HomeSpotlightWorld AIDS Day World AIDS Day

यूं फैला दुनिया में एड्स

मुंबई. एड्स को लेकर पूरी दुनिया में चिंता और भय का माहौल कायम हो चुका है। 1981 में पहचान में आने के बाद से आज तक दिन ब दिन इसके रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में जारी संयुक्तराष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार एचआईवी से प्रतिदिन 6,800 लोग सक्रमित हो रहें है तथा कम से कम 5,700 लोग एड्स के कारण मौत को गले लगा रहे है। एचआईवी पीड़ित व्यक्ति शारीरिक यंत्रणा के साथ साथ समाजिक और मानसिक यंत्रणा के दौर से गुजर रहें है। ऐसे कई कैस आएं है जिनमें एचआईवी पीड़ित व्यक्तियों ने तंग आकर अपनी जीवन लीला खुद ही समाप्त कर ली। एड्स का यह भयावह रूप किस तरह पूरी दुनिया में फैला यहां आईए देखें ..

1978
सबसे पहले 1978 में संयुक्त राज्य अमेरिका और स्वीडन के दो होमोसेक्सुअल व्यक्तियों में इस बीमारी के लक्षण देखे गए थे जिसका बाद में एड्स नाम पड़ा ।

वैसे ऐसा भी माना जाता है कि बीसवीं शताब्दी के तीसरे दशक में साइमन इम्यूनोडिफिशीयंसी वाइरस (एसआईवी) एप की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता था जो बाद में पूर्वी अफ्रीका में प्रभावित मीट के द्वारा मानव कोशिकाओं में आ गया था।

1981
>> अमेरिका के न्यूयार्क शहर में ऑठ होमो सेक्सुअल युवाओं में कोपसी सारकोमा त्वचा कैंसर के लक्षण देखे गए जो कि अंधिकांश तौर पर पौढ़ व्यक्तियों में होता है। वहीं ठीक दूसरी तरफ लांस एंजलिस में पांच लड़कों में न्यूमोनिया का ऐसे लक्षण देखे गए जो बहुत कम देखे गए थे। इन दानों घटनाओं ने अमेरिका के चिकित्सा जगत में एक चेतावनी की तरह काम किया और यह पाया गया कि यह बीमारी मानव के प्रतिरक्षा तंत्र को समाप्त कर देती है ।

1982
>> जुलाई माह में इस बीमारी को एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशीयंसी सिंड्रोम के नाम दिया गया ।

>> दिसंबर माह में 20 माह के एक बालक की मौत एड्स से जुड़े लक्षण के कारण हुई। इस लड़के को गल्ति से एड्स प्रभावित खून चढ़ा दिया गया था जिसके कारण उसकी मौत हो गई। यह इस बात का पहला प्रमाण था कि एड्स होमो सेक्सुअल के अलावा खून के आदान प्रदान से भी हो सकता है। इस घटना से पहले ऐसा समझा जाता था कि यह बीमारी केवल होमोसेक्सुअल संबध रखने वाले लोगों को ही होती है ।

1983
>> लॉक मांटगनिर के निर्देशन में पाश्चर इंस्टीटच्यूट फ्रांस के वैज्ञानिकों ने श्वेत रूधिरकणिकाओं को प्रभावित करने वाले वाइरस को आइसोलेटेड करने में सफलता प्राप्त की और इसे लिम्फएडेनोपैथी एसोसिएट वाइरस या एलएवी नाम दिया ।

>> इस साल एक यूरोप में एक अफ्रीकन में ऐसे लक्षण देखे गए जिनकें आधार पर इस बात के प्रमाण मिले जिनसे यह पता चला कि हेट्रोसेक्सुअल लोंगो में भी यह संक्रमणकारी है।

>> इस साल से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व स्तर पर इससे जुड़े मसलो पर निगरानी का काम शुरू कर दिया। अकेले अमेरिका में इस साल के अंत तक इस बीमारी से संक्रमित ३0६४ मामले सामने आ गए थे।

1984
>> अमेरिकी वैज्ञानिक रार्बट गैलो ने घोषणा कि की उनहोंने इस बिमारी के कारक वाइरस को अलग करने में सफलता प्राप्त कर ली है तथा उनहोंने इसे एचटीएलवी 3 नाम दिया है। लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि यह कारक एलएवी के समान ही है जो एक साल पहले खोजा गया था ।

1985
>> एड्स पर पहली बार अंतराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ।

>> हॉलीवुड फिल्म अभिनेता रॉक हडसन पहले ऐसे व्यक्ति लोकप्रिय व्यक्ति थे जिंनकी एड्स के कारण मौत हुई ।

>> एड्स के मामले अब तक विश्व के कई हिस्सों में सामने आने लगे थे। चीन में एड्स का पहला मामला भी इस साल सामने आया ।

1986
>> एड्स संचारित करने वाले कारक को आधिकारिक रूप से पहली बार हयूमन इम्यूनोडिफीसिंयसी वाइरस (एचआईवी)के नाम से पुकारा गया ।

1987
>> पहली एंटी एचआईवी ड्रग एजिडोवुडिन (एजेडटी) को प्रयोगों के बाद स्वीकृती प्रदान की गई हालाकि यह एचआईवी के फैलाव को रोकनें में सक्षम नहीं थी बल्कि उसके फैलने की रफ्तार को स्लो करने में सक्षम थी।

>> जांबिया के राष्ट्रपति केनेथ काउंडा ने इस बात की घोषणा की की उनकें पुत्र की मौत एड्स के सक्रमण के कारण हुई है । वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने इस बिमारी को जनता की दुश्मन नम्बर वन कहकर संबोधित किया था।

1988
>> रेंयान व्हाइट नाम के अमेरिकी युवा की मौत हुई थी जो एचआईवी हिमोफिलीक था जिसे इस बीमारी के कारण स्कूल से भी निकाल दिया गया था।

1991
Red ribbon>> क्वीन रॉक समूह के लीड सिंगर फ्रैडी मर्करी की मौत हुई ।

>> अमेरिका के बॉस्केट बाल स्टार इरविन मैजिक जॉनसन ने इस बात की घोषणा करके की वे एचआईवी पीड़ित है पूरी दुनिया को झकझोर दिया। इस घटना ने दुनिया में इस बात को भी बता दिया कि इस बीमारी से कोई भी पीड़ित हो सकता है।

>> रेड रिबन को एड्स जागरूकता अभियान के लिए अंतराष्ट्रीय चिन्ह घोषित किया गया है।

1992
>> टेनिस स्टार आर्थर एश ने बतलाया कि वे 7 साल पहले रक्त के स्थानान्तरण के दौरान इस वाइरस की चपेट में आ गए थे ।

1993
>> 1993 में देखा गया कि जो मरीज एजेडटी का इस्तेमाल लंबे समय से कर रह रहें है उनपर एजेडटी असरकारक नहीं रही क्योंकि इस ड्रग के प्रति वाइरस ने प्रतिरोधक क्षमता का विकास कर लिया है ।

1994
>> एक आश्चर्यजनक अध्ययन के दौरान पाया गया कि एजेडट एचआईवी प्रभावित मां से बच्चे में इस वाइरस के स्थानान्तरण में रोक लगाने में सफल है।

>> अमेरिका में सरकार ने पहली बार कंडोम के प्रमोशन के लिए मीडिया अभियान चलाया।

1995
>> विश्व स्वास्थ्य संघठन ने दस लाख से अधिक लोग एचआईवी प्रभावित होने की घोषणा की।

>> अमेरिकी राष्ट्रपति क्लिटन ने प्रेसीडेंटल एडवाइजरी कांउसिल ऑन एचआईवी एड्स का गठन किया।

>> 23फरवरी को ओलंपिक गोल्ड मेडल तैराक वाले ग्रेग लागनिस ने दुनियॉ को बताया कि वे एचआईवी से ग्रस्त है ।

1996
>> एचआईवी की दवा निर्माण के लिए न्यूर्याक का एक गैर सरकारी संगठन आईएवीआई ने तेजी लाने के लिए आगे आया ।

>>अब तक 90 प्रतिशत से अधिक एचआईवी प्रभावित लोग विकासशील देशों में ।

1997
>> अमेरिका में एड्स से मरने वाले लोगों की संख्या में पहली बार 1981 के बाद कमी देखी गई।

>> संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की घोषणा की कि ४0 लाख बच्चे २010क तक अपने माता पिता में से एक या फिर दोनों को एड्स से मौत होने के कारण ,खो चुके होंगे ।

1998
>> एचआईवी की दवा निर्माण के लिए पहला बड़ा अभियान फुल स्केल पर शुरू हुआ।

>> सब सहारा अफ्रीका में दो टीमों ने एचआईवी स्ट्रेन को टारगेट करते हुए खोज शुरू किया।

1999
>> एड्स अब तक विश्व में चौथी बड़ी बीमारी बन चुका था जिसके कारण सबसे अधिक मौते होना शुरू हो चुकी थी ।

>> 33 लाख लोग एड्स से प्रभावित हो चुके थे वहीं अब तक इस बीमारी से 14 लाख लोगों की मौत हो चुकी थी ।

2001

>> भारतीय कं पनी सिपला ने दवा मार्केट में एड्स की सस्ती दवा लांच कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को दवा के दामों में कमी लाने के लिए मजबूर कर दिया। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने दवा के दामों में कमी की ।

2003
>> इस साल अकेले 5 लाख से अधिक लोग एड्स प्रभावित हुए और लगभग 3 लाख लोग एड्स के कारण मारे गए। एक साल में एड्स से प्रभावित होने वाले लोगों की सख्यां 2003 में सर्वाधिक रही जब से इसे माहामारी घोषित किया गया है।

2004

>> एचआईवी फैलाव को राकने में वैजीनल क्रीम एक बड़े विकल्प के रूप में सामने आई। जानवरों पर किए गए शोध में 75 प्रतिशत मामलों में रोक लगाने में कामयाब रही ।

2005
>>विश्व भर में ४0 लाख लोग एड्स से प्रभावित हुए ।

>>अमेरिका के न्यूयार्क शहर में एचआईवी का एक ऐसा स्ट्रेने मिला जो एड्स की वृद्धि दर को कम करता था ।

2006

>> 5जून को एड्स के पहले मामले के प्रकाश में आने के 25 साल पूरे हुए ।

>> कांफ्रेस ऑन रेट्रोवाइरस एण्ड आपुरचुनेस्टिक इंफेक्शन (सीआरओआई )की के 13 वें सम्मेलन में दवा कंपनी मॉर्क और जिल्ड एक नई उच्च श्रेणी की दवा का डाटा प्रस्तुत किया।

>> विश्व स्वास्थ्य संगटन के अनुसार कई देशों में एचआईवी से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या में कमी आई।

2007
>> एचआईवी से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या जहां 2001 में 29 लाख थी वह 2007 में 33.2 लाख हो गइ।यूएनएड्स ने अपने 2006 के डाटा में संशोधन किया जिसके कारण प्रभावित लोगों की संख्या में कमी आई।

>> एड्स से मरने वाले लोगों की संख्या 2001 में जहां १.७ लाख थी वहीं 2007 में २.१ लाख तक पहुॅच गई।

>> ऐसा देखा गया है कि अभी तक ऐसे बहुत से ऐसे लोग है जो एचआईवी प्रभावित होने के बाद भी इस बात से अंजान है कि उनकों यह संक्रमण है ।

>> कंबोडिया,थाईलैंड और म्यामार में एचआईवी के फैलाव में कमी आई वहीं इंडोनेशिया और वियतनाम में इसका फैलाव बढ़ा है।



संबंधित खबरें
* एड्स को घातक नहीं मानते लोग:सर्वे
* एड्स वायरस कहां से चला? मालूम हुआ..
* गांधीगीरी के सहारे एड्स से जंग
* एड्स पीड़ितों को किया जा रहा है जिंदा दफन





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: