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कहानी

वह समय सुबह का था पर नंदू को उनके बड़े बेटे जग्गी और छोटे सत्तू ने इतने सख्त लहजे में धमकाया कि झोपड़े के आसपास का...

मेरी उंगली थामे अंदर जाकर दाहिने मुड़ीं और-एक सीट पर बैठ गईं। मैं उनकी बगल वाली-सीट पर बैठा था कि अचानक सामने के...

फुर्सत

पास बीस रुपए का एक नोट और बहुत साराखुदरा समय था। साइकिल चलाते हुए एक खालीजगह देखकर मैंने शर्ट की बाईं जेब दाहिने...

व्यस्त ब्रोकर का प्रेम

र्वे मैक्सवेल नामक ब्रोकर के यहां गोपनीय क्लर्क के रूप में काम करने वाले पिचर के चेहरे पर यूं तो कोई भाव पकड़ पाना...
 

26 नवंबर 2008

उस उमस भरे दिन का पसीना भी नहीं सूखा था कि शाम हो गई। लग नहीं रहा था कि कुछ होने वाला है। एक ऐसा दिन जब आप इंतजार करते...

बूढ़ा जो शायद कभी था ही नहीं

लोग इस बात में पूरी तरह से यकीन करने लगे थे। उनका मानना था कि बूढ़े होने की वजह से बूढ़े में कुछ ऐसी आसमानी ताकतें आ...
 

और खबरें

 
 
 

  • March 11, 01:03
     
    आम धारणा के मुताबिक जहां तमाम तरह के अनैतिक कृत्यों का ठीकरा बड़ी आसानी से गरीबों के सिर पर फोड़ दिया जाता है, वहीं एक ताजा शोध का मानना है कि अपेक्षाकृत अमीर और समृद्घ लोगों के अनैतिक आचरण अपनाने की संभावना कहीं अधिक होती है। अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक उनका यह आचरण आमतौर पर लालच से प्रेरित होता है। शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष सैन फ्रांसिस्को...
     

  • February 21, 03:43
     
    पहाड़ पर कहीं बर्फ गिरी थी। पूस की ठंडक वाला कुहरे में लिपटा दिन शुरू ही हुआ था। बत्तीयों की रोशनी कुहरे में कांप रही थी। पूरा माहौल कंबल में मुंह छुपाए ऊंघता-सा। कुछ सबेरे के मफलर-कोट से लैस भ्रमणार्थी, कुछ कुत्तों की चेन थामे। चाय की गुमटी से उठता धुआं। बरामदे में बेंच पर बैठे दो-तीन मरीज। वह भी जाकर दूसरी तरफ बैठ गई। बंद खिड़की कुछ देर बाद खुल गई। डॉक्टर आकर कुर्सी पर बैठ गए। चेहरे...
     

  • February 7, 04:59
     
    गाड़ी आने में अभी आध घंटा था। मालती को अपने आप पर क्रोध आने लगा। फिर वह समय से इतना पहले स्टेशन पर पहुंच गई थी। जब उसे कहीं जाना होता, घर में वह एड़ी न लगने देती। हमेशा आध-पौन घंटा पहले ही स्टेशन पर पहुंच जाती। और यूं जब वह बोर होने लगती, हमेशा दिल ही दिल में फै़सला करती कि अगली बार वक्त पर आएगी। ज्यादा से ज्यादा पांच-दस मिनट पहले। लेकिन फिर जब उसे सफ़र करना होता, स्टेशन पर पहुंचकर उसे पता...
     

  • January 31, 05:08
     
    स्टेला को हेनरी एक निहायत मामूली शख्सियत वाला लड़का लगता था। नाकाबिले-गौर और रूखा..। और हेनरी मानो उस पर फ़िदा था। उसकी हेनरी से पहली मुलाक़ात बहुत आपाधापी में हुई थी। उसने एक शाम दमे की मरीज अपनी बूढ़ी मां को शॉपिंग के लिए सन बैंड्स पर बुला तो लिया था, लेकिन खुद ऑफिस के काम में फंस जाने के कारण देर तक निकल नहीं पाई थी। जब हाथ का काम उल्टासीधा निपटाकर वह भागती-दौड़ती उधर पहुंची तो उसने...
     

  • January 23, 12:17
     
    ऊंची इमारतों व सड़कों पर जगमगाती लाइटों की शोभा निराली थी। नागर सक्यता अपनी पराकाष्ठा पर थी। राजपती ने अधलेटी अवस्था में ही हाथ बढ़ाकर पानी का गिलास पकड़ने का प्रयास किया। इस उपक्रम में वह सफल नहीं हुई। गिलास फिसलकर भूलुंठित हो गया। जल की धारा कई भागों में विभत होकर बिस्तर के गद्दे, तकिए और फर्श पर बिखर गई। ह्रश्वयास बुझाने की चिंता से अधिक कुछ कड़वा- कसैला श्रवण करने की आशंका...
     

  • January 21, 12:18
     
    बह की महक मेरे आसपास तितली की तरह उड़ने लगी और रोज की तरह मेरी पलकों पर आकर बैठ गई। भांति-भांति के वेश धरती है वो मुझे जगाने को, जैसे मैं कोई राजकुमारी हूं। भीगे गुलाब की पत्तियों से मेरी पलकों को छूती है और मैं मुस्कराती हुई उठ बैठती हूं। मेरी आंखें खुलते ही वो पूरी धरती पर बिखर नाचने लगती है। मेरे आसपास तरह-तरह के तमाशे करती है। मेरी खिड़की से झांकती है। उसके शीशों पर बैठ गुनगुनाने...
     

  • December 27, 01:40
     
    श भर में लोकपाल की लहर चल रही हो तब मैं नीरो की तरह अपनी बांसुरी बजाने का गुनहगार नहीं होना चाहता। सो आज की बात उसी से शुरू करते हैं। अन्ना हÊारे की बात करते हैं। बरसों पहले शरद जोशी ने अपनी एक अद्भुत व्यंग्य कथा ‘एक शंख बिन क़ुतुबनुमा’ में एक ऐसे पात्र की रचना की थी जो हाथ में शंख लिए हुए उनके पास आता है और पूछता है कि उत्तर दिशा किस तरफ़ है। पान की दुकान पर खड़े लेखक को भी कोई दिशा बोध...
     

  • November 6, 03:37
     
    और यहां से रूपमती रोज नर्मदा को देखती थी। उसके बाद ही वो अन्न जल लेती थी।’ समीर ने दूर इशारा करते हुए बताया। प्रिया ने देखा कि दूर धुंध और कुहासे में क्षितिज की सीमा रेखा पर नर्मदा की हल्कीझांई सी दिख रही है। वैसी ही जैसी कि गूगल अर्थसे देखने पर दिखाई देती है। समीर और प्रिया रूपमतीमहल के छत पर बने मंडप में बैठे हैं। पर्यटकों कीसंया कम होने के कारण छत पर शांति छाई हुई है। ‘और...
     

  • October 8, 12:11
     
    मैं शांत हो गया। हम दूर शाम की आरती होती देख रहे थे। दर्जन भर पंडित। हाथों में जलती मशालों के आकार की विशाल आरतियां। सभी के हाथ एक साथ, एक गति और एक लय में उठते और नीचे आते हुए। पृष्ठभूमि में मंत्रों का उच्चर। चारों तरफ हजारों सैलानियों से घिरे। बनारस के घाटों की आरती जितनी भी बार देखें, हर बार मन मोह लेती है। मेरे नजदीक बैठी इस आरती की तरह। वो काले वाले दिखाइए,’ आरती ने दुकानदार से...
     
 
 
 
 
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