

दिल्ली शहर से कैसी-कैसी अजीब कहानियां जुड़ी हैं। वो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं। एक भूला-बिसरा फ़ारसी शेर याद आ रहा...
राय पिथौरा, तुग़लक, हुमायूं, बहादुर शाह जफ़र और शाहजहां की-दिल्ली जब भी लुटी फिर से आबाद हुई और जब भी आबाद-हुइ इसकी...
दिनों मैं दिल्ली में थी जब पाकिस्तान में औरतों और मर्दो पर तेजाब फेंकने के संगीन जुर्म के ख़िलाफ़ पार्लियामेंट और...
निहायत मसरूफ़ दिन दिल्ली में गुजरकर वापस कराची पहुंची तो यही ख़याल था कि वहां गुजरे हुए सुबहो-शाम का जिक्र रहेगा।...
पिछले दिनों एक टीवी चैनल पर हिंदुस्तान के बंटवारे के हवाले से मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की भविष्यवाणियों पर एक प्रोग्राम प्रसारित हुआ जिसका बड़ा चर्चा रहा। मौलाना आज़ाद ने सियासी तौर पर ही नहीं, अपनी श़िख्सयत और इल्मियत से भी लोगों को बेहद मुतास्सिर किया और उनकी ज़िंदगी को बदलकर रख दिया। आज मैं ऐसी श़िख्सयत के बारे में आपको बताऊंगी जो मौलाना से बहुत मुतास्सिर थी और जिसकी ज़िंदगी में...
b>पाकिस्तान डायरी किस्तान का नाम कभी इसलिए दुनिया के मीडिया में आकर्षण की वजह बनता है कि जिन दहशतगर्दो की तलाश में अमरीका की तमाम एजेंसियां बरसों से थीं, सीआईए आख़िर उसे हमारे यहां से ढूंढ निकालती है। हेलिकॉप्टरों में सवार होकर उस के फ़ौजी हमारे मुल्क में आते हैं, उसे क़त्ल करते हैं, संवेदनशील जानकारी से जुड़ी सामग्री समेटते हैं और उसकी लाश भी साथ ले जाते हैं। हमें अपने सूत्रों से...
पाकिस्तान क़ौमी असेंबली की स्पीकर फ़हमीदा मिर्ज़ा और हिंदुस्तान की लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, जो दोनों मिलकर पाकिस्तान और हिंदुस्तान के सवा डेढ़ अरब इंसानों की नुमाइंदगी करती हैं, पिछले दिनों ख़बरों में रहीं। लंच, हाई टी और डिनर की महफ़िलों में क़ौमी असेंबली के मेंबरों और शख्िसयात के ख़ुशी से दमकते चेहरे नज़र आते रहे। ये पाकिस्तान का वो नुमाइंदा और जम्हूरी चेहरा है जो हिंदुस्तान के...
जंग से जूझते शहरों की पहचान क्या सिर्फ़ यही है कि पच्चीसप चास मील की दूरी से दुश्मन की तोपें गरजती हों, मौतें उनकी सरहदों पर दस्तक देती हों और गोले उनके हाशियों पर आबाद बस्तियों को अपना निशाना बनाते हों? नहीं, कुछ जंगें शहरों के अंदर भी लड़ी जाती हैं। तोपों की धमक सुनाई नहीं देती लेकिन रात का हुस्न कलाश्निकोव और रिपीटर की तड़तड़ाहट से रेज़ा-रेज़ा हो जाता है।
सुबहदम उड़ान भरने वाले...
6 दिनों पहले हिंदुस्तान के व्यापार मंत्री आनंद शर्मा पाकिस्तान आए और हमारे वज़ीरे-तिजारत अमीन फ़हीम के साथ मुलाक़ातें कीं। उम्मीद हुई कि शायद दोनों मुल्कों के बीच वीज़ा की पाबंदियां भी कुछ नर्म होंगी। लेकिन कोई ठोस ख़ुशख़बरी अभी नहीं आई है। हम इसी को बड़ी बात समझ रहे हैं कि दोतरफ़ा तिजारत को बढ़ाने के लिए तीन समझौते हुए हैं। वाघा बॉर्डर पर एक ख़ास तिजारती चेक पोस्ट अप्रैल तक शुरू होने...
जनरल ज़ियाउल हक़ का ज़माना था जब कराची में कई बरसों से बंद पड़े ‘इंडिया हाउस’ के ताले खुले और यहां एक ऐसा हिंदुस्तानी काउंसिल जनरल आया जो कुछ ह़फ्तों के अंदर ही कराची और सिंध के लोगों की आंखों का तारा बन गया। ये वे लोग थे जो बरसों से हिंदुस्तान जाना चाहते थे लेकिन जाने की राह पर वीज़ा का देव पहरा देता था। सिंध हमारा ऐसा सूबा है जिसके थरपारकर, नगरपारकर, उमरकोट, शिकारपुर और जाने कितने ही...
रंगून में खींची गई एक तस्वीर है। बेनज़ीर भुट्टो की बेटी आसिफ़ा भुट्टो बर्मा की बेमिसाल रहनुमा ऑन्ग सान सू की को बेनज़ीर भुट्टो डेमोक्रेसी अवार्ड पहना रही हैं। पाकिस्तान के सदर आसिफ़ अली ज़रदारी और बिलावल भुट्टो भी इस सादे और गरिमामयी जलसे में मौजूद हैं, जो कुछ दिनों पहले 16 साल की लंबी क़ैद से आज़ाद हुई दुनिया भर में मशहूर रहनुमा के घर पर हुआ। इस तस्वीर को देखकर डेढ़ सौ बरस के इतिहास के...
मझे साल भर किताबों की उस नुमाइश का इंतज़ार रहता है, जिसका आयोजन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस करता है। इंतज़ार की वजह यह है कि इसमें हिंदुस्तान के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
प्रेस की छापी हुई किताबें भी आती हैं। दोनों मुल्कों के दरमियान किताबों की आमदोऱफ्त पर ऐसी पाबंदी है जैसे वो बम के गोले हों जो किसी भी व़क्त फट जाएंगे। शायद इसलिए कि किताबें नए ख़यालात का ख़ज़ाना होती हैं और इस ख़ज़ाने से...
हमारे यहां इन दिनों उस लड़की का शोक मनाया जा रहा जो फ़रवरी 1995 में पैदा हुई और जनवरी 2012 में आख़िरी सांस लेकर सो गई। लाखों लोग उसके लिए यूं रोए जैसे वो उनके घर में पैदा हुई थी, उनकी गोद में खेली थी और गई तो उन्हें ग़रीब कर गई। वह बच्ची, जिसका नाम अरफ़ा करीम रंधावा था, जब पंजाब के छोटे-से गांव रामदीवाली में द़ान की गई, तो उसे ज़मीन की गोद में उतारने के लिए हज़ारों लोगों का हुजूम था। इनमें वज़ीर और आला...