नई दिल्ली. विश्व अहिंसा दिवस के मौके पर शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से महात्मा गांधी को सम्मानित न किए जाने पर नोबेल फाउंडेशन ने अफसोस जाहिर किया है।
महात्मा गांधी के जीवनकाल में शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए उन्हें पांच बार नामांकित किया गया था लेकिन नॉर्वे की नोबेल समिति ने उनका नाम यह कहकर खारिज किया था कि उन्हें यह सम्मान दिया जाना इसलिए मुनासिब नहीं है क्योंकि वे न तो एक वास्तविक राजनेता हैं और न ही मानवीय राहत कार्यकर्ता।
लेकिन, अब स्वीडन में नोबेल फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक माइकल सोहलम ने कहा है कि उन्हें सम्मानित न किया जाना एक भूल थी। उन्होंने कहा कि हमने गांधी जैसे एक महान विद्वान को उपेक्षित किया और यह वाकई बहुत अफसोस की बात है।
सोहलम ने कहा कि मैं नोबेल समिति या पुरस्कार देने वाली संस्था के फैसले के बारे में कुछ नहीं कहना चाहता लेकिन अब, उन्हें खुद भी इसका एहसास होगा कि गांधी के रूप में उन्होंने एक जरूरी विकल्प को छोड़ दिया।
सोहलम के अलावा नोबेल संग्रहालय के क्यूरेटर डॉक्टर एंडर्स बैरैनी ने एक चैनल से कहा कि महात्मा गांधी एक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी कमी संग्रहालय को खटकती है। मुझे लगता है यहां एक बहुत बड़ा खाली स्थान है जहां हमें महात्मा गांधी को रखना चाहिए था। मेरे खयाल से यह वाकई एक गलती थी।
महात्मा को कब-कब मिला नामांकन :
महात्मा गांधी को 1937, 1938, 1939, 1947 में नोबेल के शांति पुरस्कार की श्रेणी में नामांकित किया गया था। इसके बाद 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई। 1948 में नोबेल समिति ने उन्हें यह सम्मान न देने का तर्क दिया था कि ‘इस साल इस सम्मान के लिए सही दावेदार के रूप कोई जीवित व्यक्ति नहीं है।’