रामायण का न केवल भारत में बल्कि संपूर्ण विश्व में विशेष स्थान प्राप्त है। हिन्दु धर्म में विष्णु के 10 अवतारों में से एक अवतार भगवान श्री राम हैं। राम का जीवनकाल और उनके पराक्रम को महर्षि वाल्मिकि द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य रामायण में उल्लेखित किया गया है। रामचन्द्र एक आदर्श पुरूष हैं।
रामायण कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है। इसके 24,000 श्लोक हिन्दू स्मृति का वह अंग हैं जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी।
रामायण का समय त्रेतायुग का माना जाता है। भारतीय कालगणना के अनुसार समय को चार युगों में बाँटा गया है- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग एव कलियुग। एक कलियुग 4,32,000 वर्ष का, द्वापर 8,64,000 वर्ष का, त्रेता युग 12,96,000 वर्ष का तथा सतयुग 17,28,000 वर्ष का होता है। इस गणना के अनुसार रामायण का समय न्यूनतम 8,70,000 वर्ष (वर्तमान कलियुग के 5,250 वर्ष + बीते द्वापर युग के 8,64,000 वर्ष) सिद्ध होता है । बहुत से विद्वान इसका तात्पर्य इसा पू. 8000 से लगाते है जो आधारहीन है। अन्य विद्वान इसे इससे भी पुराना मानते हैं। कुछ भारतीय विद्वान कहते हैं कि यह 600 ईपू से पहले लिखा गया।