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Kishor Kumar Kishor Kumar 
किशोर दा के साथी पी.के. गांगुली से खास बातचीत
खंडवा.मैं और अनूप कुमार न्यू हाईस्कूल में एकसाथ पढ़ते थे। अनूप कुमार मेट्रिक में तीन बार फैल हो गया था। किशोर कुमार मेरे से दो साल छोटा था उसने मेट्रिक में अनूप कुमार को मिला लिया था किशोर कुमार पास होते गए और दोनों एक क्लास में हो गए।
यह अनुछआ पहलू उजागर किया शिक्षकनगर में रहने वाले 81 वर्षीय सेवानिवृत्त प्राचार्य पी.के. गांगुली ने। उनकी किशोरदा के परिवार के साथ कई यादें जुड़ी हैं। वे अतीत में खोते हुए बताते है इसके बाद मैंने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश ले लिया।
जब मैं बीए फाइनल में पहुंच गया तब किशोर और अनूप ने भी यही एडमिशन लिया। प्रथम वर्ष में अनूप को एक विषय में सप्लीमेंट्री मिल गई थी जबकी किशोर फेल हो गए थे। शगांगुली कहते है किशोर को बचपन से ही गीत गाने का शौक था और पढ़ाई में उसका कभी मन नहीं लगता था।
कॉलेज के बाद किशोर बॉम्बे चले गए। पी.के. गांगुली बताते है किशोर दा को मारपीट की फि ल्में ज्यादा पसंद थी। उस समय साथी दोस्त दुर्गा चटर्जी, बाबू रंगरेज व बाबू के बड़े भाई उनके असली बाल सखा थे। हम लोग एक साथ फिल्में देखते थे।
रामेशवर के आम्रकुंज में खेलते थे कंचे
पी.के. गांगुली की पत्नी रमारानी गांगुली ने बताया 1976 की बात है मैं गोविंद झंवर, दिनेश गुप्ता व अन्य साथी बाम्बे गए थे। स्टेशन से उतरते ही हम लोग अनूप कुमार के निवास पर पहुचे। वहां कुछ देर रूकने के बाद किशोर कुमार के गौरीकुंज में गए। घर में प्रवेश करते ही मां गौरी देवी व पिता कुंजीलाल गांगुली की फोटो देखी। इसके बाद किशोर ने हमे ऊपर वाले हॉल में बुलाया।
उस समय वह लुंगी और रेशमी कुर्ते में हमसे मिलने आए। आते ही खंडवा के हालचाल पूछे। शुक्रवार का दिन था किशोर की पत्नी योगिता बाली का उपवास था। शाम होते ही महफिल जमी और खंडवा की बाते शुरू हो गई। सबसे पहले किशोर दा ने रामेश्व राम्रकुंज में कंचे खेलने की बात शुरू की। वे पुरानी यादों में खो गए थे और पूरे समय खंडवा की बातें करते रहे। किशोर दा ने कहा था बाम्बे तो मैं रोजगार की तलाश में आया था। खंडवा में रहने का मजा ही कुछ और है।