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रसरंग 

 
बच्चों की परवरिश क्या आप अपने नन्हे बच्चों को अपने हाथ से खाना खिलाते हैं? क्या आप उन्हें उनकी खुराक या जरूरत से ज्यादा खाना खिला देते हैं? क्या आपके छोटे बच्चे आपके साथ एक ही पलंग पर सोते हैं? क्या उनके पास खेलने के लिए अच्छे (सुटेबल) खिलौने हैं? क्या आपके पास रबर का बना बाथटब है और उसी में आप अपने बच्चों को नहलाते हैं? क्या आप अपने गोद के बच्चे को डायपर पहनाते हैं और क्या डायपर बदलने की मेज आपके पास है? क्या आप उन्हें कभी जिद करने पर या किसी अन्य वजह से पीटते हैं? क्या आपने उन्हें...
 

कहानी

वही है! गाड़ी आने में अभी आध घंटा था। मालती को अपने आप पर क्रोध आने लगा। फिर वह समय से इतना पहले स्टेशन पर पहुंच गई थी। जब उसे कहीं जाना होता, घर में वह एड़ी न लगने...
 
 
 
 

सन्डे की पाठशाला

अंधे ने बोली से पहचाना भरतपुर के राजा यशवर्धन एक दिन पास के जंगल में शिकार करने के लिए अपने वजीर और सिपाही के साथ गए। शिकार की तलाश में तीनों एक दूसरे से बिछड़ गए। लिहाजा एक दूसरे की खोज में तीनों आगे बढ़े। कुछ आगे चलकर सिपाही को पेड़ के नीचे एक आदमी दिखा। सिपाही ने देखते ही उस आदमी की तरफ कदम बढ़ाए। वह आदमी दृष्टिहीन था। सिपाही ने उससे पूछा, ‘ए अंधे, तूने यहां से किसी को जाते हुए देखा।’ उस आदमी ने जवाब दिया, ‘नहीं, यहां से कोई नहीं गया है।’ सिपाही ने कहा, ‘ ठीक है।’ इधर-उधर देखने के बाद सिपाही आगे की ओर चल पड़ा। थोड़ी ही देर में ठीक उसी जगह पर वजीर बाकी दोनों को ढूंढता हुआ आया। वजीर ने उस नेत्रहीन आदमी से पूछा, ‘प्रज्ञावान जी, यहां से अभी कोई गुजरा है?’ उस आदमी ने जवाब दिया, ‘हां, यहां से कुछ देर पहले एक आदमी गया है।’ वजीर ने धन्यवाद कहा और आगे बढ़ गया। सिपाही और वजीर के जाने के बाद वहां उनको...
 
 
 
 

पाकिस्तान डायरी

फ़िरंगी चिश्ती बेगम और रहस्यमयी ख्वाब मझे साल भर किताबों की उस नुमाइश का इंतज़ार रहता है, जिसका आयोजन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस करता है। इंतज़ार की वजह यह है कि इसमें हिंदुस्तान के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की छापी हुई किताबें भी आती हैं। दोनों मुल्कों के दरमियान...
 

कविता

लोरी कानों में गूंजते हैं स्वह्रिश्वनल शब्द, मोहक तान बहुत कोशिश करती हूं दोहराने की वही सुर-ताल, वही गीत कि मेरी नन्ही गुड़िया भी जिसे सुनकर मधुर...
 
 

आपस की बात

किस्मत की हवा,' कभी नरम कभी गरम' नामुकम्मल दुनिया में कोई बात मुकम्मल साबित नहीं होती। ख़ुद इंसान इतना नामुकम्मल है कि उससे किसी कामिल कारनामे की उमीद करना ही बेकार है। हर बार इस...
 

आदाब अर्ज हैं

अब तो तेरा चेहरा भी मुझे याद नहीं स्मृति के संचित कोषों में महक रही फुलवारी तुम आओ ना आओ, आएगी याद तुम्हारी दूर-दूर तक ख़ुशबू फैली, लगे यहां पर मेले सिमट रहा जग सारा, हम तनहा रहे...
 
 
 
 
 
 
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ज्योतिष

 
राशिफल
अंक ज्योतिष
 
 
 


जोक्स

एक लड़का गर्लफ्रेंड को उसके घर के दरवाजे पर छोड़ा।

 
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