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World AIDS Day World AIDS Day मुंबई.
बेशक दुनिया भर में हर रोज एड्स जैसी भयानक बीमारी से हजारों लोग मर रहें हो लेकिन हाल ही में 9 देशों के लोंगो के साथ बातचीत करके किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि अंधिकांश लोग एड़स को घातक नहीं मानते और उनका विश्वास है कि इस बीमारी पर रोकथाम लगाई जा सकती है। यह सर्वे संयुक्त राष्ट्र, इंगलैंड, रूस, फ्रांस, चीन, भारत, मै़िक्सको, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में हुआ है जिसके तहत लगभग 4,510 लोंगो का साक्षात्कार किया गया है । यह सर्वे मैक एड्स फंड द्वारा कराया गया था ।
क्या पाया गया सर्वे में>> इस सर्वे में पाया गया कि भारत में लगभग 59 प्रतिशत लोग ऐसे है जिनका मानना है कि एड्स से प्रभावित होने पर उस पर रोकथाम लगाना संभव है।
>> सर्वे में पाया गया कि लगभग आधे से अधिक लोग इस बात में विश्वास जताया कि अंधिकांश एचआईवी प्रभावित मरीज इलाज की सुविधा प्राप्त कर रहें है। जबकि सन् 2006 के आकड़ों में पाया गया था कि हर पांच एचआईवी प्रभावित मरीज में से केवल एक व्यक्ति का इलाज हो रहा है।
>> आधे से अधिक लोंगो का कहना था कि वे एचआईवी प्रभावित व्यक्ति के साथ चलना पसंद नहीं करेंगे , 52 प्रतिशत लोगों नें कहा कि वे ऐसे घर में रहना पसंद नहीं करेंगे जिसमें एचआईवी पीड़ित व्यक्ति रह रहा हो , और 79 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के साथ डेट पर जाना पसंद नहीं करेंगे ।
>> सवें में शामिल 73 प्रतिशत लोंगो ने एचआईवी के फैलाव के लिए महिलाओं को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि महिलाएं सुरक्षित सेक्स प्रेक्टिस पर बातचीत करने में अपने आपको असंतुलित पाती है जिसके कारण यह रोग फैलता है।
सर्वे की रिपोर्ट पर बोलते हुए आकलैंड की मेयर और एचआईवी एड्स कार्यक्रम की निदेशक डॉ मार्शा मार्टिन ने कहा कि लोंगो का यह कहना कि यह बिमारी जानलेवा नहीं है और इस पर नियंत्रण किया जा सकता है इस बात को प्रकट करता है कि हम लोंगो को पूरी तरह से शिक्षित करने में कामयाब नहीं हो सकें है।
एड़स को लेकर किए गए इस सर्वे पर आप अपनी राय हमें भेज सकते है :