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जिंगल बेल जिंगल बेल जिंगल ऑल द वे..

treeजेम्स लॉर्ड पीरपांट का लिखा यह कैरोल भले ही क्रिसमस सांग न हो लेकिन क्रिसमस की दस्तक देने और लोगों त्योहार के खुमार में रगंने के लिए काफी है। कानों में जिंगल बेल सुनाई देते ही रोशनी और सजावट, क्रिसमस ट्री, लाल कपड़ों में बड़ी सी दाढ़ीवाला सांता क्लाज और चॉकलेट्स और गिफ्टस से भरा झोला खुद ब खुद जैसे आंखों के सामने आने लगता है।

क्रिसमस विश्वभर में मनाया जाने वाला त्योहार है। बच्चों के लिए मस्ती धूम और सांता से गिफ्ट चॉकलेट लेने का उत्सव, तो बड़ों के लिए मानवता, शांति और प्रेम का संदेश देने वाला पवित्र दिन क्रिसमस दिन-प्रतिदिन की भागदौड़ के बीच सुख-सुकून-समृद्धी देने वाला अनुमप दिन है। ट्विंकलिंग कैंडल लाइट्स, कलरफुर बेल्स, क्रिसमस ट्री, ग्लोइंग स्टार और उसके बीच पुडिंग और केक की लाजवाब खुशबू, क्रिसमस को खुशनुमा बनाने के लिए यह सब काफी है। 24 दिसंबर की रात से चर्च में प्रार्थन के साथ शुरु होने वाला क्रिसमस का सेलिब्रेशन मध्यरात्री में शबाब पर होता है। क्रिसमस धार्मिक और उत्सवी माहौल में एक दूसरे से मिलने जुलने और खुशियां बांटने की सौगात की तरह है।

क्रिसमस की कहानी

किसमस का उद्देश्य मनुष्य में आपसी प्रेम, हित और त्याग की भावना को कायम रखना है। ईशु का जन्म ही क्रिसमस की प्रेरणा का अद्भुत स्रोत रहा है जो शताब्दियों से लोगों में उत्सुकता जगाता आ रहा है। क्रिसमस मनाने के पहले यदि सृष्टि की उत्पत्ति पर ध्यान दें तो सारी बातें साफ हो जाएंगी। सबसे पहले सृष्टि की उत्पत्ति के दौरान ईश्वर ने पृथ्वी पर मनुष्य को इस नजरिये से अपने स्वरूप में रचा था कि वह शांति और सुकून से रहे और प्रेम से स्वयं और दुनिया का विकास करे और रचयिता का प्रतिनिधित्व करे। तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, नर-नारी करके मनुष्य की सृष्टि की और उनको आशीष दी और उसने कहा फूलो फलो, और पृथ्वी में भर जाओ और उसको अपने वश में कर लो और सब प्राणियों पर अधिकार रखो।

मनुष्य ने शैतान के छलावे में आकर अनआज्ञाकारिता के फलस्वरूप अपने आपको पाप में लिप्त कर लिया और परमेश्वर रचित स्वरूप को बिगाड़ लिया। इसके कारण वह श्रापित होकर मृत्यु का वरण करने को बाध्य हुआ। ऐसे ही मनुष्य के लगातार बिगड़ने के कारण ईश्वर ने देखा कि मनुष्य अपने स्वरूप को ही खो रहा है। नोहा (नूह) के काल में जीवन का संचार एक बार फिर हुआ यह महाजलप्रलय के बाद की गाथा थी लेकिन पुन: मनुष्य अपने स्वयं के सामथ्र्य और भ्रष्ट आचरण के फलस्वरूप रचयिता के अस्तित्व को नकारने लगा और अपने पापी जीवन में लगभग उसे भूल सा गया। यशायाह भविष्यवक्ता के समयकाल में एक बार फिर से जैसा कि सदैव से उसने चाहा कि मनुष्य नष्ट होने के बजाय अनंत जीवन पाए।

यशायाह ने भविष्यवाणी की -

हे दाउद के घराने, सुनो, इस कारण प्रभु आप ही तुमको एक चिह्न देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी। (यशायाह- 7:13-14)जोकि येरूसलेम के हेरोदेस राजा के समयकाल में पूरी हुई। कुंवारी मरियम ने बेतलहेम की एक चरागाह में मानव के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु को जन्म दिया। ज्योतिषियों ने इसकी जानकारी विशेष तारे के माध्यम से ब्रह्मांड में दिखने पर पाई। गड़रियों ने स्वर्गदूतों द्वारा इस मंगल समाचार को सुना।

लूका नामक पुस्तक दूसरा अध्याय में इस संदेश को मानवजाति तक पहुंचाने का वृत्तांत इस प्रकार दिया गया-

स्वर्गदूतों ने उनसे कहा- मत डरो, क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनंद का समाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिए होगा कि आज दाउद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है और यही मसीह प्रभु है। इस प्रकार सृष्टिकर्ता ने अपनी प्रतिज्ञा अनुसार एक बार फिर मानव जाति के उद्धार के लिए अपने स्वयं के पुत्र को मानव रूप में इस संसार में भेजा जिससे कि वह सबके पापों के लिए अपने आपको कुर्बान कर पाए व पुनरथ्थित हो मृत्यु पर विजय पाए।

यदि हम केवल इस मसीहा के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाते हैं तो शायद इस सांसारिक जीवन में सफल हों साथ ही यदि इस भेंटस्वरूप प्राप्त अपने उद्धारकर्ता को भी ग्रहण करें तो संसार के बाद स्वर्गीय अनंत जीवन के भी भागी हो सकते हैं। यूहन्ना की पुस्तक तीसरा अध्याय पद 16 संक्षिप्त बाइबल कहा जाता है- उसमें कहा गया है- क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया ताकि जो कोई उसपर विश्वास करे, वह नष्ट न हो परंतु अनंत जीवन पाए। इसी उद्धारकर्ता के जन्म को क्रिसमस के रूप में विभिन्न प्रकार से हषरेल्लास के साथ मनाया जाता है।

क्रिसमस-ट्री का इतिहास

ऐसा कहा जाता है कि इंग्लैंड के डेवनशायर काउंटी के क्रेटन नामक जगह के निवासी संत बोनीफेस ने क्रिसमस-ट्री लगाने एवं सजाने की शुरुआत सातवीं शताब्दी में की थी। उन्होंने त्रिएक परमेश्वर पिता, पुत्र, पवित्रात्मा की प्रतीकात्मकता दिखाने के लिए एक त्रिकोणीय लकड़ी को लोगों के सामने रखा। यह लकड़ी फर के वृक्ष की थी। 12वीं शताब्दी तक क्रिसमस-ट्री को छत से लटकाने का रिवाज था।