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तेज रफ्तार का जानलेवा रोमांच

कुछ लोग खासकर युवा कंक्रीट की चिकनी सड़कों को आकाश, अपनी बाइक्स को रॉकेट और खुद को पायलट समझने की भूल कर बैठते हैं। रफ्तार का यह रोमांचक सफर कमोबेश अस्पताल के बिस्तर पर खत्म होता है और कई बार तो मौत की अंधी सुरंग में। रफ्तार से युवाओं को कुछ ज्यादा ही इश्क होता है। वहीं दूसरी ओर हेलमेट जैसे सुरक्षा उपाय अपनाना उनको सिर पर बोझ लादने जैसा मालूम होता है। शहर की भीड़ भरी सड़कों से थोड़ा अलग हाईवे उनको अपने इस शौक को पूरा करने का बेहतर जरिया लगते हैं लेकिन वहीं इन सड़कों पर भारी-भरकम वाहन भी चलते हैं। बस यहीं पर थोड़ी-सी चूक उम्र भर का पछतावा बन जाती है। आज यूथ के ज्यादातर...
 

तग़ाफ़ुल

यूं तुझे ढूंढने निकले के न आए ख़ुद भी वो मुसाफ़िर कि जो मंजिल थे बजाए ख़ुद भी लुत्फ़ तो जब है तअल्लुक़ में कि वो...

बचपन की वह अधूरी हसरत

मेरा कन्फेशन- गुलशन ग्रोवर शेक्सपियर ने कहा है कि दुनिया एक स्टेज है जहां हर कोई अपना किरदार निभाता है। मेरी...
 
 
 

केमिकल लोचा बनाता है गुस्सैल !

अपने कभी यह सोचा है कि आपके कुछ साथी औरों के मुकाबले अधिक गुस्सैल क्यों होते हैं? आपने कभी इस बात की तह में जाने की...

मुझे इक बोझ के साथ जीना होगा

कहते हैं एक कलाकार के जीवन में अगर दुख न हो तो उसकी कला में अपेक्षित धार नहीं आ पाती है। मेरे अब तक के जीवन की कहानी...
 
 

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  • August 7, 11:12
     
    हमारी जिंदगी तमाम तरह के खट्टे-मीठे अनुभवों से मिलकर बनती है। इनमें कई तरह की खुशियों के बीच कुछ रंज, कुछ अफसोस भी शामिल होते हैं। वे भी जिंदगी के ढेर सारे रंगों में से एक रंग ही हैं। मुझे बचपन से अफसोस रहा कि मेरे जीवन में कभी कोई ऐसा पुरुष नहीं रहा जिसका हाथ अपने सिर पर होने से मैं आश्वस्त महसूस कर सकूं। मुझे अपने जीवन में पिता और भाई की कमी हमेशा खली है, अब भी खलती है। मुझे उस कलाई की...
     

  • July 31, 12:05
     
    वैसे तो मेरा फलसफा आज में जीने का है और इसलिए मैं बुरी और पीछा करने वाली यादों को अपने दिल में जगह नहीं देता। हां, एक वाकया मुझे याद आता है। मैंने बचपन में अल्मोड़ा में अपने गांव में एक बाल पुस्तकालय खोल रखा था। उसमें भी मैंने अपनी रचनात्मकता दिखाई। अपने पुस्तकालय के लिए मैं हाथ से पोस्टर बनाकर यहां-वहां चिपका दिया करता था कि प्रसून बाल पुस्तकालय का रास्ता इधर से है। एक बार की बात...
     

  • July 3, 12:06
     
    यह मेरा पहला प्रेम था जो बाद में मेरी प्रेरणा भी बना। बात तब की है जब मेरी उम्र तकरीबन 14-15 साल की रही होगी। मैं 11वीं कक्षा में पढ़ा करती थी। उसी कॉलेज में 12वीं में एक लड़का पढ़ता था। वह मुझसे उम्र में तीन या चार साल बड़ा रहा होगा। हम अक्सर ही आते-जाते समय राह में टकरा जाया करते थे। वह पुराना समय था और हम दोनों ही स्वभाव से शर्मीले और संकोची थे। इन दिनों टीवी पर एक विज्ञापन आता था -...
     
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