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नेवादा से वृंदावन तक कृष्ण ही कृष्ण
कृष्ण भगवान से ज्यादा एक मनुष्य लगते हैं इसलिए देवताओं में शायद वे ज्यादा लोकप्रिय हैं। उनका दर्शन है तो गूढ़ लेकिन उसे समझने का रास्ता बहुत आसान है। उनका जीवन अति विशिष्ट होते हुए भी सामान्य है। इसलिए कृष्ण बच्चों से लेकर महान विद्वानों तक को आकर्षित और अचंभित करते हैं। इस बार जन्माष्टमी पर न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में कृष्ण भक्ति की धूम मची है। भारत के कई कलाकार विदेशों में कृष्ण को अपनी कला में समेटने के लिए तैयार हैं तो कई जगह कृष्ण भक्तों की टोलियां उल्लास बिखेर रही हैं। तो, चलिए हम आपको ले चलते हैं सांवली सलोनी छटाओं से सजी एक कृष्णमय झांकी में..
फीचर कोऑर्डिनेटर : भवेश दिलशाद



रेनों से 125 मील दूर नेवादा डैजर्ट के ब्लैक रॉक शहर में हर साल इस फेस्टिवल में करीब 40 हजार लोग एकत्रित होते हैं। इस बार यहां कृष्ण कैंप लगाया है। इसमें पारंपरिक हिंदू शैली में अमेरिकी युगल भी शादी कर रहे हैं। यहां पहले से ही जगन्नाथ मंदिर स्थित है जिसमें हिंदू देवता की आदमकद मूर्ति है।



विधवाएं और वे महिलाएं इन आश्रमों में रहती हैं जिन्हें उनके परिवारों ने किन्हीं कारणों से या बच्चों ने कैरियर बनाने के लिए त्याग दिया है। इनमें से खासकर युवा महिलाएं स्थानीय असामाजिक तत्वों से अपना शील बचाने के लिए निरंतर संघर्ष कर रही हैं। इन्हें खुद को बचाने के लिए अंतिम रूप से भगवान कृष्ण का ही सहारा है।



राधा-कृष्ण-मीरा या जन्माष्टमी पर केंद्रित कीजिए अपना मन और आप भी कुछ पंक्तियां कह डालिए। सामयिक और समकालीन भाव-भंगिमा हो तो क्या कहना.. और तत्काल भेज दीजिए हमें। चुनिंदा अच्छी कविताओं, क्षणिकाओं, त्रिवेणियों या हाइकू को हम वेबसाइट पर ऑनलाइन करेंगे और पढ़ेंगे सब.. (ध्यान रखें कविता की लंबाई ज्यादा न हो)
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सिंघाड़े की पूरी, श्रीखंड, गोपालकला,खीर आदि पकवान जन्माष्टमी के अवसर पर काफी समय से बनते चले आ रहे हैं। ऐसे ही कुछ पकवान बनाने की विधि यहां दी गई है



भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र परदे पर जीवंत करने वाले कलाकार नीतीश भारद्वाज का कहना है कि यह समझना जरूरी है कि कृष्ण के आदर्श और सिद्धांत कितने सामयिक हैं क्योंकि कृष्ण ने स्वयं को एक समाजवादी के रूप में प्रस्तुत किया है।



पिछले 24 सालों में दुनिया भर के 100 से ज्यादा शहरों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके भजन सम्राट अनूप जलोटा का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण का कर्म और प्रेम दर्शन वाकई अनूठा है और युवा पीढ़ी भी यह सब जानती है लेकिन उसे अक्सर गलत अर्थो में ले लेती है।




विचारकों, चिंतकों के साथ ही कई विधाओं के कलाकारों के लिए भी कृष्ण हर समय प्रासंगिक रहे हैं। फिर वह विधा संगीत हो, नृत्य हो, चित्रकारी हो या फिल्म। बात फिल्मों की करें तो जमाने के साथ कृष्ण को कई रूपों में पर्दे पर उभारा गया।



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देश भर में प्रमुख श्रीकृष्ण मंदिर   श्रीकृष्ण झांकी   विदेशों में कृष्ण मंदिर