चित्तौडग़ढ़ त्न संत आसाराम बापू ने कहा कि जीव-ब्रह्म का योग मुक्ति है। जब तक भगवत योग नहीं होता, तब तक जीव की वासना जड़ मूल से नष्ट नहीं हो सकती। परमात्मा की प्राप्ति के बिना दुख नहीं मिटता। वे रविवार रात्रि में द्वारिकाधाम में जीवन एवं मृत्यु का रहस्य विषय पर प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस शरीर को देख रहे हो, उसकी मृत्यु होती रहती है। शिशु से किशोर, युवा, बूढ़ा, बीमार एवं स्वस्थ, लेकिन शरीर की बदलती अवस्था को जानना ही जीवन है। जिस शरीर से आत्मा निकल जाती है वह मुर्दा कहलाता है। जिंदे -मुर्दे का भेद जानना ही साश्वत सत्य है। जिस प्रकार तारों में प्रवाहित बिजली दिखती...