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World AIDS Day World AIDS Day लॉस एंजिल्स. 25 साल पुराने खून के एक नमूने के आनुवांशिक विश्लेषण से एड्स वायरस के अफ्रीका से शुरू हुए सफर का एक नया रास्ता मिल गया है। यह विषाणु सबसे पहले 1960 के दशक में हैती में था और वहां से कुछ ही सालों में अमेरिका पहुंचा।
यह विश्लेषण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद वह खाली स्थान भर गया है जो लंबे समय से इस विषाणु के इतिहास को जानने के लिए बना हुआ था। अब तक सिर्फ यही जानकारी थी कि अफ्रीका में 1930 में यह विषाणु पैदा हुआ और 1981 में लॉस एंजिल्स में इसका पता चला लेकिन इसके बीच के सफर को लेकर केवल स्कैच कार्य ही हुआ था, कोई पुख्ता आधार नहीं था।
एक्वायर्ड इम्युनो डैफिशिएंसी सिंड्रोम के खोजकर्ताओं में से एक यूसीएलए के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. माइकल गॉटलीब का कहना है कि इस विश्लेषण से साफ हुआ है कि अमेरिका में इस विषाणु के आने के बारे में जो समय अब तक माना जाता था, उससे एक दशक पहले ही यह विषाणु अमेरिका में आ गया था। और, इसका भी सबूत मिल गया है कि यह विषाणु हैती से चलकर आया।
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की कार्यवाही में आज प्रकाशित हुए इस विश्लेषण में एचआईवी की एक वैरायटी सबटाइप बी पर फोकस किया गया है जो अफ्रीका के बाहर अधिकांश देशों में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला सबटाइप है।
इस अध्ययन से जुड़े सीनियर लेखक और जीवविज्ञानी माइकल वोरोबे ने मिआमी में 1982 और 1983 में लिए गए हैती के एड्स मरीजों के खून के नमूनों की जांच की। इसके बाद आधार के तौर पर मध्य अफ्रीका से लिए गए एड्स विषाणु के शुरुआती फॉर्म माने जाने वाले नमूनों का इस्तेमाल भी किया गया और पूरे अध्ययन के बाद यह नया विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
वोरोबे ने कहा है कि आंकड़ों के हिसाब से शोधकर्ताओं ने पाया है कि 99.7 प्रतिशत एचआईवी सबटाइप बी हैती में ही जन्मा है। टाइमलाइन के मुताबिक वोरोबे ने माना है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोंगो जिन्हें जायरे के नाम से जाना जाता था, उनके द्वारा ही यह विषाणु हैती लाया गया और फिर 1966 से 72 के बीच हैतियों के अमेरिका आने पर यह विषाणु यहां फैला।
इससे पहले शोधकर्ताओं के बीच यह बहस का मुद्दा था कि अमेरिका में यह विषाणु सीधे अफ्रीका से आया है या हैती से होता हुआ। वोरोबे ने कहा है कि इस अध्ययन से इस बहस का यह नतीजा निकल आया है कि विषाणु पहले हैती पहुंचा और फिर अमेरिका।