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ट्वेंटी-20 को समझ नहीं पाए सहवाग

जयपुर. seh ट्वेंटी-20 क्रिकेट के बारे में बहुतों का यह मानना है कि खेल के इस नए संस्करण में तकनीक, रणनीति और शैली ज्यादा मायने नहीं रखती। जब बल्लेबाज गेंदबाज की धुनाई करने की ठान लिया हो, तो गेंदबाज बेचारा क्या कर सकता है। ऐसे में कप्तान की सारी योजनाएं धरी की धरी रही जाती हैं और वह मैदान पर मूक दर्शक बनकर विपक्षी के चौके और छक्के का मजा लेने लगता है। इंडियन प्रीमियर लीग के पहले सेमीफाइनल में सहवाग की कप्तानी को देखकर ऐसा ही कुछ आभास हुआ।

राजस्थान रॉयल्स ने पहले सेमीफाइनल में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम को जिस अंदाज में धोया, उससे लगा कि कप्तान सहवाग के पास मैच को लेकर पुख्ता रणनीति नहीं थी। हालांकि मैच की पूर्व संध्या पर सहवाग ने टीम की योजना और रणनीति को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की थीं। पर मैच के दौरान वे किसी योजना को अमलीजामा पहनाते नजर नहीं आए।

हकीकत में सहवाग ट्वेंटी-20 क्रिकेट के खेल को ही सही ढंग से समझ नहीं पाए हैं। टी-20 का मतलब सिर्फ ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ही नहीं है। क्रिकेट का भले ही यह नया संस्करण हो पर इसमें सारी रणनीति 50-50 ओवर के क्रिकेट वाली ही लागू होती है। पहले कुछ देर तक पिच पर टिक कर पिच से अवगत होना फिर अपने शॉट्स खेलना। हां यह जरूर है कि खेल के इस संस्करण में सबकुछ फटाफट करना होता है।

पहले सेमीफाइनल में सहवाग से कई मौकों पर चूक हुई। टॉस जीतकर पहले उन्हें बल्लेबाजी चुननी चाहिए थी, पर सहवाग पिच रिपोर्ट पर कुछ ज्यादा ही भरोसा कर गए कि पिच सीमरों की मददगार है। अमूमन ट्वेंटी-20 क्रिकेट में पिच की उछाल और मूवमेंट से बल्लेबाज भयभीत नहीं होता। बल्लेबाज को मालूम है कि मैच 20 ओवरों का ही है और अगर कम गेंदों में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर अपनी टीम के लिए 25-30 रन भी जोड़ देता है तो यह टीम के मैच जीतने के लिए काफी है।

दूसरी बात ग्रीम स्मिथ और असनोदकर रॉयल्स के मैच जीताऊ खिलाड़ी नहीं हैं, पर जब ये खिलाड़ी टीम को एक अच्छा स्टार्ट दे देते हैं, तो वाटसन और युसूफ पठान जैसे खिलाड़ियों का काम आसान हो जाता है। पिछले मैच में भी प्रारंभ में स्मिथ और असनोदकर ने धीमी शुरुआत की। पिच पर कुछ देर टिके, फिर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी शुरु की।

रॉयल्स का पहला विकेट स्मिथ के रूप में 65 रन पर गिरा तब तक स्मिथ अपना काम कर चुके थे। इसके बाद वाटसन और पठान ने जोरदार बल्लेबाजी कर टीम के स्कोर को 200 रनों के आस-पास पहुंचा दिया। जिसका परिणाम हुआ कि दिल्ली पर तेज गति से रन बनाने का दबाव बढ़ गया। हालांकि लक्ष्य इतना बड़ा नहीं था, पर जल्दी-जल्दी रन बनाने के चक्कर में पहले सहवाग आउट हुए फिर गंभीर। टीम के इन स्टार खिलाड़ियों के आउट होते ही टीम के मैच जीतने की संभावनाएं धूमिल हो र्गई। दिल्ली का मध्यक्रम पहले ही डावांडोल था, ऐसे में उससे किसी चमत्कार की अपेक्षा नहीं थी।





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