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Janmashtami Janmashtami मुंबई. पिछले 24 सालों में दुनिया भर के 100 से ज्यादा शहरों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके भजन सम्राट अनूप जलोटा का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण का कर्म और प्रेम दर्शन वाकई अनूठा है और युवा पीढ़ी भी यह सब जानती है लेकिन उसे अक्सर गलत अर्थो में ले लेती है। श्रीकृष्ण को एक अद्भुत शक्ति मानने वाले अनूप जलोटा ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भवेश दिलशाद से विशेष रूप से बातचीत की..
आपने सात साल की उम्र में पहली बार जिस दिन स्टेज पर गाया था, वह दिन जन्माष्टमी का ही था, उस दिन से जुड़ी यादों के बारे में कुछ बताएं..
वह वाकई एक अविस्मरणीय दिन है। जब भी जन्माष्टमी आती है तो मुझे उस दिन की याद जरूर आती है। वहां करीब 10 हजार श्रोता थे और पिताजी ने अचानक कहा कि अनूप अब तुम्हें अकेले गाना है। सच पूछिए तो इतना बड़ा जनसमूह देखकर मुझे डर लगा, स्वाभाविक भी था लेकिन एक आत्मविश्वास भी था। और, मुझे लगता है कि यह शक्ति भगवान श्रीकृष्ण ने ही दी।
दूसरी बात यह कि इसी कार्यक्रम से मेरी शुरुआत हुई, एक गायक के बतौर। मुझे जितनी आशा थी, उससे कहीं ज्यादा श्रोताओं ने मुझे सराहा और स्नेह दिया। बस फिर चल पड़ा अनूप जलोटा के सुरों का कारवां।
यह बताएं कि त्योहारों का स्वरूप बदल रहा है और आपके बचपन से अब तक तो काफी बदलाव हुआ है, तो जन्माष्टमी कितनी बदल गई है?
असल में उन दिनों सभी के पास समय बहुत होता था तो उस समय का सदुपयोग त्योहारों में, उल्लास में और ईश्वर की भक्ति में होता था। अब सबकी अपनी व्यस्तताएं हैं। पहले हर घर में श्रीकृष्ण की झांकियां लगा करती थीं और बच्चे पूरे मोहल्ले में दौड़ते फिरते थे। हमारे घर में भी एक भव्य झांकी लगा करती थी.. लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। अब लोग पास के मंदिर मंे दर्शन कर लेते हैं। हम भी मंदिर ही जा पाते हैं।
तो, यह बदलाव सकारात्मक मानते हैं या नकारात्मक?
नकारात्मक ही है, लोगों के पास भगवान के लिए, भक्ति के लिए समय नहीं बचा जबकि वह रोजमर्रा की समस्याओं का हल और आत्मा की शांति यहीं से हासिल कर सकता है।
कृष्ण काव्य या दर्शन की प्रासंगिकता को किस तरह से परिभाषित करेंगे?
मेरी दृष्टि में कृष्ण एक शक्ति है जो जीवन में, मानव शरीर में लगातार संचारित होती है और यही शिक्षा देती है कि कर्म के मार्ग पर अटल रहना ही धर्म है, सत्कर्म से अडिग न होना ही जीवन है, बस यही शक्ति कृष्ण है। सच्च और आदर्श जीवन जीने का मार्ग श्री राम हैं और कर्म और प्रेम के अलौकिक स्वरूप कृष्ण हैं।
कृष्ण के प्रेम-दर्शन को लेकर युवाओं की सोच के बारे में क्या सोचते हैं आप?
देखिए, ऐसा नहीं है कि युवाओं को कृष्ण के जीवन या प्रेम-दर्शन के बारे में कुछ नहीं मालूम, युवा पीढ़ी जानती है। उसके लिए भी राधा और कृष्ण की छवियां उतनी ही जीवंत हैं जितनी कि किसी भी पुरानी पीढ़ी के लिए लेकिन जरूरत इस बात की है कि युवाओं का रुझान और झुकाव इस ओर बढ़ाया जाए। राधा और कृष्ण के प्रेम के बारे में, उस प्रेम की पवित्रता के बारे में उसे समझाया जाए और यह जिम्मेदारी अभिभावकों की है और पारिवारिक संस्कारों की।
कृष्ण काव्य पर आपकी पसंदीदा रचनाएं कौन सी हैं?
कृष्ण पर मुझे सबसे मधुर और सुंदर रचना लगती है : मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो.. इसके अलावा जब हम ऐसी लागी लगन.. गाते हैं तो ऐसा लगता है कि रोम-रोम में श्रीकृष्ण बस गए हैं।
भास्कर के पाठकों के लिए जनमाष्टमी पर आपका संदेश...
जन्माष्टमी पर संकल्प के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें और कर्म की ओर अग्रसर हो जाएं। विश्वास रखें आपका जीवन सफल हो जाएगा..
कुछ खास बातें : प्रसिद्ध भजन गायक पुरुषोत्तम दास जलोटा के सुपुत्र अनूप जलोटा का कृष्ण भक्ति पर आधारित एलबम कृष्णा तेरी बांसुरी एक हफ्ते पहले ही रिलीज हुआ है। अनूप जलोटा जन्माष्टमी के अवसर पर 3 और 4 सितंबर को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी और शिकागो में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करने जा रहे हैं।
अनूप जलोटा के पसंदीदा भजन सुनें :