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गणॆश‌ चतुर्थी के रीति-रिवाज

त्योहार के पहले गणॆश‌भक्त मिट्टी से बनी गणॆश‌ प्रतिमा को औपचारिक तौर पर पूजा के लिए घर लाते हैं। घर पर लाते समय प्रतिमा के चेहरे को केसरिया कपड़े से ढंककर लाते हैं और रास्ते भर मंत्रोच्चर किया जाता है। इस दिन मीठे पकवानों का पूरा थाल तैयार किया जाता है। गणॆश‌जी को मोदक अतिप्रिय है, इसे बनाया जाता है।

सुबह काफी विस्तृत पूजा होती है। स्नान के बाद लोग भगवान गणॆश‌ के मंदिरों में जाते हैं और प्रार्थना करते हैं। इस दिन लड्डुओं का वितरण होता है और इसका सेवन भोजन के पहले होता है। मंदिरों और घरों में गणॆश‌जी की प्रतिमाओं पर दूध अर्पित किया जाता है। शाम को घर का कोई बुजुर्ग गणॆश‌जी के जन्म की कथा सुनाता है और आरती उतारी जाती है।

गणॆश‌ को चढ़ाए लड्डुओं का वितरण, उपवास और दावत भारत में गणॆश‌ चतुर्थी के रीति रिवाजों में प्रमुख हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि गणॆश‌ उनकी राह में आने वाले सारे संकट हरेंगे। गणॆश‌जी को चावल की खीर, मोदक, बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। उनकी प्रतिमा को डेढ़ दिन, 5, 7 या 10 दिन तक घरों में रखकर पानी में विसर्जित कर दिया जाता है।