HomeSpotlightGanesh Utsav Ganesh Utsav

देश-दुनिया में गणॆशोत्सव

महाराष्ट्र में जोरशोर से मनाया जाने वाला यह उत्सव अब ग्लोबल हो गया है। सबसे पहले बात करते हैं गुजरात की। महाराष्ट्र के बगल में मौजूद इस प्रदेश के दो बड़े शहरों सूरत और बड़ौदा में इस पर्व की चकाचौंध देखते ही बनती है। यहां ४00 से भी ज्यादा पंडालों को सजाया जाता है। बड़ौदा तो एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के बतौर उभर रहा है, इसलिए शायद इस शहर को गुजरात का पुणो भी कहा जाने लगा है।

कोंकण क्षेत्र में इस महोत्सव का एक विशेष सांकेतिक महत्व है। इस क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने वाले लोग जिन्हें यहां चकरमानिस बोला जाता है, वे इस पर्व को मनाने के लिए अपने परिवार के पास जरूर लौटते हैं। परिवार के साथ मिठाइयां और पूजन उन्हें भौतिक और आध्यात्मिक सुख दोनों प्रदान करता है।

नारियल और सुपारी के पेड़ों से आच्छादित गोवा में यह उत्सव काफी परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। यहां के पंडालों को नारियल, सुपारी, आम्र पत्तों, फलों और फूलों से सजाया जाता है। लोगों का उत्साह चरम पर रहता है। नए कपड़ों और गहनों से सुसज्जित होकर लोग अपने दोस्तों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहां जाना कभी नहीं भूलते।

इंदौर के १२ फीट ऊंचे बड़े गणपति और पंचमुखी ओंकारेश्वर गणपति मंदिर मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध गणोश मंदिर हैं। गणोश उत्सव के दरम्यान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम और पूजा मध्यप्रदेश की खास विशेषताएं बताती हैं।

दक्षिण में मदुरैई स्थित मीनाक्षी मंदिर अपने गोपुर और मुकुन्नी गणॆश‌ के लिए बहुचर्चित रहा है। गणॆश‌ चतुर्थी के अवसर पर ४0 किलो चावल के मुक्कुनी से सिर्फ ३ मोदक बनाए जाते हैं। फिर इन तीनों को भगवान का प्रसाद मानकर बांटा जाता है। लोग वहां काफी बड़ी संख्या में इस पूजा में शरीक होते हैं।

केरल में ट्रिगत्र्तस्थापित की पूजा होती है जिसका मतलब होता है तीन फीट लंबा गणॆश‌। आंध्रप्रदेश में उत्सव के दौरान विजयवाड़ा केव मंदिर और भद्राचलम के गणॆश‌ मंदिर काफी चर्चा में रहते हैं। मेंगलूर का प्रसिद्ध शराउ गणपति मंदिर तो जीता जागता माना जाता है। यहां गणॆश‌ चतुर्थी के दिन कम से कम १,000 नारियल चढ़ाना जरूरी रहता है।

उड़ीसा के भुवनेश्वर में अजनानाथ गणॆश‌ काफी लोकप्रिय हैं। पश्चिम बंगाल के बादनगर के आठ हाथों वाले गणपति की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बिहार के रामगढ़ और मसई जगरनाथपुर गणपति मंदिर के लिए जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश में वाराणसी के धुंधिराज और प्रयाग के आंकार गणॆश‌ मंदिरां में इस दिन काफी भीड़ देखी जा सकती है।

राजस्थान के रणथंभौर किले में गणॆश‌ प्रतिमा का सिर्फ चेहरा ही देखा जा सकता है। बाकी सारा शरीर भूकंप की भंट चढ़ गया है। वहीं पर चार प्रसिद्ध गणॆश‌ स्तम्भों को भी देखा जा सकता है। हिमाचल प्रदेश के वैजनाथ में ६ हाथ वाले गणॆश‌ की एक खूबसूरत प्रतिमा है।

गणोशजी मानवता को खत्म करने वाले बुरे तत्वों से समाज को बचाने के लिए ही अवतरित हुए हैं। भारत के अलावा भगवान गणॆश‌ की महिमा विदेशों में भी खूब फल फूल रही है। जहां जहां हिंदू सभ्यता का पदार्पण हुआ है वहां वहां विदेशों में गणॆश‌जी विराजमान हैं। नेपाल, तिब्बत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, कम्पुचिया, इंडोनेशिया, जावा, बाली, चीन, जापान और मैक्सिको में गणॆश‌जी का डंका बज रहा है।