मुंबई. .. हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया। म्यूजिकल लाइटर और रफी की आवाज से सजे इस गीत का कमाल शायद ही कोई भूला हो। उस जमाने के स्टाइलिश हीरो देव आनंद की दोहरी भूमिका और एक देव आनंद बड़ी मूंछों वाला।
दिलीप कुमार की मुगल-ए-आजम और नया दौर के बाद बॉक्स ऑफिस पर छाप छोड़ने देव आनंद की फिल्म हम दोनों अब रंगीन की जा रही है और बहुत जल्द एक बार फिर यह बेहतरीन फिल्म नई पीढ़ी के दर्शकांे के लिए परदों पर टंगी होगी। खास बात यह है कि अपनी इस फिल्म के रंगीन होने को लेकर खुद देव आनंद काफी उत्साहित हैं।
40 साल बाद नए रूप में आने के लिए तैयार हो रही हम दोनों को लेकर देव आनंद का कहना है कि पुरानी नायाब फिल्मों को रंगीन करने का सिलसिला पुरानी पीढ़ी को तो आकर्षित करता ही है साथ में नई पीढ़ी को भी मौका देता है कि वह पुराने अनुभवों को अपने जमाने की तकनीक के जरिए महसूस करे। इस लिहाज से हम दोनों का रंगीन किया जाना वाकई काबिले तारीफ है।
रंगीन किए जाने के लिए हम दोनों के चयन से काफी खुश देव आनंद कह चुके हैं कि रंगीन मिजाज का रोमांस रंगों में और भी खूबसूरत दिखता है। हमें दुनिया को यह मौका जरूर देना चाहिए। हैदराबाद की गोल्डस्टोन टैक्नोलॉजीस द्वारा हम दोनों को रंगीन करने के लिए इजाजत लेने के बाद से ही देव आनंद काफी उत्साहित हैं।
इसके बाद भी देव आनंद कुछ फिल्मों को और रंगीन होता देखना चाहते हैं। रंगीन किए जाने के बारे में उनकी पसंद है काला बाजार, काला पानी, टैक्सी ड्राइवर और तेरे घर के सामने।
हम दोनों के बारे में :
1961 में रिलीज हुई देवआनंद, साधना, नंदा स्टारर हम दोनों बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी। इसमें देव आनंद ने कैप्टन आनंद और मेजर मनोहरलाल वर्मा की दो भूमिकाएं निभाई थीं। प्यार की कश्मकश और हालात की जद्दोजहद पर बनी इस बेमिसाल फिल्म का संगीत भी सुपरहिट साबित हुआ। मेजर के लाइटर की धुन तो उस दौर में एक क्रेज बन गई थी। गीतकार साहिर और संगीतकार जयदेव की जुगलबंदी कुछ ऐसी जमी कि अभी न जाओ छोड़कर, मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया जैसे अमर गीतों ने युवाओं का दिल जीत लिया। फिल्म का निर्माण देव आनंद की कंपनी नवकेतन के बैनर तले हुआ और इस फिल्म को निर्देशित किया था अमर जीत ने।