बापू एक विचार थे जिसे किसी मुहर की जरूरत न थी, न है और 70 साल बाद अब नोबेल कमेटी को भी अक्ल आ गई है कि अगर महात्मा को सम्मानित करते तो नोबेल की खुशनसीबी होती। अब हमारा फर्ज है कि दुनिया जिस धरोहर के लिए भारत की कायल हो रही है उसे सहेजा जाए यानी गांधीत्व का गांधीवाद होना ठीक है लेकिन गांधीगीरी से गांधीगर्दी तक न पहुंचा जाए..गांधी जयंती विशेष : भवेश दिलशाद
गांधी एक ब्रांड हैं। क्रिकेट और बॉलीवुड के बाद सबसे ज्यादा असरदार शब्द है गांधी। गांधी से जुड़ाव का मतलब ही है कि आप महात्मा की बिरादरी के हैं, बेशक महात्मा न हों।