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World AIDS Day World AIDS Day जोधपुर. मारवाड़ में उगने वाली डेजर्ट एलोविरा (मीठा ग्वारपाठा) और मशरूम (खुम्बी) अब एड्स रोगियों के लिए फायदेमंद साबित होने लगी हैं। मानव कल्याण
संस्थान के निदेशक और सेवानिवृत्त चिकित्सा अधिकारी डॉ.गंगासिंह चौहान ने काजरी के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ.ए.पी.जैन के सहयोग से एलोविरा और मशरूम के कैप्सूल तैयार किए हैं। एड्स रोगियों पर इनका परीक्षण करने पर अभूतपूर्व और चौंकाने वाले सुधार नजर आए। सफलता से उत्साहित डॉ.चौहान ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस रिसर्च का दायरा बढ़ाते हुए एड्स रोगियों पर बड़े स्तर पर कैप्सूल से इलाज करना शुरू कर दिया है।
क्या हुआ फायदा : कैप्सूल से रोगियों के प्रमुख बायोलॉजिकल पैरामीटर्स न केवल थम गए, बल्कि उनका वजन भी बढ़ने लगा। सीडी टी कोशिका गणक में 61 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। 90 प्रतिशत रोगियों की सीडी कोशिका में बढ़ोतरी के साथ शारीरिक वजन में भी 9 से 10 किलो (प्रतिशत) बढ़ोतरी देखी गई। इसी तरह उनमें प्रथर ऐडेप्टोजन का खात्मा होना भी सामने आया।
फायदा दिखा, शोध जारी : राठौड़
डॉ.चौहान ने एड्स रोगियों पर किए इस शोध के बारे में हाल ही में डेजर्ट मेडिसिन रिसर्च सेंटर में पत्रवाचन किया। उन्होंने बताया कि एलोविरा और मशरूम के मिश्रण से तैयार इस कैप्सूल से एड्स रोगियों में काफी सुधार आया। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ने लगी। अभी इस पर रिसर्च जारी है। इसलिए रोगियों को मेडिसिन के साथ कैप्सूल दे रहे हैं।
गुणों की खान : जैन
डॉ.जैन ने बताया कि एलोविरा और मशरूम में आठ आवश्यक एमीनो एसिड, दस से बारह वसीय अम्ल और सभी आवश्यक विटामिन होते हैं। आधुनिक विज्ञान ने इनमें से कुल 200 तत्व खोज निकाले हैं, जो न केवल पोषक, बल्कि रोगोपचार में सहायक हैं। इसके प्रयोग से एड्स रोगियों में प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ती है। उनके रोग प्रतिरक्षात्मक सुरक्षा घेरा भी मजबूत होता है। महीने भर तक इन कैप्सूलों को लेने पर तीन-चार सौ रुपए खर्चा आता है। इसकाकोई साइड इफेक्ट भी अभी तक नजर नहीं आया है।
पहले चूर्ण, फिर कैप्सूल
पहले एलोविरा और मशरूम को मिलाकर एक चूर्ण तैयार किया गया। सादड़ी में एड्स रोगियों का इलाज करने वाली मानव कल्याण संस्थान ने कुछ एड्स रोगियों को यह चूर्ण दिया तो उनकी हालत में सुधार नजर आया। बाद में चूर्ण से कैप्सूल तैयार किए गए।