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सिटी BLOGGERS

 
सब चारागरों को चारागरी से गुरेज़ था

By: Kishore Chaudhary

मैं जयपुर से जोधपुर के लिए रोडवेज की बस में यात्रा कर रहा था। गरम दिनों की रुत ने अपनी आमद दर्ज़ करवा दी थी। ये काफी उमस से भरा हुआ दिन था। शाम के सवा छह बजे चली बस से बाहर के...
 
हमेशा खास होती है रॉयल्स की जीत

By: दीया कुमारी

उस दिन का उत्साह खास था जब पहला आई पी एल राजस्थान रॉयल्स ने जीता था। मुझे याद है मैं और मेरे पति तब अमेरिका में थे। उस दौरान हम न्यूयॉर्क से फलोरिडा की लाइट में थे । जैसे ही...
 
मेरी वो छोटी सी मां

By: यास्मिन सिद्दीकी

मेरे टाइम टेबल का मुझसे ज्यादा ख्याल हमेशा वही तो रखती है। हैरानी की बात है मैं उससे एक शब्द नहीं बोलती लेकिन उसके स्कूल में क्या हुआ, उसे क्या पसंद है और क्या नहीं वो सब आकर...
 
पीढ़ियों की पीड़ा, आप भी सुनिए

By: L P Pant

प्रदेश में तीन लाख बेटियां अब तक पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुकीं 45 हजार बेटियों ने सिर्फ इसलिए पढाई छोड़ी क्योंकि स्कूल में टॉयलेट नहीं है स्कूल ड्रापआउट लिस्ट में देश में...
 
मानसिकता के बंदी, अंग्रेजों के नंदी

By: Navneet Gurjar

कौम को बांटना साहित्य का काम नहीं हो सकता। यह काम तो अंग्रेजों का था। जैसे हुगली के गंदे किनारे बैठे बूचड़ जिंदा कछुए के नरम अंगों को काट-काट कर तराजू पर तौलते हैं, वैसे ही...
 
शब्द मुस्कुराए सुबह फिर उगेगी नज्म

By: L P Pant

नरम-नाजुक सुबह धूप से ढक चुकी है। हवा और धूप में नहाए शब्द धीरे-धीरे अपने अनुभव, अपनी कहानी सुना रहे हैं। मौसम की तरह यहां गीत-कविता-कहानियां भी रंग बदल रही हैं। सुबह मखमली...
 
वे सपने देख रहे हैं या सपने छीन रहे हैं?

By: नवनीत गुर्जर

साहित्य में सपनों की बात होती है। होनी भी चाहिए। लेकिन अब साहित्य और सपनों के बीच भी नक्सली आने लगे हैं। कैसे? यह महाश्वेतादेवी ने बताया। शीर्ष साहित्यकार हैं। हो सकता है...
 
इस बार न्यू ईयर पर कुछ यह लें रेज्यूलेशन

By: यास्मिन सिद्दीकी

सुबह जल्दी नहीं उठ पाती लेकिन इस बार न्यू ईयर पर यही रेज्युलेशन है कि मैं सुबह जल्दी उठूंगी और एक घंटे मॉर्निंग वॉक पर जाऊंगी। वहीं कोई यह कहता मिलेगा कि मैं किसी भी जगह समय...
 
हम शर्मिंदा हैं, पर सरकार को कब शर्म आएगी

By: Giriraj Aggarwal

आज हम बहुत शर्मिंदा हैं। भाई, इसलिए कि अब रक्षाबंधन पर बहन से राखी बंधवाते समय उसकी कलाई कांप रही होगी और आंखें शर्म से झुकी हुई होंगी। मां, इसलिए शर्मिंदा है कि एक अरब से...
 
एक शहर के एकांत में

By: आलोक श्रीवास्तव

कोई किसी शहर में अकेला होता है। कुहरे में छिपी जाड़े की सुबह बताती है कि वह अकेला है, तभी कुहरे में से छनती धूप की कोमल आहट सुनाई पड़ती है। आसपास की छतों से पहले हलचल फिर एक शोर...
 
नहीं जो बादा-ओ-सागर

By: Kishore Chaudhary

वह एक उच्च प्राथमिक विद्यालय था. चारों तरफ हल्की भीगी हुई रेत के बीच तीन कमरों के रूप में खड़ा हुआ. सुबह के दस बजने को थे. विद्यालय भवन की चारदीवारी के भीतर कई सारे नीम के...
 
औषधि की जगह आग क्यों बन गया आरक्षण

By: रुकमा नंद शर्मा

गांधीजी के अहिंसक आंदोलन की बदौलत हमारा देश 1947 में अंग्रेजों की लगभग दो सौ साल की दासता से आजाद हुआ था। इसके साथ ही देश को अपना संविधान देने की कवायद भी शुरू हो गई थी। कई...
 
मुश्किल नहीं है गलती मान आगे बढ़ जाना

By: यास्मिन सिद्दीकी

मुंबई में एक फैशन शो के दौरान पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन ने जैसे ही अपने कदम रैंप पर बढ़ाए, उनका स्टाइलिश डिजाइनर काला गाउन सैंडल में उलझ गया। वह जरा भी नहीं घबराईं।...
 
मुश्किल नहीं है गलती मान आगे बढ़ जाना

By: यास्मिन सिद्दीकी

मुंबई में एक फैशन शो के दौरान पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन ने जैसे ही अपने कदम रैंप पर बढ़ाए, उनका स्टाइलिश डिजाइनर काला गाउन सैंडल में उलझ गया। वह जरा भी नहीं घबराईं।...
 
उस कुर्सी तक पहुंचने में पहुंच काम न आए

By: प्रेरणा बी साहनी

आपके चेहरे की सिलवटें गहरा रही हैं, पार्टी में जाने का आत्मविश्वास कुम्हला गया है। कुछ ही हफ्तों में कजिन की शादी है, पर वजन घटाए बगैर मेहमानों और रिश्तेदारों के बीच जाना...
 
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