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संडे की पाठशाला

सलीमपुर गांव में अधिकांश आबादी गरीब परिवारों की थी। इन्हीं परिवारों में से एक परिवार सोनू और उसकी विधवा मां का भी...

कष्णा नगर के दीनानाथ सेठ के कारोबार की तरह ही उनकी दरियादिली की ख्याति भी बहुत दूर-दूर तक फैली हुई थी। गर्मियों की...

दस लाख की अंगूठी

काफी समय पहले की बात है। देश के एक पूर्वोत्तर राज्य के धर्मपुरी गांव में एक बौद्ध धर्मगुरु रहा करते थे। एक दिन एक...

मूर्तिकार ने दी अद्भुत सीख

एक बार की बात है। शहर के एक नामचीन युवा कवि कर्मपुरा राज्य के प्रसिद्ध और सफल मूर्तिकार योगराज से मिलने गए।...
 

नमक की तरह घुलती बुराई

विनय ने एक दिन अपने घनिष्ठ मित्र को रात्रिभोज पर बुलाया था और वह स्वयं रसोई में खाना बनाने लगा। सब्जी को थोड़ा...

मकड़ी ने बचाई राजा की जान

संडे की पाठशाला मनगर के राजा रणविजय ने एक बार अपने प्रधानमंत्री को बुलाकर आज्ञा दी कि संसार में इस बात की खोज की...
 

और खबरें

 
 
 

  • March 5, 04:13
     
    बात उस समय की है जब देश नया-नया आजाद हुआ था और इसे हर लिहाज से आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की भावना हर देशवासी में कूट- कूट कर भरी थी। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी देश को औद्योगिक राष्ट्रों की अग्रपंक्ति में लाने के लिए लगातार व्यग्र और प्रयासरत रहा करते थे। उन दिनों देश में तेल क्षेत्रों की खोज की जा रही थी और आखिरकार हमने रूस के साथ मिलकर अंकलेश्वर में तेल के कुछ कुएं...
     

  • February 27, 04:24
     
    एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन शहर का जायजा लेने निकले। रास्ते में एक जगह इमारत बन रही थी। वह कुछ देर रुक गए और निर्माण कार्य को गौर से देखने लगे। उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठाकर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। पत्थर बहुत ही भारी था, इतने मजदूरों से भी उठ नहीं पा रहा था। पास खड़ा ठेकेदार मजदूरों को पत्थर न उठा पाने के लिए डांट रहा था। वॉशिंगटन ने...
     

  • February 21, 03:24
     
    रायगढ़ का राजा बेहद न्यायप्रिय, दयालु और विनम्र था। उसके तीन बेटे थे। जब राजा बूढ़ा हुआ तो उसे किसी एक बेटे को राजगद्दी सौंपने का निर्णय करना था। उसने तीनों राजकुमारों को अपने पास बुलाया और कहा, ‘मैं आप तीनों को एक छोटा-सा काम सौंप रहा हूं। आप तीनों इस काम को अपने सर्वश्रेष्ठ तरीके से करने की कोशिश करें।’ राजकुमारों ने भी अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ करने का वादा किया। राजा ने...
     

  • February 13, 02:46
     
    रामनगर में सूखा पड़ा था और फसल मारी गई थी। सभी लोग पिछले साल के बचे हुए अनाज से काम चलाने के लिए विवश थे। इन लोगों में बासुकी नामक गरीब किसान भी शामिल था। उसके घर में जो अनाज था वह ज्यादा से ज्यादा 11 महीनों के लिए ही पर्याह्रश्वत था। उसकी चिंता बढ़ती जा रही थी। वह सोच रहा था कि साल के आखिरी महीने में वह अपने परिवार का भरण पोषण किस तरह करेगा। आखिर उसकी पत्नी की चिंता उससे देखी न गई। उसने...
     

  • February 6, 11:42
     
    भरतपुर के राजा यशवर्धन एक दिन पास के जंगल में शिकार करने के लिए अपने वजीर और सिपाही के साथ गए। शिकार की तलाश में तीनों एक दूसरे से बिछड़ गए। लिहाजा एक दूसरे की खोज में तीनों आगे बढ़े। कुछ आगे चलकर सिपाही को पेड़ के नीचे एक आदमी दिखा। सिपाही ने देखते ही उस आदमी की तरफ कदम बढ़ाए। वह आदमी दृष्टिहीन था। सिपाही ने उससे पूछा, ‘ए अंधे, तूने यहां से किसी को जाते हुए देखा।’ उस आदमी ने जवाब दिया,...
     

  • January 30, 05:02
     
    गोवद्र्घन सेठ ने अपना कारोबार शुरू करने के लिए मित्रों से बहुत बड़ी धनराशि उधार ले रखी थी। काफी पैसे कमा लेने के बाद वह सबका पैसा लौटाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सारा पैसा निकालकर घर पर रखा था। लेकिन देर रात किसी ने उनका सारा धन चोरी कर लिया। बहुत तलाश करने के बावजूद रुपए और चोर का पता न चल सका। परेशान गोवद्र्घन अपने खास मित्र अजीत के पास पहुंचे और उसे सारी बात बताई। सब कुछ सुनने के...
     

  • January 3, 09:46
     
    कई साल पहले चंदनापुर गांव में एक शैतान का खौफ था। वह साल में एक दिन आता और पूरे गांव में तबाही मचा देता। बचे हुए लोग अगले दिन किसी तरह नए जीवन की शुरुआत करते। कई वर्षों तक यह चलता रहा। आखिरकार ज्ञानप्रकाश नाम का एक युवा घूमते हुए उस गांव में पहुंचा। उसने गांववालों की परेशानी दूर करने की ठानी। उसने गांव वालों को समझाया और उनके साथ मिलकर ढेर सारे बांस एकत्रित किए और राक्षस के आने की...
     

  • December 27, 01:27
     
    मगढ़ के राजा सूर्यकेतु को एक बार अपनी प्रजा की परीक्षा लेने की सूझी। उन्होंने राज्य के सबसे व्यस्त मार्ग के बीचोबीच एक भारी चट्टान रखवा दी। सूर्यकेतु खुद छिपकर बैठ गए यह देखने के लिए कि रास्ते में रखी चट्टान देखकर राहगुजर क्या प्रतिक्रिया करते हैं। सुबह हुई और लोगों का आना-जाना शुरू हो गया। आते-जाते लोगों में आम जनता के अलावा कई बड़े व्यापारी भी शामिल थे। लोग आते, चट्टान के पास...
     

  • October 8, 12:07
     
    फिल्मी दुनिया में मुझे बहुत मान-सम्मान मिला है। यहां मेरे संवाद पटकथा और निर्देशन को भी खूब सराहा गया लेकिन मैं इस दुनिया का बाशिंदा अपने शौक से नहीं मजबूरी से बना। मेरा पहला प्यार अभी भी लिखना ही है। मैं यही चाहता हूं कि आने वाली पीढ़ियां मुझे लेखक के रूप में पहचानें। काश ऐसा हो पाए। मैंने ढेरों शॉर्ट स्टोरीज और नाटक लिखे हैं, लेकिन मैं उर्दू में लिखता था। इस काम से कोई खास इनकम...
     
 
 
 
 
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