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आस्था को विज्ञान के तराजू पर न तौलें

मुंबई: भगवान राम का चरित्र परदे पर जीवंत करने वाले कलाकार अरुण गोविल का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम स्वयं के हित को हेय समझते थे। उनका व्यक्तित्व विलक्षण है। वे अत्यंत तेजस्वी, विद्वान, धैर्यशील एवं प्रतिभा सम्पन्न थे। उन्होंने स्वयं को एक समाजवादी के रूप में प्रस्तुत किया है। दशहरा के मौके पर संजीत कुमार से बातचीत करते हुए अपने विचार रखे रामानंद सागर द्वारा निर्देशित मशहूर धारावाहिक रामायण में भगवान राम का चरित्र परदे पर जीवंत करने वाले कलाकार अरुण गोविल ने..

आप भगवान राम के रूप में एक जीवंत छवि बन गए हैं। आप भगवान राम के प्रभाव को कितना महसूस करते हैं और आप कैसा अनुभव करते हैं?
जी हां, यह स्वाभाविक है कि जब आप किसी किरदार को निभाते हैं तो उस किरदार का कुछ न कुछ गुण आप स्वयं ग्रहण कर लेते हैं और मैंने भी रामायण में भगवान राम के किरदार को निभाया है इसलिए जाहिर है कि मुझ में भी उनके कुछ गुण जरूर आए हैं और मैं उससे प्रभावित भी हुआ हूं। मैं आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर हो गया हूं।

राम का किदार निभाने के दौरान घटी कोई यादगार पल या घटना के बारे में बताएं?
रामायण से जुड़े सारे पल यादगार हैं और इसमें बताने के लिए कुछ नहीं है। मेरे लिए यह एक जीवन भर का अनुभव है।

क्या आप मानते हैं कि राम नाम के ब्रांड से आपको फायदे के साथ-साथ नुकसान भी हुआ है?
जीवन कोई व्यापार नहीं है जिसमें आप फायदा और नुकसान सोच सकते हैं। इससे मुझे एक सम्मान और जो प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है वो ही हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। रामायण के बाद मैंने बहुत सारे धारावाहिक और फिल्मों में भी काम किया हैं जो दर्शकों को पसंद भी आया है।

इन दिनों रामसेतु का मुद्दा काफी गर्म है क्या आप राम के अस्त्वि पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं?
arun govilजी नहीं, भगवान राम में हमारी आस्था है और मैं राम को मानता हूं। यह अपने-अपने पर मानने की है। यह आपकी दृष्टि पर निर्भर करता है। आस्था को इतिहास और विज्ञान के तराजू पर नहीं तौलना चाहिए। दूसरे को यह साबित करने की जरूरत नहीं है भगवान राम थे या नहीं। हमें इस पर किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। राम एक आस्था और भाव है उसे साबित नहीं किया जा सकता है। यह मन का भाव है। भगवान को नहीं मानने वालों यह कहना गलत है कि रामसेतु का कोई अस्तित्व ही नहीं है। अपने विश्वास को साबित करने के दूसरे के विश्वास को ठेंस नहीं पहुंचा सकते। इस मुद्दे पर राजनीति करना ओछी बात होगी। मुद्दे पर राजनीति करें।

क्या आपने इससे पहले कभी या बचपन में रामलीला में भगवान राम या रामायण के किसी और किरदार को निभाया है?
नहीं, मैंने इससे पहले कभी ऐसा कोई किरदार नहीं निभाया है। हां यह जरूर है कि बचपन में मैं रामलीला देखने जाया करता था। लेकिन कभी रामलीला में भाग नहीं लिया।

आज रावण कौन है?
हम रावण खुद होते हैं। हमें अपने अंदर की बुराइयों को देखना चाहिए और उससे निपटने की कोशिश करनी चाहिए। रावण भी एक विद्वान पंडित था लेकिन घमंड, अहंकार जैसे प्रवृतियों के कारण ही वह मारा गया।

भास्कर के पाठकों के लिए दशहरा पर आपका संदेश...
दशहरा पर हमारी तरफ से सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। दशहरा अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व है इसलिए अपने अंदर के रावण को मारकर हमेशा न्याय की राह पर चलें तभी जीवन में सफल होंगे।

कुछ खास बातें:
अरुण गोविल एक भारतीय कलाकार हैं। इन्होंने रामानंद सागर द्वारा निर्देशित मशहूर धारावाहिक रामायण में राम का जीवंत किरदार निभाया। वे इसके अलावा विश्वामित्र में हरिशचंद्र और विक्रम और बैताल में विक्रमादित्य के किरदार में भी मशहूर हुए।





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