Dainik Bhaskar

आज जाने की जिद न करो..Sunday, March 07, 2010 11:46 [IST]

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अफ़सोस की बात है कि झिलमिल चांद-सितारों पे नजर गड़ाए हम लोग उन चांद-सितारों को रोशनी देने वाले सितारों की तरफ़ देखने की जहमत नहीं उठाते। ऐसे ही आपसे ओझल हुए सितारे हैं फ़ैयाज हाशमी। क्या कमाल की थी उनकी क़लम, देखिए.. आज की बात शुरू तो कर रहा हूं, लेकिन इस क़दर डरा हुआ हूं कि पूछिए मत। क्यों? ..बताता हूं। अब आज जिस हस्ती की बात करने के इरादे से मैं यहां आ बैठा हूं, वो एक बेहद अजीम और बाकमाल हस्ती...
 
 
Dainik Bhaskar

‘नसीमे सुबह ने पिचकारियां शबनम की खोली हैं’Sunday, February 28, 2010 10:24 [IST]

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होली मुबारक हो। सोचा था पहले बताऊंगा कि होली के दिन पार्टी ‘बदलकर भेस फ़क़ीरों का हम ग़ालिब / तमाशा-ए-अहले करम देखते हैं’ वाली मुद्रा में होते हैं। फिर सोचा कायको ऐसे हसीन मौक़े पर ऐसी बातें करना। जिनको करना है, वो तो अपने हाथ काले कर औरों के मुंह काले करने तो निकलेंगे ही। सो बस अपुन तो होली की ख़ूबसूरत बातों को ही याद करेंगे। बस! भारतीय समाज की ख़़ूबी यह है कि यहां के जीवन में क़दम-क़दम पर...
 
 
danik bhaskar

मैं ढूंढ़ता हूं जिनको..Sunday, February 14, 2010 23:10 [IST]

फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों के बारे में ज्यादातर लोग उनके नाम और काम के अलावा कम ही जानते हैं। संगीतकार श्यामजी घनश्यामजी का नाम पढ़कर ज्यादातर समझेंगे कि यह संगीतकार जोड़ी थी। जबकि हक़ीक़त में वे एक ही व्यक्ति थे.. स दुनिया में आप जरूर किसी न किसी ऐसे व्यक्ति को जानते होंगे, जिसकी कहानी बाक़ी जमाने को मालूम न होगी। हो सकता है आपको इस बात का दुख भी होता हो। याद कीजिए पिछली बार कब आपने...
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danik bhaskar

मुझको मेरे बाद.. जमाना ढूंढ़ेगाSunday, January 24, 2010 08:02 [IST]

फिल्म ‘संबंध’ (1968) के एक गीत के बहाने कवि प्रदीप ने एक बड़ा लाजवाब सवाल उठाया था- ‘तुम को तो करोड़ों साल हुए बतलाओ गगन गंभीर/ इस प्यारी-प्यारी दुनिया में क्यों अलग-अलग तक़दीर’ (आशा भोंसले/ओ.पी.नैयर)। यह सवाल इस आसमान से न जाने किस युग से, न जाने कितने लोग पूछते आए हैं। जवाब आज तक किसी को नहीं मिला। इसी कारण मैं इसे एक लाजवाब सवाल कहता हूं। और इसी वजह से मैं यह सवाल उठाने की बजाय सिर्फ़ अलग-अलग...
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यहां कोई किसी का यार नहींTuesday, January 19, 2010 01:26 [IST]

अपने-अपने फ़न के तीन महारथियों के संगम से बनी इस बेमिसाल तिकड़ी ने अपनी पहली ही फिल्म ‘संग्राम’ के गीतों से सुनने वालों का दिल जीत लिया। फिल्म संगीत जगत की यह तिकड़ी थी लाला-असर-सत्तार की, और उन्हें पहला मौक़ा दिया था संगीत के पारखी बाबूभाई मिस्त्री ने.. सन् 1963 में ‘पारसमणि’ के धमाकेदार संगीत के साथ फिल्मी परिदृश्य पर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के आगमन ने अनेक लोगों को संगीतकार बनने की...
saat-sawaal1
 
 
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‘..गीत अधूरे रह गए..’Sunday, January 10, 2010 10:44 [IST]

इस बार बहुत सोचने के बाद ऐसे संगीतकार से बात शुरू करने का मन बनाया, जिसकी कहानी में और भी कई संगीतकार आ जाते हैं। सो, एक श्रंखला-सी बन जाती है। इस संगीतकार का नाम है राम गांगुली। वही, राजकपूर की फिल्म ‘आग’ के बेमिसाल गीतों को सुरबद्ध करने वाले राम गांगुली.. जब घर में ढेर सारे बच्चे हों, तो कितना मज़ा आता है। ख़ूब मौज-मस्ती, उठा-पटक, धूम-धड़ाका और एक निश्छल आनंद। बल्कि आनंद ही आनंद। इसी...
RAM-GANGLY1
 
 
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‘..याद रखना सनम प्यार की दास्तां’Sunday, December 27, 2009 01:01 [IST]

लीजिए, देखते ही देखते 2009 भी अपने अंजाम को आ पहुंचा। इससे पहले 2008 बार भी ऐसा ही हो चुका है। मुझे मालूम है कि आप फौरन कहेंगे कि मियां ऐसा नहीं है। यह दुनिया इससे भी बहुत पुरानी है। बस इतना है कि हमने गिनती में अब तक सिर्फ़ इतने ही साल लिए हैं। बिल्कुल बजा फरमाया हुजूर। मुझे ख़ुद को भी यही दर्द सालता रहता है कि इस दुनिया के हर शुमारे में कहीं न कहीं बहुत सारी चींजें छूट जाती हैं। अब जैसे जरा...
Ustad11
 
 
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वाह मेरे मालिक वाह मेरे मौलाSunday, December 20, 2009 00:39 [IST]

जब-जब अकेले बैठ कर सोचता हूं, तो डर जाता हूं। कितने सारे लोगों का, कितना क़र्जा है मुझ पर। जिनको पढ़कर सीखा। जिनको देखकर सीखा। जिनकी संगत में सीखा। जिनको सुनकर सीखा। सीखा मतलब जीना सीखा। इन सब की वजह से इतनी मुश्किल जिंदगी भी अक्सर आसान हो गई। इन सब के ऋण से मुक्त होने को ही उन्हें बार-बार याद करता हूं। ऐसा ही एक क़र्जा मेरी जिंदगी पर बकाया है मन्ना दा का। यानी गायक मन्ना डे का। एक...
aapaskibaat11
 
 
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अजब दास्तां है मेरी जिंदगी की..Sunday, November 15, 2009 01:27 [IST]

एक सदी- यानी सौ बरस। कितने सारे होते हैं ये सौ बरस? इतने कि हम जिनसे मोहब्बत करते हैं उनकी लंबी उम्र की दुआएं मांगते हुए कहते हैं- ‘आप सौ साल जिएं’। इस दौर में भी कभी-कभार ऐसी दुआएं सच हो ही जाती हैं। इसी ख्याल से सोचता हूं, तो सोचता हूं आख़िर किसने मांगी होगी उमराव जान के लिए ऐसी दुआ। अब देखिए न उमराव जान की कहानी को सौ बरस के ऊपर हो चले हैं और यह अब तक न सिर्फ़ जिंदा है, बल्कि दिन-ब-दिन उस पर...
Umrao-Jaan
 
 
danik bhaskar

दोस्ती क्यों छुपाऊंThursday, October 01, 2009 01:23 [IST]

मुबंई.इन दिनों दीपिका के चेहरे पर ‘लव आज कल’ की सफलता की ख़ुशी साफ़ छलकती दिखाई दे रही है। अपनी पहली फ़िल्म ‘ओम शांति ओम’ के बाद यह दूसरी बड़ी हिट उनके हिस्से में आई है। हाल ही में लंदन में ‘हाउसफुल’ की शूटिंग से लौट कर वह फरहान अ़ख्तर की ‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’ को लेकर बिज़ी हो गईं। इसी के साथ उनका इंडोर्समैंट का काम भी तेज़ रफ्तार से चल रहा है। फ़िल्मसिटी स्टूडियो...

deepika1111
 
 

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