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ऐसे ही कोई सदाबहार नहीं हो जाता। सदाबहार होना प्रकृति का कोई नियम है भी तो बहुत दुर्लभ संदर्भो में। सदाबहार होना जिजीविषा और निरंतरता बने रहने के गुण को दर्शाता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो हार न मानना, कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन का सिद्धांत और हर सांस के आनंद को जीना सदाबहार होने का तरीका है और इस सलीके को किसी शख्सियत का नाम दिया जाए तो यकीनन सबसे पहले जुबान से निकलेगा देव आनंद। 26 सितंबर को देव साहब 84 साल पूरे कर रहे हैं। उनकी उम्र चेहरे पर भले ही दिखे लेकिन उम्र की थकान उनके जहन में बिल्कुल नहीं दिखती। आइंस्टीन ने एक बार बुढ़ापे की परिभाषा देते हुए कहा था बुढ़ापा उस अवस्था को कहते जब इंसान कुछ भी नया सीखने, करने का चाव छोड़ देता है। यानी देव साहब अगर कहते हैं कि वे अभी जवान हैं तो न सिर्फ इसे सच मानना चाहिए बल्कि इसकी सीख को भी अमल में लाना चाहिए..

[संपादन एवं संयोजन : भवेश दिलशाद]

एक और किताब की तैयारी में देव आनंद Devanand
पिछले दिनों अपनी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ लिख चुके देव आनंद अब एक और किताब लिखने की तैयारी में हैं क्योंकि उनके पास अभी कहने के लिए बहुत कुछ है। गुजरे जमाने के मशहूर अभिनेता ने कहा कि मैं अपनी किताब के बारे में लोगों की प्रतिक्रिया को लेकर बहुत उत्सुक और चिंतित हूं। अगर किताब पसंद नहीं की जाती है तो मैं एक और किताब लिखूंगा क्योंकि अब भी मेरे पास बताने के लिए बहुत कुछ है जो एक किताब में नहीं समेटा जा सकता। पढ़ें...
‘राज-दिलीप-देव’ तिकड़ी का ‘आनंद’
रुपहले परदे पर 50 का दशक बेहतरीन फिल्मों और संगीत के अलावा जिस खास पहलू के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है वह है तीन बेहतरीन अदाकारों की मौजूदगी और टक्कर। राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की इस तिकड़ी ने 20 साल से ज्यादा समय तक दर्शकों को तीन खेमों में बांटे रखा। पढ़ें...
अब रंगीन धुएं में उड़ेगी हर फिक्र Hum Dono
1961 में रिलीज हुई देवआनंद, साधना, नंदा स्टारर हम दोनों बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी। दिलीप कुमार की मुगल-ए-आजम और नया दौर के बाद बॉक्स ऑफिस पर छाप छोड़ने देव आनंद की फिल्म हम दोनों अब रंगीन की जा रही है और बहुत जल्द एक बार फिर यह बेहतरीन फिल्म नई पीढ़ी के दर्शकांे के लिए परदों पर टंगी होगी। खास बात यह है कि अपनी इस फिल्म के रंगीन होने को लेकर खुद देव आनंद काफी उत्साहित हैं। पढ़ें...
Hum Dono यूं चला जिंदगी का सफर :
अविभाजित पंजाब के गुरदासपुर में 1923 में जन्मे देव आनंद ने लाहौर कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में बीए करने के बाद अभिनय के शौक को पूरा करने के लिए बंबई की राह पकड़ी। बंबई आकर उन्हें मालूम हुआ कि रस्ता इतना आसान नहीं तो उन्होंने पहले मिल्रिटी सेंसर ऑफिस में 160 रुपए माहवार पर नौकरी पाई। पढ़ें...
देव आनंद एक शख्स कई अक्स : कुछ खास देव आनंद :
  • प्रेम पुजारी, हरे राम हरे कृष्ण, इश्क इश्क इश्क और देस-परदेस समेत 18 फिल्मों का निर्देशन।

  • कई सुपरहिट फिल्में देने वाले नवकेतन के बैनर तले अब तक 30 से ज्यादा फिल्मों का निर्माण।

  • नौ फिल्मों के लिए कहानियां लिखीं और वर्ष 2003 में लव एट टाइम्स स्क्वायर के लिए पटकथा के बाद 2005 में मिस्टर प्राइम मिनिस्टर के लिए गीत लिखे।

  • 100 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय।

देव आनंद और सुरैया के बीच प्रेम-प्रसंग न केवल चर्चित रहा बल्कि उनके बीच एक आत्मिक रिश्ता भी रहा। दोनों ने साथ में छह फिल्मों में काम किया। एक गीत की शूटिंग के दौरान सुरैया की नाव दुर्घटना की शिकार हुई और देव ने उन्हें डूबने से बचाया। कहा जाता है कि दोनों के प्रेम की शुरुआत यहीं से हुई लेकिन सुरैया की नानी ने उनकी शादी से इंकार कर दिया। प्रेम की गहराई यह थी कि फिर सुरैया ने जिंदगी भर शादी नहीं की।

  • देव आनंद उन कुछ फिल्मी शख्सियतों में हैं जो राजनीति के प्रति न केवल जागरूक रहे बल्कि सक्रिय भी रहे। इमरजेंसी के दौरान एक देव आनंद थे जिन्होंने फिल्मों से जुड़े व्यक्तित्वों की अगुवाई की और देश में आपातकाल घोषित किए जाने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विरोध में आवाज बुलंद की। एक तरफ फिल्म उद्योग के कुछ ही लोग यह हिम्मत कर रहे थे और दूसरी तरफ देव आनंद लगातार गांधी के खिलाफ अभियान चला रहे थे।
  • देव आनंद अपनी फिल्मों में सामाजिक संदर्भो से जुड़े ताजा विषयों को उठाने के लिए भी जाने जाते रहे। फिर चाहे वह, धर्म स्थलों की आड़ में पनप रहे अपराध पर आधारित हरे राम हरे कृष्ण हो या क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता से प्रेरित अव्वल नंबर, उनकी कई फिल्में अनछुए विषयों पर नए दृष्टिकोण को उजागर करती रहीं।
  • चार बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने वाले देव आनंद को 2000 में इंडो-अमेरिकन एसोसिएशन ने सिलिकन वैली, कैलिफोर्निया में स्टार ऑफ द मिलेनियम के सम्मान से नवाजा। इसके अलावा इसी साल तत्कालीन पहली अमेरिकी महिला हिलेरी क्लिंटन ने भी उन्हें सम्मानित किया।