द्वीप पर आया था. और इस संबंध को हमें बनाए रखना है.”

ला गोमेरा के पर्यटन बोर्ड में काम करने वाले फर्नेंदो मेंदेज जैसे लोग भी सिल्बो को बचाए रखने कोशिशों का समर्थन करते हैं.

उनके अनुसार, “पर्यटन उद्योग हमारी आमदनी का एक मुख्य स्रोत है. और सिल्बो का इसमें अहम योगदान है क्योंकि ये दिलचस्पी पैदा करती है. जो लोग इसे नहीं जानते और इसके बारे में सुनते हैं तो उन्हें बहुत हैरानी होती है.”

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Web Title: जहां होती है सीटियों में बातचीत
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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