शिव अमृत दूसरे के लिए छोड़ देते हैं, सारा विष अपने कंठ में धारण कर लेते हैं। ऐसे देवता ही हमारे आदर्श बन सकते हैं।
शक्ति ने संसार को ‘नम: शिवाय’ का मंत्र दिया, जिसका अर्थ है-जो कल्याणकारी है।
शिव को सहस्त्रमुखी यानी हज़ार मुंह वाला भी कहा गया है, लेकिन प्रमुखतया शिव पंचमुखी हैं। इन्हीं पांचों मुखों के ज़रिए शिव दुनिया को चलाते हैं।
पाकिस्तान में पोठोहार के ज़िला चकवाल में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है— कटासराज। इस मंदिर के साथ भगवान शिव से जुड़ी बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं।
यह महाशुभ व्रत फाल्गुन कृष्ण चतुदर्शी को मनाया जाता है।
शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर निम्न मंत्र का जाप करने से समस्त
 
दो भागों में विभाजित आदि शिवलिंग का अंतर ग्रहों एवं नक्षत्रों के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है और शिवरात्रि पर दोनों का ‘मिलन’ हो जाता है।
 
देवी पार्वती शिव की शक्ति हैं। शिव की अनाम शक्ति ही अलग-अलग नाम धारण करती है।