इस दिन पूजा प्रात:काल से ही प्रारंभ हो जाती है। सर्वप्रथम स्नान करके देवी का विधिवत पूजन करके नवमीविद्धा दशमी में विसर्जन और नवरात्र का पारण करें। दोपहर के समय ईशान दिशा में शुद्ध भूमि पर चंदन, कुमकुम, पुष्प से अष्टदल क मल का निमार्ण करके संपूर्ण सामग्री जुटाकर अपराजित देवी को समर्पित करें इसी के साथ जया और विजया देवी का भी स्मरण कर उनका भी पूजन करें। इसके बाद शमी वृक्ष का पूजन किया जाता है, शमी वृक्ष के पास जाकर विधिपूर्वक सभी पूजा सामग्री को चढ़ाए तत्पश्चात शमी वृक्ष की जड़ों में मिट्टी को अर्पित करें। थोड़ी सी मिट्टी वृक्ष के पास से लेकर उसे किसी पवित्र स्थान पर रख दें। इस दिन शमी के कटे हुए पत्ते और डालियों की पूजा नहीं करनी चाहिए। रात्रि में देवी मां के मंदिर में जाकर दीपक जलाएं साथ ही पूरे घर में रोशनी रखें।