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आगाज से पहले ही सुपरहिट हो गया था आईपीएल

नई दिल्ली. dlf इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के ‘छुपे रुस्तम’ राजस्थान रॉयल्स की जीत ने फिर साबित किया कि क्रिकेट में भविष्यवाणियां सच नहीं होतीं। यदि होतीं तो यह खेल आज भारत का ‘धर्म’ भी नहीं होता। तमाम विवादों और ‘ग्लैमरस क्रिकेट’ के बावजूद यह जीत ही वह आखिरी चीज है, जो क्रिकेटप्रेमियों के जेहन में अंत तक रहने वाली है।

सबसे सस्ती फ्रेंचाइजी जयपुर की टीम को ‘विशषज्ञों’ ने सबसे कमजोर कहा था। इसी ने फाइनल मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को मात दी। अब वे ‘विशेषज्ञ’ बगलें झांकने को मजबूर हैं। ऑस्ट्रेलिया के शान मार्श (सर्वाधिक रन) और पाकिस्तान के सोहेल तनवीर (सर्वाधिक विकेट) क्रमश: ऑरेंज कप और परपल कप के हकदार बने।

आगाज से पहले ही हो गया था सुपरहिट : एस्सेल ग्रप की टी-20 लीग इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) की काट के रूप में ललित मोदी के दिमाग की उपज आईपीएल आगाज से पहले ही सुपरहिट हो चुका था। इस प्रस्ताव को उद्योगपतियों, बॉलीवुड स्टारों और टीवी चैनलों ने हाथोंहाथ लिया। तभी ये संकेत मिल गए कि यह दुनिया के सबसे धनी घरेलू लीग के रूप में विकसित होगा। 44 दिन चले इस ‘सोप ओपेरा’ को दर्शकों का अथाह प्रेम मिला। इसके पहले सत्र की समाप्ति के बाद एक खालीपन महसूस हो रहा है। स्टेडियम खाली हो गए हैं। टीवी चैनलों पर वही ‘रामायण काल के सबूत, हंसी-ठहाके और सास-बहू’ के दर्शन होने लगे हैं।

वार्न का चमत्कार : अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके शेन वार्न को वह ‘सर्वश्रेष्ठ कप्तान’ माना गया, जिसने ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी कभी नहीं की। वार्न ने आईपीएल में अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की। यूसुफ पठान, रवींद्र जडेजा, असनोडकर की कामयाबी में क्रिकेट के इस ‘बैड ब्वॉय’ की ‘जादू की झप्पी’ का बड़ा हाथ रहा। हमवतन शेन वाटसन से कुछ ऐसी जोड़ी जमी कि यह ऑलराउंडर अपने कप्तान की मन की बात पढ़कर प्रदर्शन करता रहा और टूर्नामेंट का सबसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बना।

ग्लैमर आया साथ-साथ : क्रिकेटरों के हीरो बनने की कोशिश और बॉलीवुड स्टारों का क्रिकेट देखने मैदान पर पहुंचना पुरानी बात है। यह पहली बार हुआ, जब बॉलीवुड और क्रिकेट साथ-साथ आए। शाहरुख-जूही चावला, प्रीति जिंटा द्वारा फ्रेंचाइजी खरीदना, क्रिकेटरों को चियर-अप करना क्रिकेट का नया स्वरूप है।

चीयरलीडर्स ने जमाया रंग : छक्के-चौके और विकेट गिरने पर चीयरलीडर्स का मादक नृत्य क्रिकेट को और आकर्षक बना गया। यूरोपीय फुटबॉल लीग और अमेरिकी बॉस्केटबॉल लीग की तर्ज पर आईपीएल (पहले आईसीएल में) में किया गया यह प्रयोग उम्मीद से ज्यादा कामयाब रहा। इसका कुछ विरोध (प्रदर्शन भी) हुआ लेकिन समर्थकों के सामने विरोधी नतमस्तक हो गए।

हरभजन ने लिखा भारतीय क्रिकेट का काला अध्याय : मोहाली में 25 अप्रैल को मैच के बाद और पुरस्कार वितरण से पूर्व हारी हुई टीम मुंबई इंडियंस के कप्तान हरभजन ने किसी बात पर विपक्षी खिलाड़ी श्रीसंथ (किंग्स 11 पंजाब) को थप्पड़ जड़ दिया। सुबकते श्रीसंथ को टीवी पर सारी दुनिया ने देखा। सजा के तौर पर हरभजन आईपीएल से निलंबित हुए। लेकिन तब तक भारतीय क्रिकेट का काला अध्याय लिखा जा चुका था।

आइकॉन की चमक रही फीकी : लीग में सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह को आइकॉन का दर्जा दिया गया। सचिन आधे मैचों में डग आउट में बैठे रहे। सौरव-राहुल की टीमें सेमीफाइनल से बाहर हो र्गई। युवराज की टीम अंतिम चार में पहुंची लेकिन वे खुद ज्यादा कमाल नहीं कर सके। धोनी का प्रदर्शन अच्छा रहा लेकिन उनके नाम और छवि के अनुरूप नहीं।





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